बिलासपुर । विगत दिनों आभासी पटल स्ट्रीम यार्ड एवं फेसबुक के माध्यम से राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर इकाई द्वारा एक राष्ट्रीय स्तर का पर्यावरण विषयक विमर्श सह नव वर्ष काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रुप में राष्ट्रीय कवि संगम मंच के राष्ट्रीय महामंत्री महेश शर्मा ने राष्ट्रीय कवि संगम मंच की स्थापना का उद्देश्य मंचीय काव्य को संस्कारित करना व राष्ट्र नव निर्माण व जन जागरण की दिशा में युवा पीढ़ी को प्रोत्साहित करना बताया।आपने जीवन कला पर अपनी सुंदर कविता भी प्रस्तुत किया। विशिष्ट अतिथि डाॅ राघवेन्द्र दुबे राष्ट्रीय कवि संगम इकाई बिलासपुर की साहित्यिक व जन जागरण गतिविधियों पर प्रकाश डालते हुए प्रसन्नता व्यक्त किए।इस अवसर पर अध्यक्षी संबोधन में इकाई के संरक्षक डाॅ विनय कुमार पाठक, कुलपति-थावे विद्या पीठ व पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग ने पर्यावरण को जीवन शब्द पर आधारित बताया कि जी एवं वन एक दुसरे के अन्योनाश्रित हैं अर्थात प्राणियों के लिए वन नितांत आवश्यक है तथा वन की पहचान जैव विविधता से होती है जो पर्यावरण व पारिस्थितिकी तंत्र के महत्वपूर्ण घटक हैं। वैश्विक तापायन,ध्रुवीय बर्फ का पिघलना व ओजोन परत का विघटन का कारण वनों की अंधाधुंध कटाई व कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन है। उन्होंने साहित्य में पर्यावरण विमर्श की आवश्यकता पर बल देते हुए साहित्य के माध्यम से जन जागरण अभियान की आवश्यकता बताई।
कार्यक्रम का आरंभ राष्ट्रीय कवि संगम मंच बिलासपुर इकाई के अध्यक्ष अंजनी कुमार तिवारी ‘सुधाकर’ के सरस्वती वंदना व स्वागत संबोधन से हुआ तथा समापन इकाई की उपाध्यक्षा पूर्णिमा तिवारी के आभार प्रदर्शन से हुआ। कार्यक्रम का सफल संचालन राष्ट्रीय कवि संगम कर्नाटक इकाई-, बेंगलुरु के वरिष्ठ साहित्यकार कुंवर प्रबल प्रताप सिंह’प्रबल’ द्वारा किया गया।
इस अवसर पर आंग्ल नव वर्ष के उपलक्ष्य में सरस काव्य पाठ हुआ जिसमें भाग लेने वाले कवि/कवियत्री थे: डा राघवेन्द्र दुबे, बालमुकुंद श्रीवास,दीपक दुबे ‘सागर,’ राजेश कुमार सोनार, अनामिका शर्मा ‘शशि’, डा अशोक आकाश, मनीषा भट्ट,ओम प्रकाश भट्ट,जलेश्वरी वस्त्रकार- जयरामनगर,भूपेन्द्र श्रीवास्तव, वी. के. पंकज -सरकंडा,हेमन्त गौर बिलासपुर,संगीता तिवारी ,
बिलासपुर,निवेदिता वर्मा ‘मेघा’ भाटापारा, रामरतन श्रीवास,कुंवर प्रबल प्रताप सिंह राणा’प्रबल’, अंजनीकुमार तिवारी’सुधाकर’, पूर्णिमा तिवारी। कार्यक्रम का श्रवण आनन्द फेस बुक के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी संख्या में जुड़े साहित्य व पर्यावरण प्रेमियों ने उठाया।



