बिलासपुर । एसआईआर (विशेष गहन पुनरीक्षण) कार्य में भारी अव्यवस्था देखने को मिल रही है। बीएलओ द्वारा जानकारी के अभाव में या लापरवाहीपूर्वक कार्य किए जाने के कारण आम जनता को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बीते कुछ दिनों से एसआईआर फॉर्म जनता से भरवाए जा रहे हैं, जिसमें बीएलओ द्वारा बताए गए निर्देशों के अनुसार सभी आवश्यक दस्तावेज संलग्न कर नियमपूर्वक फॉर्म भरे गए हैं।
इसके बावजूद बीएलओ/निर्वाचन अधिकारी द्वारा आम नागरिकों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। जबकि गलती जनता की नहीं होने के बावजूद उन्हें केंद्रों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इतना ही नहीं, केंद्रों में पदस्थ अधिकारियों द्वारा कई मामलों में लोगों के साथ बदतमीजी किए जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं।
बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम बिरकोना में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां एक व्यक्ति के पूरे परिवार को नोटिस जारी कर दिया गया। संबंधित व्यक्ति के पास परिवहन का साधन नहीं था और वह स्वयं पूरे परिवार का फॉर्म भरने केंद्र पहुंचा था, लेकिन अधिकारियों द्वारा उसे अपमानित किया गया और यह कहा गया कि आप सब का फार्म नहीं भर सकते अपने परिजनों को लेकर आओ, तभी फार्म लेंगें ।
एक अन्य गंभीर समस्या 2003 के एसआईआर सर्वे से जुड़ी है। कई ऐसे मतदाता हैं जो वर्ष 2003 में वर्तमान विधानसभा क्षेत्र में निवास ही नहीं करते थे। या बेलतरा विधानसभा बना ही नहीं था । कोई तखतपुर विधानसभा का था तो कोई मस्तूरी क्षेत्र का था और कोई किसी और क्षेत्र से पर इसके बावजूद केंद्रों पर बैठे अधिकारी उनसे 2003 की एसआईआर सूची में माता-पिता या परिजनों का नाम उसी स्थान का लाना पड़ेगा करके दबाव बना रहे हैं, स्वयं का 2003 में एसआईआर हो चुका है। तो रिश्तेदार का जानकारी मांगना किस लिए। जिससे लोगों को अनावश्यक रूप से परेशान होना पड़ है।
नोटिस वितरण को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कई मामलों में सिर्फ एक दिन पहले नोटिस दिया जा रहा है। जबकि वोटर आईडी में पूरा और सही पता दर्ज होने के बावजूद बीएलओ मतदाताओं के घर नहीं पहुंच रहे हैं। अंतिम दिन जाकर घर खोजने की औपचारिकता निभाई जा रही है। अंतिम दिन फोन पर संपर्क कर कर बार-बार फोन करने का दावा कर रहे है।
स्थिति इतनी खराब है कि आधे से अधिक गांवों में मतदाताओं को नोटिस थमा दिए गए हैं। यह सवाल उठना लाज़मी है कि क्या आधे से ज्यादा गांव की जनता ने एसआईआर फॉर्म में गलती की है, या फिर यह बीएलओ की लापरवाही का परिणाम है। बड़ा क्षेत्र होने से केंद्र में भीड़ के साथ-साथ घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है। जिससे जनता का कहना है कि उन्होंने सही और पूर्ण जानकारी दी है, फिर भी उसकी सजा उन्हें भुगतनी पड़ रही है।
जब इस विषय में अधिकारियों से सवाल किया जाता है तो उनका जवाब और भी चौंकाने वाला है। अधिकारी कहते हैं कि वे शिक्षक हैं, पीडब्ल्यूडी या अन्य विभागों से हैं और यह उनका मूल कार्य नहीं है, उन्हें जबरन इस काम में लगाया गया है।
अब आम जनता यह सवाल कर रही है कि अगर अधिकारी और कर्मचारी स्वयं इस कार्य को अपना नहीं मानते, तो फिर जनता को क्यों परेशान किया जा रहा है? एसआईआर जैसे महत्वपूर्ण कार्य में इस तरह की अव्यवस्था लोकतंत्र की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करती है।



