दगौरी के दुर्गा मंदिर मंच में हिन्दू सम्मेलन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ

बिलासपुर । दगौरी मंडल के मंडल केन्द्र दगौरी के दुर्गा मंदिर मंच में हिन्दू सम्मेलन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। दगौरी मंडल के अंतर्गत सभी 10 गांवों से नागरिक बन्धु,माताओं, बहनों की गरिमामय उपस्थिति रही। पारंपरिक सुआ नृत्य, देश रंगीला- रंगीला देश भक्ति पूर्ण नृत्य ,और भजन से सभी आनन्दित हो गए। इस पावन अवसर पर सभी 10 गांवों के मुखिया, एवम 12 समाज के प्रमुखों का समिति के सदस्यों ने तिलक लगाकर ,केशरिया गमछा एवम श्रीफल भेंटकर स्वागत किया। कार्यक्रम में मातृशक्ति के प्रतिनिधि के रूप में रानी चक्रवर्ती बहन जी जनपद सदस्य ने सम्मेलन को सम्बोधित किया  ।

अपने अध्यक्षीय आशीर्वचन रुद्र शिवमंदिर तालागांव के प्रमुख पुजारी ने सनातन धर्म ,संस्कृति एवम परम्परा को जीवन मे उतारने का आग्रह किया। मुख्य वक्ता के रूप में बिलासपुर नगर के माननीय नगर संघ चालक प्रदीप शर्मा  ने हिन्दू सम्मेलन के उद्देश्य, एवम जीवन मे पंचपरिवर्तन को स्वयं ग्राह्य करना और फिर समाज से अपने व्यवहार में लाने के लिए प्रेरित करना,जिससे समाज मे समरसता,कुटुंब में एकता,पर्यावरण के प्रति सजगता, स्वभाषा,भूषा, भजन,भोजन,भवन और भ्रमन,जैसे विषयों पर स्व का भाव और नागरिक कर्तब्य के प्रति सचेत रहने की जैसे भाव का निर्माण करना जिससे समाज मजबूत होकर राष्ट्र निर्माण में सहभागी हो । अंत मे भारत माता की आरती में सभी उपस्थित जनमानस सहभागी हुए ।कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन संयोजक घनश्याम कौशिक जी ने किया, सभी को भोग प्रसाद वितरण(खिचड़ी) वितरण कर कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से प्रदीप शर्मा ,गिरी महाराज,घनश्याम कौशिक, बिलासपुर विभाग व्यवस्था प्रमुख आरएसएस दिलीप शर्मा ,राजकुमार साहू,नरेंद्र सन्नाट, शेखर कौशिक,अमित कौशिक, देवेंद्र कौशिक ,मथुरा भारद्वाज सरपंच,रानी चक्रवर्ती,भीमा साहू ,धु्रव संन्नाट, सहित बड़ी संख्या में माताए, बहिन, नागरिक गण उपस्थित रहे।

शिव महापुराण कथा में दो मौलिक ब्रह्मांडीय शक्तियों शिव और सती के शाश्वत मिलन का प्रतीक

बिलासपुर । रमन दुबे शिव महापुराण में देवी सती और प्रभु शिव की कथा दो मौलिक ब्रह्मांडीय शक्तियों शिव और शक्ति के शाश्वत मिलन का प्रतीक है। सती वियोग में शिवजी ने ऐसा तांडव मचाया कि सृष्टि खतरे में पड़ गई थी, तब श्रीहरि ने अपनी चतुराई से विनाश को रोका था।
पत्रकार कॉलोनी में राजेश पांडेय के निवास पर आयोजित शिव महापुराण कथा के पांचवें दिन कथावाचिका ईश्वरी देवी ने माता सती प्रसंग पर प्रवचन कहते हुए उक्त बातें कहीं। उन्होंने बताया कि यह प्रसंग शिव-पार्वती विवाह और शक्तिपीठों की स्थापना के पीछे की महत्वपूर्ण घटना है।
प्रजापति दक्ष ने एक महान यज्ञ का आयोजन किया, लेकिन शिव और सती को निमंत्रण नहीं दिया। सती बिना बुलाए यज्ञ में पहुंची और दक्ष द्वारा शिव का अपमान सहन न कर सकीं, जिसके कारण उन्होंने यज्ञ की अग्नि में देह त्याग दिया। इससे दुखी और क्रोधित भगवान शिव ने प्रलयकारी तांडव नृत्य किया और सती के शरीर को कंधे पर उठाकर पूरे ब्रह्मांड में घूमते रहे। भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के टुकड़े किए, जो पृथ्वी पर विभिन्न स्थानों पर गिरे और शक्तिपीठों की स्थापना हुई। यह प्रसंग भक्ति, त्याग और बलिदान का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि कैसे देवी सती ने अपने पति के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा और प्रेम के कारण अपना जीवन त्याग दिया। यह प्रसंग शक्तिपीठों की स्थापना के पीछे की कहानी भी बताता है, जो आज भी भक्तों के लिए महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं।
शिव तांडव व मयूर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति
शिव महापुराण कथा के सोमवार को भगवान शिव के शक्तिशाली नृत्य शिव तांडव की सुंदर प्रस्तुतियां हुईं, जिससे दर्शक बहुत भावुक और आनंदित हो गए। शिव के रौद्र और आनंद रूप का सुंदर चित्रण से श्रद्धालु गण मंत्रमुग्ध हो गये।
वहीं वृंदावन से आये कलाकार दंपति विनय भारद्वाज और राधा भारद्वाज ने मोर बन कृष्ण संग राधा की मयूर नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति ने दर्शकों को भाव विभोर कर दिया।
बिल्हा के पूर्व विधायक सियाराम कौशिक पहुंचे शिव महापुराण कथा का श्रवण करने बिल्हा के पूर्व विधायक सियाराम कौशिक पहुंचे और व्यास पीठ पर विराजमान ईश्वरी देवी से आशीर्वाद लिया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि शिव की दिव्य कथाएँ जीवन में धर्म, सत्य और सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती हैं। शिव महापुराण कथा जो श्रोता पुरे मन से श्रवण करते हैं उन्हें परमात्मा के साथ आत्मा के जुडऩे का आभास भी होता है। भोलेनाथ से सभी क्षेत्रवासियों के सुख, शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की मंगलकामना करता हूँ।

शिवजी से झूठ बोलने की सजा भुगत रहे हैं ब्रह्माजी : कथावाचिका ईश्वरी

बिलासपुर। रमन दुबे । ब्रह्माजी को झूठ बोलने का दिया गया शाप इतना भयानक था कि उसका प्रभाव कलियुग में भी दिखाई देता है। क्रोधित शिव के काल भैरव अवतार ने ब्रम्हा के पांचवें सिर को धड़ से अलग कर दिया। वहीं झूठ का साथ देने के कारण श्रापित केतकी पुष्प को भगवान शिव पर नहीं चढ़ाते हैं।
पत्रकार कॉलोनी में चल रहे के दूसरे दिन कथावाचिका ईश्वरी देवी ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को सांसरिक मोह माया से ऊपर है। भगवान शिव का ना आरंभ है और ना ही अंत। शिव पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्माजी और भगवान विष्णु में सबसे श्रेष्ठ कौन है इसे लेकर विवाद हो गया। ब्रह्माजी ने कहा कि उन्होंने संसार की रचना की इसलिए वह सबसे श्रेष्ठ हैं, जबकि भगवान विष्णु ने कहा कि वह संसार के पालनहार हैं इसलिए वे सबसे श्रेष्ठ हैं। विवाद बढ़ने पर ब्रह्मा और विष्णु के बीच भयंकर युद्ध हुआ, तब भगवान शिव ने अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट होकर उसे रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान भगवान शिव ने ब्रह्मा जी और विष्णु भगवान से कहा कि जो शिवलिंग का छोर सबसे पहले ढूंढ लेगा वह सर्वश्रेष्ठ होगा। भगवान विष्णु वाराह अवतार धारण कर धरती और पाताल में जाकर ज्योतिर्लिंग का अंत ढूंढ़ने लगे। ब्रह्माजी हंस बनकर रहस्य जानने आकाश की तरफ बढ़ते गए। दोनों देवताओं ने बहुत कोशिश की, लेकिन ज्योतिर्लिंग का आदि और अंत नहीं मिला। अंत में विष्णु जी ने हार मान ली। उन्होंने शिव जी के सामने स्वीकार किया कि वह ज्योतिर्लिंग का अंत नहीं खोज पाए। जबकि ब्रह्मा जी को जीतने का एक उपाय सूझा और वे अपने साथ केतकी के फूल को साक्षी बनाकर लाए कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग का अंत खोज लिया है। भगवान शिव तो प्रकृति के हर सत्य को जानने वाले हैं, तो भला उनसे ब्रह्मा जी का झूठ कैसे छुप पाता। उन्होंने केतकी के फूल से सत्य कहने को कहा लेकिन केतकी के फूल ने भी झूठ बोल दिया। इस पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर ब्रह्मा जी से कहा-“एक झूठ बोलने वाला देवता सम्मानीय नहीं हो सकता इसलिए आप परमपिता बनकर भी श्रेष्ठ नहीं हैं।” यह कहकर शिव ने ‘भैरव’ नामक अपने एक अवतार को प्रकट किया। भैरव ने शिव की आज्ञा पाकर ब्रह्मा जी का पांचवा सिर काट दिया। शिव ने विष्णु जी को सत्य बोलने के कारण हर यज्ञ, हवन में भगवान सत्यनारायण के रूप में पूजे जाने का वरदान दिया। वहीं, ब्रह्मा जी को किसी भी यज्ञ में न पूजे जाने का शाप दिया। इस शाप के प्रभाव से ही ब्रह्मा जी के केवल एक ही मंदिर पुष्कर में हैं। वहीं, झूठ बोलने के कारण केतकी का फूल भी भगवान शिव की पूजा में नहीं चढ़ाया जाता है

जीवंत झांकी के साथ निकली भव्य कलश यात्रा, पत्रकार कॉलोनी में शिव महापुराण का शुभारंभ

बिलासपुर। रमन दुबे। नव वर्ष के पहले दिन से पत्रकार कॉलोनी में आयोजित होने जा रहे शिव महापुराण कथा का शुभारंभ भव्य कलश के साथ हुई। शोभा व कलश यात्रा शिव पार्वती की मनमोहक जीवंत झांकी, जयकारों और बाजे गाजे के साथ निकली। रथ पर विराजमान भगवान भोलेनाथ व माता पार्वती की झांकी आकर्षण का केंद्र बनी रही। शोभा यात्रा में रथ पर कथावाचिका ईश्वरी देवी भी सवार थी। कलश यात्रा आयोजन स्थल से विधिवत निकालकर जरहाभाठा, सिंधी कॉलोनी, कारगिल चौक, कस्तूरबा नगर के प्रमुख मार्गों से होकर पुनः पत्रकार कॉलोनी पहुंचकर संपन्न हुई। रास्ते भर श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर कलश यात्रा का स्वागत किया। आयोजक श्री राजेश पांडेय ने बताया कि शिव महापुराण 1 जनवरी से प्रारंभ होकर 9 जनवरी को पूर्णाहुति के साथ संपन्न होगी। कथा में प्रतिदिन भक्तों के लिए आध्यात्मिक प्रवचन एवं भजन संध्या का आयोजन रहेगा। शोभायात्रा में पत्रकार कॉलोनी के अध्यक्ष श्री रामाधार देवांगन, विजय मोहन शर्मा, अशोक तिवारी, रमन दुबे, बृजेश शर्मा, प्रफुल्ल मिश्रा, गिरीश तिवारी, रोहित मिश्रा, आशीष पाल, संजय शर्मा, संजू निर्मलकर, विक्कू पांडेय , राहुल पांडेय, अनुराग पांडेय, अनूप सिंह ठाकुर, करुणा पांडेय, बसंती शर्मा, प्राची शर्मा, अनिता दुबे, प्रेमलता यादव, प्रमिला ठाकुर, श्वेता शर्मा, अंजू सिंह ठाकुर, पूजा कडो, आस्था पांडेय, प्रिया अग्रवाल, नागेश्वरी पांडेय, तरूणा यादव, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।

1111 भक्तों के सामूहिक ध्यान संग राणी सती दादी का अविस्मरणीय महामंगल सम्पन्न

बिलासपुर । रितेश शर्मा । सौर मंडल के चक्र से 21 जून को सबसे बड़ा दिन व 21 दिसम्बर को रात सबसे बड़ी होती है। विश्व ध्यान दिवस की तिथि 5127/10/01/01/01 भी अंकीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। कलयुग के 5127 वे वर्ष के दशवें माह पौष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा रविवार के पावन अवसर पर 1111 दिव्य चेतन आत्माओं ने एक साथ एकाग्रचित होकर शाम ठीक 18.01 बजे साक्षात दुर्गा अवतार श्री राणी सती दादी का ध्यान कर वैश्विक शांति व बिलासपुर की खुशहाली की कामना की। ग्यारह एक के दुर्लभ संयोग से किया गया ध्यान निश्चित ही लाभकारी होगा। भव्य महामंगल पाठ में सूरत निवासी सुरभि बिजुरका की सुमधुर वाणी में आज दोपहर 3.30 बजे से रात 8 बजे तक गोविंदम पैलेस में दादी भक्त झूमते नजर आए। बीच मे श्री दादी  की हल्दी, मेंहदी व चुनरी संस्कार के साथ उनकी जीवनी जीवंत झांकी द्वारा प्रस्तुत की गई। मृदंग और ढोल नगाड़ों के बीच प्रगट हुई श्री दादी  की  श्री गंगा आरती* बनारस के पांडित्य जनों द्वारा हजारों भक्तों की उपस्थिति में की गई । पाठ की समाप्ति पश्चात लगभग तीन हजार भक्तों ने छप्पन भोग एवं दादी जी की रसोई से स्वादिष्ट *भोजन प्रसाद* का आनंद उठाया। आज के आयोजन को सफल बनाने में सर्वश्री नवलकिशोर तुलस्यान, सी ए आनंद कुमार अग्रवाल, एडवोकेट प्रवीण तुलस्यान, अजय अग्रवाल, आशीष सिंह, ललित अग्रवाल, आयुष अग्रवाल, पवन अग्रवाल, श्रीकांत केडिया, पुरुषोंत्तम अग्रवाल, ऋषि अग्रवाल, वेंकट अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, शारदा अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, मीतू अग्रवाल, स्मिता अग्रवाल, शिवानी अग्रवाल, उषा अग्रवाल, पूर्व विधायक रश्मि सिंह सहित हजारों की सँख्या में दादी भक्त शामिल हुए।

कोलकाता के कलाकारों की नृत्य नाटिका से दादी का सचित्र प्रदर्शन व बनारस के पंडितों की गंगा आरती की तर्ज में दादीजी की भव्य आरती ने आयोजन में चार चांद लगा दिया। सीए आनंद अग्रवाल एवं सुनीता अग्रवाल ने समस्त आगंतुक कलाकार, अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यकर्ताओं, रिश्तेदारों, जनसामान्य का आभार व्यक्त किया। अतः में हजारों भक्तों ने दादीजी की रसोई से भोजन प्रसाद ग्रहण किया। श्री राणी सती दादीजी के तनधन जी सहित ज्योति विलीन होने का झांकी रूप पहली बार होने से बिल्हा, कोटा, कोरबा, तखतपुर, अकलतरा, नैला, भाटापारा सहित दूर दूर से आये लोगो ने सांस रोक कर संपूर्ण मंगलपाठ का दर्शन व श्रवण किया। इस भक्तिमय आयोजन बिलासपुर की पावन धरा धन्य हुई। ज्ञात हो कि पांडवों की पुत्रवधू, अभिमन्यु की पत्नी व महाराज परीक्षित की माताजी उत्तरा ही कलयुग में नारायणी बनकर तनधनदास जी के धोखे से हत्या कर दिए जाने पर समस्त विधर्मियों का नाश कर झुंझुनू में ज्योति में विलीन हो गई थी।

लाइट वेट टेनिस बॉल की भारत देश की सबसे बड़ी टूर्नामेंट विनीत कप होगी 11 लाख रुपए इनामी,स्वर्गीय ऊषा देवी भंडारी की स्मृति में आयोजित होगा टूर्नामेंट

बिलासपुर। रमन दुबे । शहर की बहुप्रतीक्षित स्व.उषा देवी भंडारी जी की स्मृति में करवाए जाने वाले विनीत कप का आयोजन का आगाज 28 दिसंबर से होगा। इस आयोजन का इंतजार बिलासपुर के अलावा प्रदेश भर के क्रिकेट प्रेमियों को रहता है। भव्य आतिशबाजी और भव्य व्यवस्थाओं के साथ आईपीएल की तर्ज पर होने वाला यह आयोजन लाईट वेट बॉल में मध्य भारत की सबसे बड़ी क्रिकेट प्रतियोगिता थीं। जो इस वर्ष 11 लाख रुपए की इनामी राशि के साथ लाइट वेट बॉल में देश की सबसे बड़ी क्रिकेट प्रतियोगिता बन गई है। यह आयोजन 28 दिसंबर से शुरू होकर 11 जनवरी तक चलेगा। 11 जनवरी को फाइनल मैच खेला जाएगा।

प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अलग अलग राज्यों से टीमें भाग लेने आती है। इसके अलावा दुबई और ओमान जैसे देशों की इंटरनेशनल टीमें भी इस आयोजन में खेल चुकी हैं। विनीत कप आयोजन समिति के प्रमुख ईशान भंडारी निक्कू ने प्रेस वार्ता करते हुए आयोजन के संबंध में बताया कि अपनी स्वर्गीय माता उषा देवी भंडारी जी की स्मृति में मेरे द्वारा यह आयोजन करवाया जाता है। इससे पूर्व मेरे द्वारा अपनी माता जी की स्मृति में कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन करवाया जा चुका है। विनीत कप क्रिकेट मैच के आयोजन का यह शानदार 13 वां वर्ष हैं। इस बार इसमें 11 लाख 11 हजार 111 रुपए और चमचमाती ट्राफी पहला इनाम रखा गया है। जबकि मैन ऑफ द सीरीज में बुलेट रखा गया है। ईशान भंडारी ने बताया कि हमारे आयोजन की प्राथमिकता निष्पक्ष खेल है। जिसके लिए लाइव प्रसारण और थर्ड अंपायर की भी व्यवस्था रखी जाती है। महाराष्ट्र की टीम tenniscricket.in के द्वारा अपने वैनिटी वेन के साथ उपस्थित रहकर लाइव प्रसारण किया जाएगा। आयोजन में दर्शकों के मनोरंजन और खिलाड़ियों तथा अतिथियों के स्वागत के लिए भव्य आतिशबाजी की व्यवस्था प्रतिवर्ष की तरह होगी। खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन तथा दर्शकों के मनोरंजन हेतु आईपीएल की तर्ज पर चियर लीडर्स की व्यवस्था रहेगी। ईशान भंडारी ने बताया कि देशभर से कुल 32 टीमों को टूर्नामेंट में प्रवेश दिया जाएगा। एंट्री फीस जिसके लिए 40 हजार रूपये रखी गई है। कुल 31 मैच आयोजन के दौरान होंगे, प्रत्येक मैच में मैन ऑफ द मैच भी दिया जाएगा। दस ओवरों का लीग मैच होगा जबकि सेमीफाइनल 12 और फाइनल 14 ओवरों का होगा। आयोजन के दौरान आयोजन समिति द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों और पत्रकारों के लिए सद्भावना मैच कभी आयोजन किया जाएगा। जबकि दूसरा इनाम चार लाख चवालीस हजार चार सौ चवालीस रुपए रहेगा।

आयोजन समिति के प्रमुख ईशान भंडारी ने बताया कि हमारे आयोजन के लिए ही क्षेत्रीय विधायक सुशांत शुक्ला की मांग पर डिप्टी सीएम और वर्तमान खेल मंत्री अरुण साव जी ने इस मैदान में फ्लड लाइट की घोषणा की थी। उनकी घोषणा अमल में लाते हुए यहां फ्लड लाइट लग चुका है,जिसका लाभ हमें इस वर्ष के मैच में मिलेगा। बाहर से आने वाली टीमों की रुकने और अन्य व्यवस्थाएं समिति द्वारा की जाती है। प्रत्येक मैच में मैन ऑफ द मैच का इनाम सहित बेस्ट बॉलर,बेस्ट बैट्समैन,बेस्ट फील्डर जैसे अलग अलग इनाम रखे गए हैं। ईशान भंडारी ने बताया कि इस आयोजन को करवाने की जितनी खुशी हमें मिलती है उतना ही इंतजार शहर वासियों एवं खिलाड़ियों को इस प्रतियोगिता का रहता है। इस आयोजन का एकमात्र उद्देश्य है कि अधिक से अधिक खेल प्रतिभाएं इस आयोजन के माध्यम से सामने आए और साथ ही हमारे बिलासपुर और छत्तीसगढ़ का नाम पूरे देश में गूंजे।

कलेक्टर ने दीपका विस्तार परियोजना अंतर्गत अर्जित भूमि में खरीदी बिक्री व नामांतरण पर रोक लगाने के दिए निर्देश

हरदीबाजार, सरइसिंगार, रेंकी, कटकीडबरी व नवापारा में भूमि खरीदी, बिक्री, रजिस्ट्री, नामांतरण पर लगा रोक

कोरबा ।  कलेक्टर अजीत वसंत ने दीपका विस्तार परियोजना अंतर्गत कोयला धारक क्षेत्र के तहत स्वीकृत 40 मिलियन टन कोयला उत्पादन हेतु ग्राम हरदीबाजार (भाग), सरइसिंगार (भाग), रेंकी (भाग), कटकीडबरी (भाग), एवं नवापारा (भाग) का कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन एवं विकास) अधिनियम 1957 के तहत उक्त ग्रामों की भूमियों का खरीदी बिकी, रजिस्ट्री, नामांतरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए है।
जारी निर्देशानुसार एसईसीएल दीपका क्षेत्र द्वारा दीपका विस्तार परियोजना अंतर्गत कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन एवं विकास) अधिनियम 1957 के तहत स्वीकृत 40 मिलियन टन कोयला उत्पादन हेतु ग्राम हरदीबाजार (भाग), सरइसिंगार (भाग), रेंकी (भाग), कटकीडबरी (भाग), एवं नवापारा (भाग) की कुल भूमि रकबा 607.118 हेक्टेयर का अर्जन हेतु धारा सेक्शन 9 ( प ), एस.ओ.क्र. 5445 (अ) का प्रकाशन 26 नवम्बर 2025 को किया जा चुका है।  कलेक्टर ने इस सम्बंध में छत्तसीगढ़ शासन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से प्राप्त निर्देश के तहत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कटघोरा एवं पाली, जिला पंजीयक कोरबा, तहसीलदार दीपका व हरदीबाजार को वर्णित ग्रामों की अर्जित भूमियों का खरीदी/बिक्री, रजिस्ट्री, नामांतरण पर रोक लगाने हेतु निर्देशित किया है। साथ ही की गई कार्यवाही के सम्बंध में जानकारी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने निर्देश दिए है।

मुख्यमंत्री से मजदूर संघ की सौजन्य मुलाकात

कर्मचारियों की समस्याओं के शीघ्र समाधान और स्थायीकरण की मांग रखी

भिलाई । रमन दुबे  । प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिल कर भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध विभिन्न संगठन के पदाधिकारियों ने श्रमिक एवं कर्मचारियों की समस्यायों से उन्हें अवगत कराया और शीघ्र निराकरण किये जाने हेतु समुचित निर्देश देने का अनुरोध किया है।
दुर्ग जिला भारतीय मजदूर संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष रवि चौधरी तथा स्वायत्तशासी कर्मचारी महासंघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष शरद दुबे के नेतृत्व में निर्माणी संघ के महामंत्री देवेंद्र चन्द्राकार, वरिष्ठ नागरिक मंच के नलनीश मिश्रा प्रदेश उपाध्यक्ष रामवृक्ष यादव,भिलाई निगम कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष शशिभूषण मोहंती, ने प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से उनके रायपुर निवास कार्यालय में सौजन्य भेंट कर मां के नाम एक पेड़ मिशन को आगे बढ़ाते दुर्ग के ग्रामीण क्षेत्र में वृहद स्तर पर वृक्षारोपण किये जाने हेतु समय प्रदान करने पत्र सौंपा।
स्वायत्तशासी के पदाधिकारियों ने प्रदेश के नगरीय निकाय में व्याप्त अधिकारी कर्मचारियों के समस्यायों से मुख्यमंत्री को अवगत कराते हुए मांग पत्र सौंपा कि वर्तमान सेट अप में संशोधन कर कर्मचारी के पदोन्नति किया जावे,घोषणा पत्र के अनुसार शेष बचे दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को नियमित किया जावे, चुंगी क्षतिपूर्ति की राशि में मध्यप्रदेश के तर्ज़ पर 105 रूपया प्रति व्यक्ति के मान से लागू किया जावे, केंद्र सरकार द्वारा घोषित महंगाई भत्ता शीध्र लागू करने, दैनिक वेतनभोगी की सेवाकाल को पेंशन में गणना किये जाने, पुराना पेंशन लागू करने, निकायों द्वारा भविष्य निधि की राशि जमा करने तथा नगर पालिका एवं नगर पंचायतो में समय पर वेतन भुगतान की मांग रखे।
प्रतिनिधि मंडल में अमर यादव,होमलाल साहू, रामेश्वर,चुरामन साहू आदि शामिल रहे हैं।

टेबल टेनिस स्टेट रैंकिंग: बिलासपुर के शिवाय मेघानी बने अंडर-11 उपविजेता

कोंडागाँव में आयोजित 2025 द्वितीय छत्तीसगढ़ स्टेट रैंकिंग टेबल टेनिस प्रतियोगिता के अंडर-11 वर्ग में बिलासपुर के मास्टर शिवाय मेघानी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए उपविजेता का खिताब अपने नाम किया। कोच के. वेंकट प्रसाद और  के. साई प्रशांत के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे शिवाय ने फाइनल तक पहुँचकर दमदार खेल का प्रदर्शन किया। माता-पिता डॉ. राकेश मेघानी और डॉ. प्रियांका मेघानी के सहयोग से मिली इस उपलब्धि ने परिवार सहित खेल जगत को गौरवान्वित किया है।

समाजवाद, अहिंसा और लोककल्याण के अग्रदूत श्री श्री 1008 श्री अग्रसेन जी महाराज की 5149वीं जयंती पर विशेष

विगत कई दशकों से बिलासपुर, बिल्हा, कोटा, अकलतरा जैसे छत्तीसगढ़ के सभी छोटे बड़े कस्बों में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को श्री श्री 1008 श्री अग्रसेनजी महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई जाती हैं। इस वर्ष 31 अगस्त 2025 को जिलाधीश श्री संजय अग्रवाल ने बिलासपुर शहर में वृक्षारोपण एवं जल संचयन कार्यक्रम से श्री अग्रसेन जयंती समारोह का श्रीगणेश किया। रक्तदान, गौ माता सेवा, खेलकूद प्रतियोगिता जैसे पचासों कार्यक्रमो के उपरांत 22 सितंबर 2025 को समाजवाद, अहिंसा और लोककल्याण के अग्रदूत श्री श्री 1008 श्री अग्रसेन जी महाराज की 5149वीं जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी। श्री अग्रसेन जी महाराज की जीवनी पर प्रकाश डालते हुए ललित अग्रवाल ने बताया कि भारत भूमि में समय समय अनेकों महापुरुष अवतरित हुए है। महाराज अग्रसेन भारतीय सभ्यता के उन चिरस्थायी आदर्शों में से एक हैं, जिन्होंने समाज में समानता, अहिंसा और समुचित वितरण की भावना को जन्म दिया। युगाब्द से 22 वर्ष पूर्व ( ईसापूर्व 3124 ) द्वापर युग के अंतिम चरण में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा को प्रतापनगर में सूर्यवंशी भगवान श्रीराम के बेटे कुश की 34वीं पीढ़ी के वंशज क्षत्रिय राजा वल्लभसेन व माता भगवतीदेवी के घर अग्रसेनजी का जन्म हुआ था। 15 वर्ष की आयु में अपने पिता राजा वल्लभसेन के साथ पांडवों की तरफ से कौरवों से महाभारत का युद्ध करते समय 10वे दिन भीष्म पितामह के बाणों से राजा वल्लभसेन को वीरगति मिलने से अग्रसेनजी प्रतापनगर के महाराज बनाये गये थे. नागकुमारी माधवी से विवाह कर उन्होंने द्वापर युग में 7 वर्षों तक प्रतापनगर में राज किया. द्वापर से कलयुग के परिवर्तन पर जब भगवान श्री कृष्ण ने अपना शरीर त्याग किया था, तब 22 वर्षीय महाराज श्री अग्रसेन ने वर्तमान हरियाणा के अग्रोहा में सरस्वती नदी के तट पर नए राज्य की स्थापना कर 101 वर्षों तक राज करने के उपरांत कुलदेवी महालक्ष्मी से परामर्श करके अपने ज्येष्ठ पुत्र विभु को शासन सौंपकर तपस्या करने चले गए और वानप्रस्थ आश्रम में तपस्या के दौरान भौतिक शरीर का परित्याग किया. उन्हें व्यापार, कृषि और समानता पर आधारित व्यवस्था लागू करने हेतु याद किया जाता है. एकबार अकाल पड़ने पर वे वेश बदल कर राज्य भ्रमण के दौरान चार सदस्यों के परिवार में गये. जो भोजन करने ही वाले थे कि अतिथि को देखकर चारो ने अपनी अपनी थाली से एक अंश निकाल कर अतिथि को परोसा. इसी से प्रेरणा लेकर महाराज अग्रसेन ने ‘एक ईंट और एक रुपया’ की नीति से समाज में नवआगंतुकों को आत्मनिर्भर बनाकर सामूहिक सहयोग और सामाजिक सुरक्षा की मिसाल पेश की। उस समय समाज जाति व अस्पृश्यता विहीन था तथा एक कुल से दुसरे कुल में स्वयंवर द्वारा योग्य वर का चयन कर विवाह सम्पन्न होते थे. क्षत्रिय होते हुए भी उन्होंने यज्ञों में पशु बलि का विरोध करते हुए अहिंसा का मार्ग चुना और राज्य की समृद्धि के लिए हिंसा- रहित अग्रवंश ( वैश्य वर्ग ) खड़ा किया। महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य को 18 जनपदों (गणराज्य/राज्यांश) में विभाजित किया था और प्रत्येक गणराज्य के प्रशासनिक प्रमुख को उन्होंने अपने पुत्रवत माना था. महाराजा अग्रसेन ने अपने राज्य में लोकतांत्रिक प्रणाली की नींव भी रखी थी, जहाँ प्रत्येक जनपद से एक-एक प्रतिनिधि लेकर प्रशासन का संचालन होता था. प्रत्येक जनपद के अपने अपने गुरु थे जो ऋषि थे, वही आगे चल कर अग्रकुल कहलाए और उनके गोत्र उनके ऋषियों से ही बने.

गणराज्य प्रमुख गोत्र नाम महर्षि जी का नाम

1.विभु – गर्ग गोत्र – महर्षि गर्गाचार्य
2.भीमदेव – गोयल गोत्र – महर्षि गोभिल
3.शिवजी – गोयन गोत्र – महर्षि गौतम
4.सिद्धदेव – बंसल गोत्र – महर्षि वत्स
5.बासुदेव – कंसल गोत्र – महर्षि कौशिक
6.बालकृष्ण – सिंघल गोत्र – महर्षि शांडिल्य
7.धर्मंनाम – मंगल गोत्र – महर्षि मंडव्य
8.अर्जुन – जिंदल गोत्र – महर्षि जैमिन
9.रणकृत – तुंगल गोत्र – महर्षि तांड्य
10.गुप्तनाम – ऐरन गोत्र – महर्षि और्व
11.पुष्पदेव – धारण गोत्र – महर्षि धौम्य
12.माधोसेन – मधुकुल गोत्र – महर्षि मुदगल
13.केशवदेव – बिंदल गोत्र – महर्षि वशिष्ठ
14.भुजमान – मित्तल गोत्र – महर्षि मैत्रेय
15.कंवलदेव – कुच्छल गोत्र – महर्षि कश्यप
16.गुणराज – नांगल गोत्र – महर्षि नगेन्द्र
17.वासगी – भंदल गोत्र – महर्षि भारद्वाज
18.शिवजीभान – तायल गोत्र – महर्षि तैलंग

उक्त 18 गोत्र मूल ऋषियों के नामों पर आधारित हैं, जो अग्रवाल समाज की पहचान हैं. विचारणीय प्रश्न यह भी है कि यदि महाराजा श्री अग्रसेन जी के 18 पुत्र थे. तब तो सभी अग्रवाल आपस में पितृकुल से जुड़े भाई बहन हो जायेंगे तो अग्रवाल आपस में विवाह सम्बंध कैसे कर सकते है. संभव है कि हम सब महाराजा श्री अग्रसेन जी के आदर्शो पर चलने वाले भिन्न भिन्न जनसमूह से हो. लोकतांत्रिक शासन, न्यायप्रिय नीति, आर्थिक समानता और शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाएँ हर नागरिक के लिए सुलभ कराने वाले अग्रसेनजी ने अपने समय में प्रजाहित को सर्वोपरि स्थान दिया। महाराज अग्रसेन के नेतृत्व में अग्रोहा राज्य व्यापार, सामाजिक समन्वय, धर्म, न्याय और समृद्धि का केंद्र बन गया था। महाराज अग्रसेन के नाम से देशभर में अस्पताल, विद्यालय, सामुदायिक भवन, धर्मशालाएँ संचालित हैं, जो उनके लोकहितकारी दृष्टिकोण का जीवंत उदाहरण हैं।
उनकी 5100 वीं जयंती के पावन अवसर पर 1976 में भारत सरकार द्वारा, 2016 में मालदीव द्वारा तथा 2017 में भारतीय डाक विभाग द्वारा अग्रसेन की बावली पर एक स्मारक डाक टिकिट जारी किये गये है. छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्य-सरकारों द्वारा उनके आदर्शो को स्वीकार कर उनके नाम पर प्रतिवर्ष रु. दो लाख से अधिक नगद पुरस्कार प्रदान किये जा रहे है. महाराज अग्रसेन न सिर्फ एक कालजयी शासक थे, बल्कि समता, उदारता व अहिंसा के ऐसे अनुकरणीय आदर्श हैं, जिनकी प्रेरणा आज भी सामाजिक उत्थान और सद्भाव की धुरी बनी हुई है। हर वर्ष हम अग्रसेन जयंती मनाते है, लेकिन अग्रकुल संस्थापक के इतिहास को अगली पीढ़ी तक नहीं पहुचा पाते है. कार्तिक अमावस्या को दीपावली,  फाल्गुन पूर्णिमा को होली, चैत्र शुक्ल तेरस को महावीर जयंती,  कार्तिक पूर्णिमा को गुरुनानक जयंती,  चैत्र शुक्ल नवमी को रामनवमी,  भाद्रपद कृष्ण अष्टमी को जन्माष्टमी और आश्विन माह शुक्ल प्रतिपदा को श्री अग्रसेन जयंती इस बात के द्योतक हैं कि हमारे सभी व्रत त्यौहार तिथि आधारित हैं ना कि ग्रेगोरियन कलेंडर के दिनांक आधारित। इन्ही त्रुटियों को दूर करने हेतु देश के जानेमाने हिंदू चिंतक एवं विचारक अग्रकुल के ही सुनील गंगाराम गर्ग द्वारा संपादित व ललित हीरालाल गर्ग के बिलासपुर आवास से हिंदू दैनंदिनी न्यास द्वारा नववर्ष चैत्र प्रतिपदा युगाब्द 5127 के पावन अवसर पर बिलासपुर से विगत पांच वर्षो से लगातार हिंदू दैनंदिनी प्रकाशित कर अग्रवंश सहित हिंदु समाज को वास्तविकता से अवगत कराने हेतु विश्व में पहली बार हिंदू तिथि को अंको में लिखने की विधि सहित सरल भाषा में तिथि, व्रत, त्यौहार, ऋतु आदि एकसाथ उपलब्ध कराकर हिंदुत्व के विलुप्त होते सद्गुणों को सहेजने व नई पीढीयों को अपने वैभवशाली इतिहास से अवगत कराने हेतु उद्यम किया जा रहा है.

श्री श्री 1008 श्री महाराजा अग्रसेन जी की विशेषताए

दो युगों के दृष्टा : द्वापर के अंत से लेकर कलयुग में भी राज
जाति विहीन समाज : सूर्यवंशी होकर नागवंशी से विवाह
अहिंसा : पशुबलि/मांसाहार का त्याग कर शाकाहार अपनाया
वर्ण परिवर्तन : क्षत्रिय वर्ण को त्याग शुद्ध सात्विक वैश्य वर्ण अपनाया
समाजवाद : समाज से नवआगंतुकों को एक ईंट और एक रुपया दिलवाकर समकक्ष बनाना
धर्मार्थ कार्य : आमदनी का निश्चित हिस्सा धर्मार्थ समाज को वापस करना
समाजसेवा : उस दौर में वृक्षारोपण, कुएं, बावड़ी, धर्मशालाओ का निर्माण
गोत्र व्यवस्था : 18 पुत्रों को यज्ञ कर 18 ऋषियों के मूल गोत्र दिलवाना
सर्वाधिक न्यायपूर्ण राज : 7 वर्षों तक द्वापर युग में तथा 101 वर्षों तक कलयुग में कुल 108 वर्षों न्यायपूर्ण राज करने वाले एकमात्र शासक

उपरोक्त विशेषताओं को ध्यान रखते हुए उनके वंशज (स्टेक होल्डर) होने के नाते आज हमें जाति व्यवस्था का त्याग कर केवल गोत्र उपयोग करना ना केवल ज्यादा प्रासंगिक होगा, अपितु समग्र हिंदू समाज के उत्थान में सहायक होकर पुरुष/महिला के अनुपात की कमी को दूर कर सभी के विवाह सम्बंध में सहायक भी होगा. उनकी 5149वीं जयंती पर हिंदू समाज में व्याप्त बुराइयों का त्याग कर उपरोक्त महर्षियों के गोत्र उपनाम अपनाकर जाति विहीन समरस समाज बनाकर उनके आदर्शो को अपनाना हीं उनके प्रति सही सम्मान होगा. यदि आपके मन में जाति व्यवस्था के अस्तित्व में आने के कारण, अस्पृश्यता के कारण, हिंदुत्व के वैज्ञानिक सद्गुण व काल गणना से सम्बन्धित कोई प्रश्न हो तो निसंकोच सम्पर्क करे यथासम्भव निराकरण करने का प्रयास किया जायेगा.