बिलासपुर। रमन दुबे । ब्रह्माजी को झूठ बोलने का दिया गया शाप इतना भयानक था कि उसका प्रभाव कलियुग में भी दिखाई देता है। क्रोधित शिव के काल भैरव अवतार ने ब्रम्हा के पांचवें सिर को धड़ से अलग कर दिया। वहीं झूठ का साथ देने के कारण श्रापित केतकी पुष्प को भगवान शिव पर नहीं चढ़ाते हैं।
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के दूसरे दिन कथावाचिका ईश्वरी देवी ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को सांसरिक मोह माया से ऊपर है। भगवान शिव का ना आरंभ है और ना ही अंत। शिव पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्माजी और भगवान विष्णु में सबसे श्रेष्ठ कौन है इसे लेकर विवाद हो गया। ब्रह्माजी ने कहा कि उन्होंने संसार की रचना की इसलिए वह सबसे श्रेष्ठ हैं, जबकि भगवान विष्णु ने कहा कि वह संसार के पालनहार हैं इसलिए वे सबसे श्रेष्ठ हैं। विवाद बढ़ने पर ब्रह्मा और विष्णु के बीच भयंकर युद्ध हुआ, तब भगवान शिव ने अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट होकर उसे रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान भगवान शिव ने ब्रह्मा जी और विष्णु भगवान से कहा कि जो शिवलिंग का छोर सबसे पहले ढूंढ लेगा वह सर्वश्रेष्ठ होगा। भगवान विष्णु वाराह अवतार धारण कर धरती और पाताल में जाकर ज्योतिर्लिंग का अंत ढूंढ़ने लगे। ब्रह्माजी हंस बनकर रहस्य जानने आकाश की तरफ बढ़ते गए। दोनों देवताओं ने बहुत कोशिश की, लेकिन ज्योतिर्लिंग का आदि और अंत नहीं मिला। अंत में विष्णु जी ने हार मान ली। उन्होंने शिव जी के सामने स्वीकार किया कि वह ज्योतिर्लिंग का अंत नहीं खोज पाए। जबकि ब्रह्मा जी को जीतने का एक उपाय सूझा और वे अपने साथ केतकी के फूल को साक्षी बनाकर लाए कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग का अंत खोज लिया है। भगवान शिव तो प्रकृति के हर सत्य को जानने वाले हैं, तो भला उनसे ब्रह्मा जी का झूठ कैसे छुप पाता। उन्होंने केतकी के फूल से सत्य कहने को कहा लेकिन केतकी के फूल ने भी झूठ बोल दिया। इस पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर ब्रह्मा जी से कहा-“एक झूठ बोलने वाला देवता सम्मानीय नहीं हो सकता इसलिए आप परमपिता बनकर भी श्रेष्ठ नहीं हैं।” यह कहकर शिव ने ‘भैरव’ नामक अपने एक अवतार को प्रकट किया। भैरव ने शिव की आज्ञा पाकर ब्रह्मा जी का पांचवा सिर काट दिया। शिव ने विष्णु जी को सत्य बोलने के कारण हर यज्ञ, हवन में भगवान सत्यनारायण के रूप में पूजे जाने का वरदान दिया। वहीं, ब्रह्मा जी को किसी भी यज्ञ में न पूजे जाने का शाप दिया। इस शाप के प्रभाव से ही ब्रह्मा जी के केवल एक ही मंदिर पुष्कर में हैं। वहीं, झूठ बोलने के कारण केतकी का फूल भी भगवान शिव की पूजा में नहीं चढ़ाया जाता है



