पीएम सूर्यघर योजना: बिलासपुरवासियों को मुफ्त बिजली से बड़ी राहत

बिलासपुर । पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जिलेवासियों को बिजली बिल में बड़ी राहत मिल रही है। योजना के अंतर्गत लगवाए गए सोलर पैनल से बिजली बिल या तो शून्य हो गया है या बहुत कम रह गया है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।

 योजना से मिली आर्थिक राहत

शहर के राधिका विहार फेस 2 निवासी क्रांति कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले 5 किलोवॉट का सोलर पैनल लगवाया। पहले उनका बिजली बिल लगभग 6 हजार रुपए प्रतिमाह आता था, लेकिन अब यह बिल शून्य हो गया है। सोलर पैनल लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से उन्हें सब्सिडी भी मिली।

इसी तरह, गुरमुख दास मूलचंदानी ने अपने पिताजी के नाम पर सोलर पैनल स्थापित करवाया। पहले उनके बिल 5 हजार रुपए प्रतिमाह आते थे, अब बिल शून्य हो गया है।

 योजना की विशेषताएँ

एक बार निवेश**, 25 वर्षों तक सतत बिजली आपूर्ति।
कोई विशेष मेंटेनेंस खर्च नहीं।
अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में सप्लाई कर आय अर्जित करने का अवसर।
केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये तक और राज्य सरकार से 30 हजार रुपये तक सब्सिडी।
सरकार द्वारा 300 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली** प्रदान की जा रही है।

वैभव कुमार अग्रवाल ने बताया कि योजना से उन्हें बिल में बड़ी राहत मिली है और यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीएम सूर्यघर योजना से न केवल आर्थिक बचत होती है बल्कि यह ऊर्जा आत्मनिर्भरता और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देती है।

बिहार रेलवे लाइन डबल ट्रैकिंग और CSIR क्षमता निर्माण योजना मंजूर

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बिहार में बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया एकल रेलवे लाइन खंड (104 किमी) के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान की, जिसकी कुल लागत लगभग 2,192 करोड़ रुपये है।

यह परियोजना बिहार राज्य के चार जिलों को कवर करेगी और भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 104 किलोमीटर की वृद्धि रहेगी।

यह रेल मार्ग राजगीर (शांति स्तूप), नालंदा, पावापुरी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्‍थलों को जोड़ता है, जो देश भर से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

इस मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 1,434 गांवों और लगभग 13.46 लाख आबादी, जिसमें दो आकांक्षी जिलें (गया और नवादा) शामिल हैं, की कनेक्टिविटी बढ़ेगी।

ये मार्ग कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, फ्लाई ऐश आदि वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्‍यक है। क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 26 मिलियन टन प्रति वर्ष की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। रेलवे पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन साधन होने के नाते देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और रसद लागत को कम करने में मदद करेगा, साथ ही तेल आयात (5 करोड़ लीटर) को घटाएगा और सीओ2 उत्सर्जन (24 करोड़ किलोग्राम) को कम करेगा, जो एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

बढ़ी हुई लाइन क्षमता से गतिशीलता में सुधार होगा तथा भारतीय रेल की कार्यकुशलता और सेवा विश्वसनीयता बढ़ेगी। मल्टी-ट्रैकिंग का यह प्रस्ताव परिचालन को सुगम बनाएगा और भीड़ को कम करेगा, जिससे भारतीय रेलवे की सबसे व्यस्त खंडों पर आवश्यक बुनियादी ढांचागत विकास होगा। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘नए भारत’ के विज़न के अनुरूप हैं, जो इस क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से “आत्मनिर्भर” बनाएंगी, जिससे  उनके रोज़गार/स्वरोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने पंद्रहवें वित्त आयोग 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए 2277.397 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास” पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग/वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (डीएसआईआर/सीएसआईआर) योजना को मंजूरी दे दी है।

इस योजना में सीएसआईआर द्वारा कार्यान्वित की जा रही है और देश भर के सभी अनुसंधान एवं विकास संस्थान, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, प्रतिष्ठित संस्थान और विश्वविद्यालय शामिल किए जाएंगे। यह पहल विश्वविद्यालयों, उद्योग, राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों में करियर बनाने के इच्छुक युवा, उत्साही शोधकर्ताओं के लिए एक व्यापक मंच प्रदान करती है। प्रख्यात वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों के मार्गदर्शन में, यह योजना विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग, चिकित्सा और गणितीय विज्ञान (एसटीईएमएम) के विकास को बढ़ावा देगी।

क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास योजना, प्रति दस लाख जनसंख्या पर शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ाकर, भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के स्‍थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस योजना ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में क्षमता निर्माण और उच्च-गुणवत्ता वाले मानव संसाधनों के भंडार का विस्तार करके अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है।

पिछले दशक के दौरान भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) के लिए किए गए समन्वित प्रयासों से, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) की रैंकिंग के अनुसार, भारत ने 2024 में वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) में अपनी स्थिति सुधारकर 39वीं रैंक प्राप्त कर ली है, जो भारत के प्रधानमंत्री के दूरदर्शी मार्गदर्शन में निकट भविष्य में और भी बेहतर होगी। सरकार द्वारा अनुसंधान एवं विकास को दिए गए सहयोग के परिणामस्वरूप, एनएसएफ, यूएसए के आंकड़ों के अनुसार, भारत अब वैज्ञानिक शोधपत्र प्रकाशनों के मामले में शीर्ष तीन में शामिल है। डीएसआईआर की योजना हजारों शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान कर रही है, जिनके परिणामों ने भारत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस अनुमोदन ने सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना कार्यान्वयन के माध्यम से सीएसआईआर की भारतीय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान को दी गई 84 वर्षों की सेवा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्रदान की है जो वर्तमान और भावी पीढ़ियों में देश की अनुसंधान एवं विकास प्रगति को गति प्रदान करती है। सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास (सीबीएचआरडी)” की चार उप-योजनाएँ हैं, जैसे (i) डॉक्टरेट और पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप (ii) एक्स्ट्राम्‍यूरल रिसर्च स्कीम, एमेरेटस साइंटिस्ट स्कीम और भटनागर फेलोशिप कार्यक्रम; (iii) पुरस्कार योजना के माध्यम से उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और मान्यता प्रदान करना; और (iv) यात्रा और संगोष्ठी अनुदान योजना के माध्यम से ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना।

यह पहल एक मजबूत अनुसंधान एवं विकास संचालित नवाचार इकोसिस्‍टम के निर्माण और 21वीं सदी में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय विज्ञान को तैयार करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एकीकृत योजना और हितधारक परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाने पर केन्‍द्रीत है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।

कैबिनेट ने 2277.397 करोड़ रुपये की डीएसआईआर योजना ‘क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास’ को मंजूरी दी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने पंद्रहवें वित्त आयोग 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए 2277.397 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास” पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग/वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (डीएसआईआर/सीएसआईआर) योजना को मंजूरी दे दी है।

इस योजना में सीएसआईआर द्वारा कार्यान्वित की जा रही है और देश भर के सभी अनुसंधान एवं विकास संस्थान, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, प्रतिष्ठित संस्थान और विश्वविद्यालय शामिल किए जाएंगे। यह पहल विश्वविद्यालयों, उद्योग, राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों में करियर बनाने के इच्छुक युवा, उत्साही शोधकर्ताओं के लिए एक व्यापक मंच प्रदान करती है। प्रख्यात वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों के मार्गदर्शन में, यह योजना विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग, चिकित्सा और गणितीय विज्ञान (एसटीईएमएम) के विकास को बढ़ावा देगी।

क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास योजना, प्रति दस लाख जनसंख्या पर शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ाकर, भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के स्‍थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस योजना ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में क्षमता निर्माण और उच्च-गुणवत्ता वाले मानव संसाधनों के भंडार का विस्तार करके अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है।

पिछले दशक के दौरान भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) के लिए किए गए समन्वित प्रयासों से, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) की रैंकिंग के अनुसार, भारत ने 2024 में वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) में अपनी स्थिति सुधारकर 39वीं रैंक प्राप्त कर ली है, जो भारत के प्रधानमंत्री के दूरदर्शी मार्गदर्शन में निकट भविष्य में और भी बेहतर होगी। सरकार द्वारा अनुसंधान एवं विकास को दिए गए सहयोग के परिणामस्वरूप, एनएसएफ, यूएसए के आंकड़ों के अनुसार, भारत अब वैज्ञानिक शोधपत्र प्रकाशनों के मामले में शीर्ष तीन में शामिल है। डीएसआईआर की योजना हजारों शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान कर रही है, जिनके परिणामों ने भारत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस अनुमोदन ने सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना कार्यान्वयन के माध्यम से सीएसआईआर की भारतीय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान को दी गई 84 वर्षों की सेवा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्रदान की है जो वर्तमान और भावी पीढ़ियों में देश की अनुसंधान एवं विकास प्रगति को गति प्रदान करती है। सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास (सीबीएचआरडी)” की चार उप-योजनाएँ हैं, जैसे (i) डॉक्टरेट और पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप (ii) एक्स्ट्राम्‍यूरल रिसर्च स्कीम, एमेरेटस साइंटिस्ट स्कीम और भटनागर फेलोशिप कार्यक्रम; (iii) पुरस्कार योजना के माध्यम से उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और मान्यता प्रदान करना; और (iv) यात्रा और संगोष्ठी अनुदान योजना के माध्यम से ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना।

यह पहल एक मजबूत अनुसंधान एवं विकास संचालित नवाचार इकोसिस्‍टम के निर्माण और 21वीं सदी में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय विज्ञान को तैयार करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मिशन नीव के तहत राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन

भोपाल। मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में मिशन नीव कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर ECCE थीम पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में पपेट शो, स्टोरी टेलिंग, गतिविधि आधारित शिक्षण और अभिभावक बैठक जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियाँ शामिल थीं। इन आयोजनों का उद्देश्य प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना था। मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए इन कार्यक्रमों में समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखी गई।

एशियाई खेल 2026: खिलाड़ियों की भागीदारी के लिए नए चयन मानदंड जारी

नई दिल्ली। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने एशियाई खेल 2026(asian-games) और अन्य बहु-खेल आयोजनों में खिलाड़ियों और टीमों की भागीदारी के लिए चयन मानदंड जारी किए हैं। इसका उद्देश्य एक पारदर्शी और न्यायसंगत ढांचा तैयार कर यह सुनिश्चित करना है कि केवल उन एथलीटों को ही बहु-विषयक खेल आयोजनों में भागीदारी के लिए विचार किया जाए जिनके पास पदक जीतने का वास्तविक मौका है।

चयन मानदंडों में मापनीय और गैर-मापनीय दोनों प्रकार की प्रतियोगिताओं के लिए मानक निर्धारित किए गए हैं जो एशियाई खेलों, पैरा एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई इनडोर खेलों, एशियाई समुद्र तट खेलों, युवा ओलंपिक, एशियाई युवा खेलों, राष्ट्रमंडल युवा खेलों जैसे बहु-खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी के बारे में निर्णय लेने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत होंगे। हालांकि ओलंपिक और ऐसी अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं इसके दायरें में नहीं आएंगे जहां एथलीट या टीम की भागीदारी, संबंधित अंतरराष्ट्रीय महासंघों द्वारा निर्धारित योग्यता मानकों द्वारा निर्धारित की जाती है।

मापनीय व्यक्तिगत खेल और स्पर्धाओं के लिए, कोई भी खिलाड़ी भारतीय दल में तभी जगह पा सकेगा जब उसने आगामी एशियाई खेलों से पहले 12 महीनों के भीतर आयोजित किसी अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ द्वारा मान्यता प्राप्त प्रतियोगिता में पिछले एशियाई खेलों के छठे स्थान के प्रदर्शन की बराबरी की हो या उससे बेहतर प्रदर्शन किया हो। यदि वह खेल या स्पर्धा पिछले एशियाई खेलों में शामिल नहीं थी, तो चयन मानदंड आगामी एशियाई खेलों से पहले 12 महीनों के भीतर उस खेल या स्पर्धा के लिए आयोजित सीनियर एशियाई चैंपियनशिप के समान मानदंडों के आधार पर होंगे।

गैर-मापनीय व्यक्तिगत खेल और स्पर्धाओं के लिए, जहां आगामी एशियाई खेलों से पूर्व 12 महीनों के भीतर सीनियर एशियाई चैम्पियनशिप आयोजित की गई हो या विश्व रैंकिंग नियमित रूप से जारी की जाती हो, ऐसे खिलाड़ी को दल में शामिल करने पर विचार किया जाएगा जिसने पिछले 12 महीनों के भीतर आयोजित अंतिम सीनियर एशियाई चैम्पियनशिप में अपने भार या स्पर्धा में छठा या उससे बेहतर स्थान प्राप्त किया हो या उसकी विश्व रैंकिंग अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में एशियाई देशों में शीर्ष 6 में शामिल हो।

यदि आगामी एशियाई खेलों से पहले पिछले 12 महीनों में कोई सीनियर एशियाई चैंपियनशिप आयोजित नहीं की गई है और कोई अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग नियमित रूप से प्रकाशित नहीं की गई हो तो उस स्थिति में एथलीट को समकक्ष अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में एशियाई देशों के बीच शीर्ष 6 में स्थान प्राप्त करना होगा।

टीम खेलों (जैसे फुटबॉल, हॉकी आदि) और टीम स्पर्धाओं (जैसे रिले, युगल, मिश्रित युगल आदि) के लिए, 12 महीनों के भीतर आयोजित अंतिम सीनियर एशियाई चैंपियनशिप में शीर्ष 8 में स्थान प्राप्त करने वाली टीम या अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में एशियाई देशों में शीर्ष 8 में स्थान प्राप्त करने वाली टीम को एशियाई खेलों में भाग लेने के लिए विचार किया जाएगा।

अगर अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग प्रकाशित नहीं की गई है या आगामी एशियाई खेलों से पहले 12 महीनों के भीतर सीनियर एशियाई चैम्पियनशिप आयोजित नहीं की गई है, तो उस स्थिति में टीम को समकक्ष अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में एशियाई देशों के बीच शीर्ष 8 में स्थान प्राप्त करना होगा।

इस मानदंड में छूट का एक प्रावधान है जो मंत्रालय को यह अधिकृत करता है कि यदि विशिष्ट खेल अथवा भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के विशेषज्ञों की राय के आधार पर उचित कारणों से निर्धारित मानदंडों में छूट में व्यक्तियों और टीमों की भागीदारी की सिफारिश की जाती है तो वह उचित निर्णय ले सकता है।

इसमें प्रावधान है कि यदि राष्ट्रीय खेल महासंघों का उद्देश्य केवल भागीदारी हो तथा उत्कृष्टता प्राप्त करना न हो तो मंत्रालय उनके द्वारा अनुशंसित नामों को मंजूरी नहीं दे सकता।

इसके अलावा, यदि विशिष्ट खेल विधाओं के विशेषज्ञ और भारतीय खेल प्राधिकरण को लगता है कि किसी खेल के लिए एशियाई चैंपियनशिप नियमों को दरकिनार करने और खिलाड़ियों को पात्रता मानदंडों को पूरा करने में मदद करने के लिए अनियमित अंतराल पर आयोजित की जा रही है, तो मंत्रालय भागीदारी को मंजूरी नहीं दे सकता है, खासकर यदि प्रतियोगिता का स्तर कम है या यदि आगामी एशियाई खेलों में भाग लेने वाले शीर्ष राष्ट्र उक्त प्रतियोगिता में अनुपस्थित हैं।

चयन मानदंडों में आगे यह प्रावधान है कि केवल वे खिलाड़ी, कोच और सहायक कर्मचारी ही भारतीय दल का हिस्सा होंगे, जिन्हें सरकार की लागत पर मंजूरी दी गई है। इनके अलावा कोई भी अतिरिक्त खिलाड़ी, कोच और सहायक कर्मचारी शामिल नहीं किए जाएंगे, भले ही इसमें सरकार का कुछ भी खर्च न हो।

चयन मानदंडों के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं:

https://yas.gov.in/sites/default/files/Letter%2024.09.2025%20Selection%20Criteria%20for%20Participa

एनटीपीसी करेगा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को 5.58 करोड़ की मदद

  • उच्च स्तरीय ब्लड बैंक एवं पैथोलॉजी लैब की होगी स्थापना

  • एनटीपीसी एवं अस्पताल प्रबंधन के बीच हुआ अनुबंध

बिलासपुर। कार्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) के तहत नवनिर्मित कुमार साहब स्व. दिलीप सिंह जुदेव शासकीय सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, बिलासपुर में ब्लड बैंक एवं लैब को अत्याधुनिक एवं विश्वस्तरीय बनाने के लिये लगभग रूपये 5.58 करोड़ का उपकरण क्रय कर उनके द्वारा प्रदाय किये जाने हेतु मेमोरेण्डम ऑफ एसोसिएशन (एम.ओ.ए.) में डॉ0 भवनीश सामान सी.एम.ओ एन.टी.पी.सी. एवं डॉ. बी.पी. सिंह चिकित्सा अधीक्षक के द्वारा विजय कृष्ण पाण्डेय, एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर, एन.टी.पी.सी., सीपत एवं संजय कुमार अग्रवाल, कलेक्टर बिलासपुर के समक्ष अनुबंध पर हस्ताक्षर किये गये।

एन.टी.पी.सी. के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर विजय कृष्ण पाण्डेय एवं उनकी टीम द्वारा अस्पताल का निरीक्षण किया गया। उनके द्वारा सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का निर्माण, वार्ड, लैब एवं चिकित्सकीय व्यवस्था की प्रशंसा की गयी। उनके द्वारा बताया गया कि यह छत्तीसगढ़ का प्रथम विश्वस्तरीय सुविधापूर्ण चिकित्सालय है एवं यह हॉस्पिटल इस प्रदेश की जनता के लिये बहुत लाभदायी होगा। भविष्य में भी वे सी.एस.आर. के तहत या अन्य किसी भी तरह से इस सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सालय के लाभ व सुविधा के लिये सहयोग प्रदान करते रहेंगे। कलेक्टर संजय अग्रवाल मरीजों को समुचित विश्वस्तरीय सुविधा प्रदान करने शीघ्र ही सभी कार्य पूर्ण संपादित किये जाने हेतु आश्वस्त किया। इस अवसर पर एन.टी.पी.सी. के जय प्रकाश सत्यम, असिस्टेंट जी.एम. (एच.आर.), मोहन लाल, सी.एस.आर. हेड, ज्योत्सना कुशवाहा, हेड लीगल सेल, श्वेता जी, डी.जी.एम. एवं छत्रपाल पटेल, चीफ फार्मासिस्ट, एन.टी.पी.सी. एवं सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, बिलासपुर के ध्रुव पाण्डेय, भूपेन्द्र कौशिक, श्रीमती आराधना दास, श्रीमती विनिता पटले एवं प्रभात शुक्ला उपस्थित थे।

टेबल टेनिस स्टेट रैंकिंग: बिलासपुर के शिवाय मेघानी बने अंडर-11 उपविजेता

कोंडागाँव में आयोजित 2025 द्वितीय छत्तीसगढ़ स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस प्रतियोगिता के अंडर-11 वर्ग में बिलासपुर के मास्टर शिवाय मेघानी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उपविजेता का खिताब अपने नाम किया। कोच के. वेंकट प्रसाद और  के. साई प्रशांत के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिवाय ने फाइनल तक पहुँचकर दमदार खेल का प्रदर्शन किया। माता-पिता डॉ. राकेश मेघानी और डॉ. प्रियांका मेघानी के सहयोग से मिली इस उपलब्धि ने परिवार सहित खेल जगत को गौरवान्वित किया है।

समाजवाद, अहिंसा और लोककल्याण के अग्रदूत श्री श्री 1008 श्री अग्रसेन जी महाराज की 5149वीं जयंती पर विशेष

विगत कई दशकों से बिलासपुर, बिल्हा, कोटा, अकलतरा जैसे छत्तीसगढ़ के सभी छोटे बड़े कस्बों में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को श्री श्री 1008 श्री अग्रसेनजी महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई जाती हैं। इस वर्ष 31 अगस्त 2025 को जिलाधीश श्री संजय अग्रवाल ने बिलासपुर शहर में वृक्षारोपण एवं जल संचयन कार्यक्रम से श्री अग्रसेन जयंती समारोह का श्रीगणेश किया। रक्तदान, गौ माता सेवा, खेलकूद प्रतियोगिता जैसे पचासों कार्यक्रमो के उपरांत 22 सितंबर 2025 को समाजवाद, अहिंसा और लोककल्याण के अग्रदूत श्री श्री 1008 श्री अग्रसेन जी महाराज की 5149वीं जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। श्री अग्रसेन जी महाराज की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए ललित अग्रवाल ने बताया कि भारत भूमि में समय समय अनेकों महापुरुष अवतरित हुए है। महाराज अग्रसेन भारतीय सभ्यता के उन चिरस्थायी आदर्शों में से एक हैं, जिन्होंने समाज में समानता, अहिंसा और समुचित वितरण की भावना को जन्म दिया। युगाब्द से 22 वर्ष पूर्व ( ईसापूर्व 3124 ) द्वापर युग के अंतिम चरण में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को प्रतापनगर में सूर्यवंशी भगवान श्रीराम के बेटे कुश की 34वीं पीढ़ी के वंशज क्षत्रिय राजा वल्लभसेन व माता भगवतीदेवी के घर अग्रसेनजी का जन्म हुआ था। 15 वर्ष की आयु में अपने पिता राजा वल्लभसेन के साथ पांडवों की तरफ से कौरवों से महाभारत का युद्ध करते समय 10वे दिन भीष्म पितामह के बाणों से राजा वल्लभसेन को वीरगति मिलने से अग्रसेनजी प्रतापनगर के महाराज बनाये गये थे. नागकुमारी माधवी से विवाह कर उन्होंने द्वापर युग में 7 वर्षों तक प्रतापनगर में राज किया. द्वापर से कलयुग के परिवर्तन पर जब भगवान श्री कृष्ण ने अपना शरीर त्याग किया था, तब 22 वर्षीय महाराज श्री अग्रसेन ने वर्तमान हरियाणा के अग्रोहा में सरस्वती नदी के तट पर नए राज्य की स्थापना कर 101 वर्षों तक राज करने के उपरांत कुलदेवी महालक्ष्मी से परामर्श करके अपने ज्येष्ठ पुत्र विभु को शासन सौंपकर तपस्या करने चले गए और वानप्रस्थ आश्रम में तपस्या के दौरान भौतिक शरीर का परित्याग किया. उन्हें व्यापार, कृषि और समानता पर आधारित व्यवस्था लागू करने हेतु याद किया जाता है. एकबार अकाल पड़ने पर वे वेश बदल कर राज्य भ्रमण के दौरान चार सदस्यों के परिवार में गये. जो भोजन करने ही वाले थे कि अतिथि को देखकर चारो ने अपनी अपनी थाली से एक अंश निकाल कर अतिथि को परोसा. इसी से प्रेरणा लेकर महाराज अग्रसेन ने ‘एक ईंट और एक रुपया’ की नीति से समाज में नवआगंतुकों को आत्मनिर्भर बनाकर सामूहिक सहयोग और सामाजिक सुरक्षा की मिसाल पेश की। उस समय समाज जाति व अस्पृश्यता विहीन था तथा एक कुल से दुसरे कुल में स्वयंवर द्वारा योग्य वर का चयन कर विवाह सम्पन्न होते थे. क्षत्रिय होते हुए भी उन्होंने यज्ञों में पशु बलि का विरोध करते हुए अहिंसा का मार्ग चुना और राज्य की समृद्धि के लिए हिंसा- रहित अग्रवंश ( वैश्य वर्ग ) खड़ा किया। महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य को 18 जनपदों (गणराज्य/राज्यांश) में विभाजित किया था और प्रत्येक गणराज्य के प्रशासनिक प्रमुख को उन्होंने अपने पुत्रवत माना था. महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य में लोकतांत्रिक प्रणाली की नींव भी रखी थी, जहाँ प्रत्येक जनपद से एक-एक प्रतिनिधि लेकर प्रशासन का संचालन होता था. प्रत्येक जनपद के अपने अपने गुरु थे जो ऋषि थे, वही आगे चल कर अग्रकुल कहलाए और उनके गोत्र उनके ऋषियों से ही बने.

गणराज्य प्रमुख गोत्र नाम महर्षि जी का नाम

1.विभु – गर्ग गोत्र – महर्षि गर्गाचार्य
2.भीमदेव – गोयल गोत्र – महर्षि गोभिल
3.शिवजी – गोयन गोत्र – महर्षि गौतम
4.सिद्धदेव – बंसल गोत्र – महर्षि वत्स
5.बासुदेव – कंसल गोत्र – महर्षि कौशिक
6.बालकृष्ण – सिंघल गोत्र – महर्षि शांडिल्य
7.धर्मंनाम – मंगल गोत्र – महर्षि मंडव्य
8.अर्जुन – जिंदल गोत्र – महर्षि जैमिन
9.रणकृत – तुंगल गोत्र – महर्षि तांड्य
10.गुप्तनाम – ऐरन गोत्र – महर्षि और्व
11.पुष्पदेव – धारण गोत्र – महर्षि धौम्य
12.माधोसेन – मधुकुल गोत्र – महर्षि मुदगल
13.केशवदेव – बिंदल गोत्र – महर्षि वशिष्ठ
14.भुजमान – मित्तल गोत्र – महर्षि मैत्रेय
15.कंवलदेव – कुच्छल गोत्र – महर्षि कश्यप
16.गुणराज – नांगल गोत्र – महर्षि नगेन्द्र
17.वासगी – भंदल गोत्र – महर्षि भारद्वाज
18.शिवजीभान – तायल गोत्र – महर्षि तैलंग

उक्त 18 गोत्र मूल ऋषियों के नामों पर आधारित हैं, जो अग्रवाल समाज की पहचान हैं. विचारणीय प्रश्न यह भी है कि यदि महाराजा श्री अग्रसेन जी के 18 पुत्र थे. तब तो सभी अग्रवाल आपस में पितृकुल से जुड़े भाई बहन हो जायेंगे तो अग्रवाल आपस में विवाह सम्बंध कैसे कर सकते है. संभव है कि हम सब महाराजा श्री अग्रसेन जी के आदर्शो पर चलने वाले भिन्न भिन्न जनसमूह से हो. लोकतांत्रिक शासन, न्यायप्रिय नीति, आर्थिक समानता और शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाएँ हर नागरिक के लिए सुलभ कराने वाले अग्रसेनजी ने अपने समय में प्रजाहित को सर्वोपरि स्थान दिया। महाराज अग्रसेन के नेतृत्व में अग्रोहा राज्य व्यापार, सामाजिक समन्वय, धर्म, न्याय और समृद्धि का केंद्र बन गया था। महाराज अग्रसेन के नाम से देशभर में अस्पताल, विद्यालय, सामुदायिक भवन, धर्मशालाएँ संचालित हैं, जो उनके लोकहितकारी दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण हैं।
उनकी 5100 वीं जयंती के पावन अवसर पर 1976 में भारत सरकार द्वारा, 2016 में मालदीव द्वारा तथा 2017 में भारतीय डाक विभाग द्वारा अग्रसेन की बावली पर एक स्मारक डाक टिकिट जारी किये गये है. छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्य-सरकारों द्वारा उनके आदर्शो को स्वीकार कर उनके नाम पर प्रतिवर्ष रु. दो लाख से अधिक नगद पुरस्कार प्रदान किये जा रहे है. महाराज अग्रसेन न सिर्फ एक कालजयी शासक थे, बल्कि समता, उदारता व अहिंसा के ऐसे अनुकरणीय आदर्श हैं, जिनकी प्रेरणा आज भी सामाजिक उत्थान और सद्भाव की धुरी बनी हुई है। हर वर्ष हम अग्रसेन जयंती मनाते है, लेकिन अग्रकुल संस्थापक के इतिहास को अगली पीढ़ी तक नहीं पहुचा पाते है. कार्तिक अमावस्या को दीपावली,  फाल्गुन पूर्णिमा को होली, चैत्र शुक्ल तेरस को महावीर जयंती,  कार्तिक पूर्णिमा को गुरुनानक जयंती,  चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी,  भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को जन्माष्टमी और आश्विन माह शुक्ल प्रतिपदा को श्री अग्रसेन जयंती इस बात के द्योतक हैं कि हमारे सभी व्रत त्यौहार तिथि आधारित हैं ना कि ग्रेगोरियन कलेंडर के दिनांक आधारित। इन्ही त्रुटियों को दूर करने हेतु देश के जानेमाने हिंदू चिंतक एवं विचारक अग्रकुल के ही सुनील गंगाराम गर्ग द्वारा संपादित व ललित हीरालाल गर्ग के बिलासपुर आवास से हिंदू दैनंदिनी न्यास द्वारा नववर्ष चैत्र प्रतिपदा युगाब्द 5127 के पावन अवसर पर बिलासपुर से विगत पांच वर्षो से लगातार हिंदू दैनंदिनी प्रकाशित कर अग्रवंश सहित हिंदु समाज को वास्तविकता से अवगत कराने हेतु विश्व में पहली बार हिंदू तिथि को अंको में लिखने की विधि सहित सरल भाषा में तिथि, व्रत, त्यौहार, ऋतु आदि एकसाथ उपलब्ध कराकर हिंदुत्व के विलुप्त होते सद्गुणों को सहेजने व नई पीढीयों को अपने वैभवशाली इतिहास से अवगत कराने हेतु उद्यम किया जा रहा है.

श्री श्री 1008 श्री महाराजा अग्रसेन जी की विशेषताए

दो युगों के दृष्टा : द्वापर के अंत से लेकर कलयुग में भी राज
जाति विहीन समाज : सूर्यवंशी होकर नागवंशी से विवाह
अहिंसा : पशुबलि/मांसाहार का त्याग कर शाकाहार अपनाया
वर्ण परिवर्तन : क्षत्रिय वर्ण को त्याग शुद्ध सात्विक वैश्य वर्ण अपनाया
समाजवाद : समाज से नवआगंतुकों को एक ईंट और एक रुपया दिलवाकर समकक्ष बनाना
धर्मार्थ कार्य : आमदनी का निश्चित हिस्सा धर्मार्थ समाज को वापस करना
समाजसेवा : उस दौर में वृक्षारोपण, कुएं, बावड़ी, धर्मशालाओ का निर्माण
गोत्र व्यवस्था : 18 पुत्रों को यज्ञ कर 18 ऋषियों के मूल गोत्र दिलवाना
सर्वाधिक न्यायपूर्ण राज : 7 वर्षों तक द्वापर युग में तथा 101 वर्षों तक कलयुग में कुल 108 वर्षों न्यायपूर्ण राज करने वाले एकमात्र शासक

उपरोक्त विशेषताओं को ध्यान रखते हुए उनके वंशज (स्टेक होल्डर) होने के नाते आज हमें जाति व्यवस्था का त्याग कर केवल गोत्र उपयोग करना ना केवल ज्यादा प्रासंगिक होगा, अपितु समग्र हिंदू समाज के उत्थान में सहायक होकर पुरुष/महिला के अनुपात की कमी को दूर कर सभी के विवाह सम्बंध में सहायक भी होगा. उनकी 5149वीं जयंती पर हिंदू समाज में व्याप्त बुराइयों का त्याग कर उपरोक्त महर्षियों के गोत्र उपनाम अपनाकर जाति विहीन समरस समाज बनाकर उनके आदर्शो को अपनाना हीं उनके प्रति सही सम्मान होगा. यदि आपके मन में जाति व्यवस्था के अस्तित्व में आने के कारण, अस्पृश्यता के कारण, हिंदुत्व के वैज्ञानिक सद्गुण व काल गणना से सम्बन्धित कोई प्रश्न हो तो निसंकोच सम्पर्क करे यथासम्भव निराकरण करने का प्रयास किया जायेगा.

गतौरी में RSS शताब्दी समारोह की तैयारी को लेकर कार्यकर्ताओं की बैठक

बिलासपुर । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की स्थापना के 100 वर्ष पूर्ण होने पर मनाए जाने वाले शताब्दी समारोह की तैयारी को लेकर बिलासपुर जिले के ग्राम गतौरी में संघ कार्यकर्ताओं की ग्रामीण स्तर पर  बैठक आयोजित हुई। बैठक में कार्यक्रम की रूपरेखा, विभिन्न आयोजन और ग्राम सहित आसपास के क्षेत्रों की सहभागिता सुनिश्चित करने पर चर्चा हुई।

 बैठक में मौजूद कार्यकर्ता

बिलासपुर के ग्राम गतौरी में RSS कार्यकर्ताओं की बैठक, शताब्दी समारोह की तैयारी पर चर्चा करते हुए
बिलासपुर के ग्राम गतौरी में RSS कार्यकर्ताओं की बैठक, शताब्दी समारोह की तैयारी पर चर्चा करते हुए

बैठक में सुरेंद्र पाण्डेय, दिनेश सिंह, रामनाथ सूर्यवंशी, रामप्रसाद भार्गव, रामकिशुन यादव,, सूर्यप्रकाश मरकाम (सरपंच गतौरी), रमेश ओग्रे (उप सरपंच गतौरी), मिलाप सिंह, राजा सिंह, बिट्टू सिंह, अनुराग शुक्ला, टिंकू सिंह, गणेश साहू, निखिल शुक्ला, जग्गू मिरी, अजय सिंह, रिंकू, हर्ष सिंह, छोटू सिंह, पवन साहू, पंकज शुक्ला और दीप साहू शामिल हुए।

कार्यकर्ताओं ने निर्णय लिया कि RSS का शताब्दी समारोह गांव-गांव तक जोड़ने वाला एक व्यापक आयोजन होगा, जिसमें सांस्कृतिक और सामाजिक गतिविधियों को प्राथमिकता दी जाएगी।

GPM कवियों की याद में ‘तर्पण’ काव्यपाठ प्रतियोगिता, विद्यार्थियों और शिक्षकों ने दी शानदार प्रस्तुति

गौरेला पेण्ड्रा मरवाही Gpm। हिन्दी पखवाड़ा और पितृपक्ष अवसर पर डाइट पेण्ड्रा और आनंद फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में “तर्पण” नाम से जिला स्तरीय काव्यपाठ प्रतियोगिता आयोजित हुई।

 विद्यार्थियों और शिक्षकों की भागीदारी

पेण्ड्रा में आयोजित तर्पण काव्यपाठ प्रतियोगिता
पेण्ड्रा में आयोजित तर्पण काव्यपाठ प्रतियोगिता

इस प्रतियोगिता में कक्षा 9वीं से 12वीं के विद्यार्थियों ने हिन्दी कवियों की रचनाओं का पाठ किया। साथ ही पहली बार शिक्षक वर्ग के लिए भी स्वरचित कविता पाठ का आयोजन हुआ। जिले से कुल 35 प्रतिभागियों ने मंच पर अपनी प्रस्तुतियों से सभी को प्रभावित किया।

विजेता प्रतिभागी

विद्यार्थी वर्ग (काव्यपाठ)**: ओंकार कैवर्त्य (प्रथम), आस्था सोंधिया (द्वितीय), अनन्या श्रीवास्तव (तृतीय)
विद्यार्थी वर्ग (स्वरचित कविता)**: मानवी मिश्रा (प्रथम), अनन्या श्रीवास्तव (द्वितीय), रीना (तृतीय)
शिक्षक वर्ग (स्वरचित कविता)**: नीरज चौधरी (प्रथम), दुर्गेश दुबे (द्वितीय), शशांक शेण्डे (तृतीय)

अतिथियों के विचार

मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष समीरा पैकरा ने कहा कि पेण्ड्रा की भूमि साहित्यकारों और मनीषियों से सदैव समृद्ध रही है।
जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह ने कहा कि कविता जन-जन को जागरूक करने का माध्यम है।
अध्यक्षता कर रहे जेपी पुष्प ने कविता को मानवीय संवेदना का आधार और समाज का दर्पण बताया।