बिलासपुर। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के तहत जनजातीय बहुल क्षेत्रों में शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से 15 जून से 30 जून तक विशेष शिविर का आयोजन जिले के सभी विकासखंडों के 102 गांवों में किया जा रहा है। इसी क्रम में तखतपुर के ग्राम पंचायत बिनौरी और विकासखंड कोटा के ग्राम पंचायत खोंगसरा में शिविर का आयोजन किया गया जिसमें ग्रामीणों ने उत्साह से भागा लिया। शिविर में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही।
जनजातीय बहुल गांवों में शिविरों के माध्यम से ग्रामीणों और हितग्राहियों को शासन की विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी जा रही है और मौके पर ही कई सेवाएं प्रदान की गई। ग्राम पंचायत बिनौरी में शिविर का शुभारंभ सरपंच कविता मरावी की अध्यक्षता में हुआ। शिविर में उपसरपंच, पंचगण, पंचायत प्रतिनिधि और ग्रामवासी बड़ी संख्या में उपस्थित थे। शिविर में आकांक्षा पटेल, सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग, प्रभारी अधिकारी जसवंत सिंह जांगड़े (अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी), और सहायक अधिकारी डी.के. भारद्वाज सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। शिविर में 24 आयुष्मान कार्ड, 02 महतारी वंदन योजना लाभ, 02 आधार कार्ड बनाए गए, 37 लोगों का सिकलिंग, बी.पी. और शुगर जांच सहित स्वास्थ्य परीक्षण किया गया।
कोटा के ग्राम पंचायत खोंगसरा में आयोजित शिविर में आसपास के ग्राम तुलुफ, टाटीधार, मोहली और सोनसाय के ग्रामीण शामिल हुए। शिविर की अध्यक्षता उपसरपंच श्रीमती कलेसिया खुसरो ने की। शिविर में प्रभारी अधिकारी श्री राजेश वर्मा, सहायक अधिकारी श्री शुभम तिवारी मत्स्य अधिकारी,एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। शिविर में ग्रामीणों की समस्याएं सुनी गईं और योजनाओं की जानकारी प्रदान की गई। खोंगसरा शिविर में 25 आयुष्मान कार्ड जारी, 02 आधार कार्ड बनाए गए, 23 आधार कार्ड अपडेट,68 लोगों का बी.पी., शुगर व सिकलिंग जांच सहित स्वास्थ्य परीक्षण 100 आवेदन जाति, निवास व जॉब कार्ड हेतु प्राप्त हुए। इन शिविरों में ग्रामीणों ने सक्रिय भागीदारी निभाई और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाया। इस अवसर पर जनपद पंचायत अध्यक्ष, उपाध्यक्ष,सरपंच, विभागीय अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।
वर्तमान में बैराज में 60 प्रतिशत से अधिक जल भराव हो चुका है। बैराज की सुरक्षा हेतु मध्य रात्रि के बाद कभी भी अरपा नदी में पानी छोड़ा जा सकता है। अतः सर्व साधारण एवं कार्य एजेंसियों को सूचित किया जाता है कि बैराज के डॉऊन स्ट्रीम में नदी किनारे बाढ़ क्षेत्र में स्थापित चल-अचल संपत्ति सुरक्षित स्थानों पर ले जावें। बाढ़ क्षेत्र में स्थापित खनिज खदान ठेकेदार, औद्योगिक ईकाईयों, संस्थानों, निवासरत आम जनता, ग्रामवासी, नदी में कार्यरत निर्माण ऐजेन्सी, रेत ठेकेदार, ट्रक, ट्रैक्टर वाहन मालिक आदि सभी को सूचित किया जाता है कि नदी के जल प्रवाह को दृष्टिगत रखते हुए अपनी परिसम्पत्तियों, सामग्री, वाहन मशीनरी आदि को बाढ़ क्षेत्र से बाहर सुरक्षित कर लें, ताकि कोई क्षति न हो। अकस्मात बाढ़ से होने वाली किसी भी प्रकार की क्षति के लिए जल संसाधन विभाग जिम्मेदार नहीं होगा।
गौशालाओं के अध्यक्षों ने गांव गोद लेकर आवारा पशुओं के प्रबंधन पर सहमति भी जताई। इस अवसर पर सहायक कलेक्टर अरविंथ कुमारन डी भी मौजूद रहे। बैठक में सर्वप्रथम वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह द्वारा जिले में पशु तस्करी के दौरान पशु क्रूरता निवारण अधिनियम अंतर्गत किये गये कार्यवाही एवं वाहनों को राजसात किये जाने की जानकारी दी गयी। साथ ही सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिये ब्लेक स्पॉट चिन्हांकित करते हुये अस्थायी पशु शेड का निर्माण कर स्थानीय वालेंटियर्स की सहायता से पशुओं को रखे जाने का सुझाव दिया गया। अध्यक्ष मां भुनेश्वरी गौशाला गतौरा के द्वारा ग्राम के पशुओं के लिये मानदेय पर चरवाहे की व्यवस्था किये जाने की बात कही गई। कलेक्टर अग्रवाल ने कहा कि प्राचीन परंपरा की भांति गांव के पशुओं को चराने एवं देखरेख के लिये ग्रामीणों की सहभागिता, आर्थिक सहयोग अथवा अन्य स्थानीय व्यवस्था के माध्यम से चरवाहों की व्यवस्था की जा सकती है। ग्रामीण आपसी सामन्जस्य से यह सुनिश्चित करे कि आवारा पशुओं के कारण किसी प्रकार की कोई दुर्घटना न घटे। साथ ही गौशाला अध्यक्षों को जिम्मेदारी दी गयी कि अपने ग्रामों में इस प्रकार की व्यवस्था लागू कराने हेतु एक गांव गोद लेकर प्रयास करे। जिसमें अध्यक्ष जयगुरूदेव गौशाला भाड़ी द्वारा लखराम व भाड़ी में, अध्यक्ष कामधेनू गौशाला द्वारा लाखासार में, मां भुनेश्वरी गौशाला द्वारा गतौरा में एवं अध्यक्ष वासुदेव गौशाला द्वारा ओखर, पचपेड़ी व मल्हार में ग्रामीणों की सहभागिता से चरवाहों की व्यवस्था हेतु शत प्रतिशत प्रयास किये जाने की सहमति दी गयी। जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कई ग्रामों में आवारा पशुओं के कारण रबी फसल नहीं ले पाने की समस्या की ओर ध्यान आकृष्ट किया गया। जिस पर कलेक्टर द्वारा ग्राम के अन्य विभागों के स्थानीय कर्मचारियों की सहायता से पशुओं को व्यवस्थित रखने हेतु पशुपालकों को प्रेरित किये जाने निर्देशित किया गया। बैठक में संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवायें डॉ. जी.एस.एस. तंवर, जिला शिक्षा अधिकारी
बिलासपुर । छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेश की आंतरिक सुरक्षा को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान हेतु उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा के निर्देश पर पुलिस विभाग द्वारा टोल फ्री हेल्पलाइन नम्बर 1800-233-1905 जारी किया गया है, जो 24 घंटे और सप्ताह के सभी दिनों में सक्रिय रहेगा। इस हेल्पलाइन के माध्यम से राज्य का कोई भी नागरिक, अपने क्षेत्र में मौजूद संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों अथवा उनकी गतिविधियों के संबंध में सूचना सीधे पुलिस प्रशासन को दे सकता है। सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी, ताकि लोग बिना किसी भय के राष्ट्रहित में सहयोग कर सकें। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि देश की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। माननीय मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की सुशासन की सरकार राज्य को घुसपैठियों और अवैध गतिविधियों से मुक्त रखने के लिए प्रतिबद्ध है। जब तक ऐसी ताकतों को जड़ से नहीं उखाड़ा जाएगा, तब तक हमारे नागरिकों की सुरक्षा और शांति खतरे में रहेगी। यह हेल्पलाइन आम जनता को एक सीधा, सुरक्षित और प्रभावी माध्यम प्रदान करती है जिससे वे देशहित में अपनी भागीदारी निभा सकें। राज्य में अवैध बांग्लादेशी नागरिको की सूचना पर पूरी ताकत के साथ जांच और पहचान कर रही है। उपमुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे इस हेल्पलाइन पर प्राप्त हर सूचना को गंभीरता से लें, आवश्यक सतर्कता बरतें और जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई करें। साथ ही इस अभियान को लेकर आम नागरिकों में जागरूकता फैलाने हेतु प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए गए हैं। पुलिस विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि घुसपैठ के मामलों की पुष्टि के लिए प्राप्त सूचनाओं की सत्यता की पूर्ण जांच की जाएगी, ताकि निर्दोष लोगों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो।

गौरेला पेंड्रा मरवाही । ग्राम परासी में जिला प्रशासन द्वारा रक्त शक्ति महाअभियान की शुरुआत कलेक्ट्रेट किया गया। इस अभियान का उद्देश्य जीपीएम जिले को एनीमिया मक्त बनाने का लक्ष्य है 13 से 45 वर्ष की आयु वर्ग की महिलाओं और अन्य लोगों की हीमोग्लोबिन (एचबी) जांच करना है।