बिलासपुर । 50 वर्षों से ज्यादा समय से घर, मकान, दुकान बनाकर रहने एवं अपने जीवको पiर्जन् करने वाले स्थानीय लोगों को हटाने के लिए नोटिस देना, पूर्व में 173 मकान तोड़ना, जिला प्रशासन के तानाशाही पूर्ण नीति है, लिंगीयiडीह के गरीबों आवासहीनौ, बेलतरा विधानसभा बिलासपुर के आम जन मानस के सुख दुख के लिए हम लोग वर्षों से लड़ रहे हैं, आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर इस आंदोलन को मदद करेंगे, गरीबों के मकान को तोड़ने से बचiने का भरसक का प्रयास किया जाएगा, यदि मैं विधायक रहता तो यह स्थिति निर्मित नहीं होती, यह बातें बिलासपुर जिले के लोकप्रिय कांग्रेस नेता त्रिलोक चंद्र श्रीवास, राष्ट्रीय समन्वयक- अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी ने आज लिंगीयiडीह में अतिक्रमण से प्रभावित परिवारों एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा किए जा रहे धरना को अपना पूर्ण समर्थन देते हुए व्यक्त किया, इस अवसर पर उन्होंने कहा कि इस विषय में किया जा रहे जन आंदोलन को उनका एवं उनके सहयोगियों का पूर्ण समर्थन प्राप्त रहेगा, गरीबों एवं आम जनता के लिए वह पिछले 25 वर्ष ज्यादा समय से संघर्ष कर रहे है आगे भी उनकी लड़ाई जारी रहेगी, इस अवसर पर दिलीप पाटिल मानिकपुरी मिश्रा पंडित जितेंद्र शर्मा आयुष सिंह राज ठाकुर पवन सिंह प्रदीप सिंह ठाकुर सोनू कश्यप विनोद यादव रामेश्वर केसरी अमित सोनकर राजू कश्यप दीपक नादम सहित क्षेत्र के सैकड़ो रहवासी उपस्थित थे l
Mohanish Singh Thakur
श्रमिक अधिकारों के लिए संघर्ष से लेकर राष्ट्र निर्माण हेतु अभूतपूर्व योगदान करने वाले डॉ. भीमराव अंबेडकर
अर्जुन राम मेघवाल
आज, हम एक विराट व्यक्तित्व के स्वामी और आधुनिक मानव समाज की दिशा निर्धारित करने वाले प्रगतिशील उपायों के पुरोधा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर का 70वां महापरिनिर्वाण दिवस मना रहे हैं। एक विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, दार्शनिक, समाज सुधारक और इन सबसे अधिक एक राष्ट्र-निर्माता के रूप में उनके अथक प्रयासों ने आधुनिक भारत की नींव रखी। उन्होंने केवल भारत के संविधान का मसौदा ही तैयार नहीं किया बल्कि एक ऐसे समावेशी और सशक्त राष्ट्र का खाका भी प्रस्तुत किया जहां प्रत्येक नागरिक की गरिमा की रक्षा हो और सभी को समान अवसर प्राप्त हो सके। इन मूलभूत मूल्यों से प्रेरित होकर मोदी सरकार ने जन कल्याण और सुशासन को बढ़ावा देने वाली कई पहलें की हैं। 27 नवंबर, 2025 को पेरिस स्थित यूनेस्को (UNESCO) मुख्यालय में भारत के संविधान की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर संपूर्ण विश्व डॉ. भीमराव रामजी अंबेडकर की आवक्ष प्रतिमा के अनावरण का साक्षी बना। विश्व के गणमान्य व्यक्तियों के समक्ष यह प्रतिमा न केवल भारत के एक नेता के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में बल्कि न्याय के एक सार्वभौमिक प्रतीक के रूप में खड़ी है। पट्टिका पर भारत के संविधान का शिल्पकार लिखा है, फिर भी ये शब्द उस व्यक्ति की विरासत का पूरी तरह से उल्लेख नहीं कर सकते, जिसने न केवल भारत के संविधान का मसौदा तैयार किया, बल्कि एक पूरे राष्ट्र को समग्रतः आकार देने में मदद की।
अपने पूरे जीवनकाल में, बाबा साहेब डॉ. अंबेडकर ने श्रमिकों के अधिकार और उनके कल्याण की वकालत करते हुए न्याय के लिए संघर्ष किया। गोलमेज सम्मेलन (Round Table Conference) में दलित वर्गों (Depressed Classes) के प्रतिनिधि के रूप में उन्होंने जीवन निर्वाह मजदूरी, काम करने की उचित स्थिति, दमनकारी जमींदारों से किसानों की मुक्ति और दबे-कुचले लोगों को प्रभावित करने वाली सामाजिक बुराइयों के उन्मूलन की पुरजोर वकालत की। उन्होंने व्यक्तिगत रूप से श्रमिकों और दलितों की पीड़ा को देखा था। बंबई में, वह बंबई डेवलपमेंट डिपार्टमेंट की एक कमरे वाली चॉल (tenements) में मिल मजदूरों के साथ 10 साल से अधिक समय तक रहे, जहाँ कोई आधुनिक सुविधाएँ नहीं थीं और
प्रत्येक मंजिल पर सभी उद्देश्यों के लिए केवल एक शौचालय और एक नल था। इन परिस्थितियों ने उन्हें श्रमिकों के जीवन को काफी नजदीक से समझने का अवसर दिया। उन्होंने आम जनता को एकजुट किया और 1936 में भूमिहीन लोगों, गरीब काश्तकारों, कृषकों और श्रमिकों के कल्याण हेतु एक व्यापक कार्यक्रम के साथ इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी (ILP) की स्थापना की। 17 सितंबर, 1937 को बंबई विधानसभा के पुणे सत्र के दौरान, उन्होंने कोंकण में खोती भूमि कार्यकाल प्रणाली को समाप्त करने के लिए एक विधेयक पेश किया। 1938 में, उन्होंने बंबई में काउंसिल हॉल तक किसानों के मार्च का नेतृत्व किया और किसानों, श्रमिकों और भूमिहीनों के लोकप्रिय नेता बन गए। वह कृषि काश्तकारों की दासता (बंधुआ मजदूरी) को समाप्त करने के लिए विधेयक पेश करने वाले पहले भारतीय विधायक थे। उन्होंने औद्योगिक विवाद विधेयक (Industrial Disputes Bill), 1937 का भी कड़ा विरोध किया क्योंकि इसमें श्रमिकों के हड़ताल करने के अधिकार में कटौती की गई थी। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अनिश्चित वैश्विक व्यवस्था के दौर में डॉ. अंबेडकर ने वायसराय की कार्यकारी परिषद के श्रम सदस्य के रूप में भारत में मजदूरों के कल्याण का मार्ग प्रशस्त किया। विश्व युद्ध की समाप्ति के बाद अर्थव्यवस्था में सुधार होने और उद्योगों का विस्तार होने पर उद्यमियों को समृद्धि के अवसर मिले, लेकिन श्रमिकों को उनका उचित हिस्सा नहीं दिया गया। उस समय डॉ. अंबेडकर ने श्रमिकों के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण उपाय पेश किए, जिससे सरकार की श्रम नीति की नींव पड़ी। उन्होंने श्रमिकों से जुड़े जटिल मुद्दों का बहुत दक्षता के साथ समाधान निकाला जिससे उन्हें कर्मचारियों व नियोक्ताओं दोनों से सम्मान प्राप्त हुआ। वर्ष 1943 में बंबई से आकाशवाणी से किए गए अपने संबोधन में डॉ. अंबेडकर ने श्रमिकों के लिए स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित जीवन की उचित स्थिति सुरक्षित करने का आग्रह किया। उनके प्रयासों से श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने में मदद मिली। उन्होंने प्रमुख श्रम कानूनों के माध्यम से श्रमिकों के कल्याण हेतु अहम योगदान किया जिसमें युद्ध चोट (मुआवजा बीमा) विधेयक, असुरक्षित निरीक्षणों के कारण मिलों में होने वाली मृत्यु पर रोक लगाने से संबंधित बॉयलर (संशोधन) विधेयक 1943, भारतीय खान और ट्रेड यूनियन संशोधन विधेयक, खनिक मातृत्व लाभ संशोधन विधेयक, कोयला खान सुरक्षा (स्टोविंग) संशोधन विधेयक और कामगार मुआवजा संशोधन विधेयक शामिल हैं।
9 दिसंबर 1943 को, डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने धनबाद कोयला खदानों का दौरा किया और खदानों के संचालन व श्रम स्थितियों का निरीक्षण करने के लिए जमीन से 400 फीट नीचे गए। इसके परिणामस्वरूप जनवरी 1944 का कोयला खान श्रम कल्याण अध्यादेश (Coal Mine Labour Welfare Ordinance) आया, जिससे श्रमिकों के कल्याण के लिए एक कोष बनाया गया। उन्होंने कोयले की खानों से निकाले गए कोयले पर कर को दोगुना करके इस कोष को मजबूत किया, जिससे खनिकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य और सुरक्षा उपाय सुनिश्चित हुए। 8 नवंबर 1943 को, उन्होंने भारतीय ट्रेड यूनियन (संशोधन) विधेयक भी पेश किया, जिसमें नियोक्ताओं के लिए ट्रेड यूनियनों को मान्यता देना अनिवार्य कर दिया गया। 8 फरवरी 1944 को कोयला खदानों में महिलाओं के जमीन के भीतर काम पर से प्रतिबंध हटाने के विषय पर विधानसभा में बहस के दौरान डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने कहा, "मुझे लगता है कि यह पहली बार है कि किसी भी उद्योग में लैंगिक आधार पर भेदभाव के बिना समान काम के लिए समान वेतन का सिद्धांत स्थापित किया गया है। यह देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण था। माइन्स मैटरनिटी बेनिफिट (संशोधन) बिल 1943 के माध्यम से उन्होंने मातृत्व लाभ को मजबूत किया और उन्हें अनुपस्थिति के कारण आर्थिक दंड से बचाने का प्रावधान किया। वर्ष 1945 में उन्होंने अधिनियम में और संशोधन किए ताकि महिलाओं को प्रसव से दस सप्ताह पहले जमीन के भीतर कार्य करने से बचाया सके और उनके लिए प्रसव से दस सप्ताह पहले और चार सप्ताह बाद कुल मिलाकर चौदह सप्ताह का मातृत्व अवकाश सुनिश्चित किया जा सके।
26 नवंबर 1945 को नई दिल्ली में भारतीय श्रमिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, उन्होंने श्रमिकों के प्रति सरकार के दायित्वों की समीक्षा की और श्रमिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के श्रम कानून की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया। प्रगतिशील श्रम कल्याण कानून की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने कहा:कोई यह कह सकता है कि अंग्रेजों को श्रम कानून की एक उचित संहिता बनाने में 100 साल लग गए, किंतु यह कोई तर्क नहीं है कि हमें भी भारत में 100 साल लगने चाहिए। इतिहास का अध्ययन केवल इस दृष्टि से नहीं किया जाना चाहिए कि दूसरे देशों की गलतियों की नकल कितनी अच्छी तरह की जाए। हम इतिहास का अध्ययन इसलिए करते हैं ताकि यह जान सकें कि लोगों ने क्या गलतियां की है और उनसे कैसे बचा जा सकता है। इतिहास हमेशा एक उदाहरण नहीं होता। अक्सर यह एक चेतावनी होता है। अगले दिन उसी सम्मेलन में, उन्होंने कारखानों में काम के घंटे घटाकर 48 घंटे प्रति सप्ताह करने, वैधानिक औद्योगिक कैंटीन शुरू करने और कामगार मुआवजा अधिनियम, 1934 में संशोधन करने के लिए कानून प्रस्तावित किया। उन्होंने न्यूनतम मजदूरी और भारतीय ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926 में संशोधन के लिए कानूनों का मसौदा तैयार करने की योजना भी घोषित की। 21 फरवरी 1946 को, डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने साप्ताहिक काम के घंटों को घटाकर 48 करने, ओवरटाइम दरों को तय करने और सवैतनिक अवकाश प्रदान करने के लिए कारखाना (संशोधन) विधेयक पेश किया। प्रवर समिति (select committee) द्वारा समीक्षा के बाद, अंबेडकर द्वारा समर्थित यह ऐतिहासिक कानून 4 अप्रैल 1946 को पारित किया गया था।
अभ्रक खनन उद्योग में कल्याणकारी गतिविधियों के लिए एक कोष बनाने के लिए उनके द्वारा पेश किया गया अभ्रक खान श्रम कल्याण कोष विधेयक (Mica Mines Labour Welfare Fund Bill), 15 अप्रैल 1946 को पारित किया गया था। इसने बाल और महिला मजदूरों के लिए सुविधाओं और काम करने की स्थितियों में सुधार किया, जिसमें काम के घंटे और मजदूरी के मुद्दे शामिल थे। डॉ. अंबेडकर ने 11 अप्रैल 1946 को न्यूनतम वेतन विधेयक (Minimum Wages Bill) भी पेश किया, जिसमें समान नियोक्ता-श्रम प्रतिनिधित्व वाली सलाहकार समितियों और बोर्डों का प्रस्ताव था। बाद में 9 फरवरी
1948 को इसे कानून का रूप दिया गया। डॉ. अंबेडकर ने कम्युनिस्टों के नेतृत्व वाले श्रमिक आंदोलन का विरोध किया, उन्होंने उत्पादन के सभी साधनों को नियंत्रित करने के मार्क्स के सर्वसत्तावादी दृष्टिकोण (totalitarian approach) को खारिज कर दिया। वह मार्क्स के इस विचार से असहमत थे कि निजी संपत्ति को खत्म करने से गरीबी और पीड़ा समाप्त हो जाएगी। अपने निबंध बुद्ध या कार्ल मार्क्स में, वह लिखते हैं:—
क्या कम्युनिस्ट यह कह सकते हैं कि अपने मूल्यवान उद्देश्य को प्राप्त करने में उन्होंने अन्य मूल्यवान उद्देश्यों को नष्ट नहीं किया है? उन्होंने निजी संपत्ति को नष्ट कर दिया है। यह मानते हुए कि यह एक मूल्यवान उद्देश्य है, क्या कम्युनिस्ट यह कह सकते हैं कि इसे प्राप्त करने की प्रक्रिया में उन्होंने अन्य मूल्यवान उद्देश्यों को नष्ट नहीं किया है? अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए उन्होंने कितने लोगों को मारा है। क्या मानव जीवन का कोई मूल्य नहीं है? क्या वे मालिक की जान लिए बिना संपत्ति नहींले सकते थे? संविधान का मसौदा तैयार करते समय, डॉ. अंबेडकर ने एकसमान कानून और अंतरराष्ट्रीय मानकों के साथ संरेखण सुनिश्चित करने के लिए श्रम को समवर्ती सूची (Concurrent List) में रखा। उनकी दूरदर्शिता ने संविधान में बंधुआ मजदूरी को अवैध घोषित करके उसे समाप्त कर दिया। हमारे दूरदर्शी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा दिए गए "Reform, Perform and Transform" मंत्र से प्रेरित होकर तथा डॉ. अंबेडकर के मूल्यों का अनुसरण करते हुए हमारी सरकार ने चार व्यापक श्रम संहिताओं (labour codes)—मजदूरी, औद्योगिक संबंध, सामाजिक सुरक्षा और कल्याण, और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और काम करने की स्थिति—को लागू किया है। इन सुधारों का उद्देश्य सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना, श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा करना, उत्पादकता को बढ़ावा देना, नौकरियां पैदा करना और वर्ष 2047 तक विकसित भारत की दिशा में भारत की आर्थिक समृद्धि को मजबूत करना है। फरवरी 2019 में शुरू की गई प्रधानमंत्री श्रम योगी मानधन योजना, असंगठित श्रमिकों के लिए वृद्धावस्था सुरक्षा प्रदान करती है, तथा मातृत्व संशोधन अधिनियम, 2017 द्वारा मातृत्व अवकाश को 12 से बढ़ाकर 26 सप्ताह किया गया है और क्रेच सुविधाओं को अनिवार्य बनाया गया है। श्रमेव जयते की स्थायी भावना से निर्देशित होकर हम राष्ट्र निर्माण में श्रमिकों के अनगिनत योगदान को सम्मानित करते हैं। परम पूज्य बाबासाहेब डॉ. अंबेडकर का महापरिनिर्वाण दिवस हमें इस महान राष्ट्र-निर्माता के दृष्टिकोण और कार्यों पर विचार करने का एक उपयुक्त अवसर प्रदान करता है। उनके आदर्श हमें राष्ट्र की विकास यात्रा को तीव्रतर बनाने तथा वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए सदैव प्रेरित करते रहेंगे।
अर्जुन राम मेघवाल
लेखक केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य मंत्री, भारत सरकार है।
डाक विभाग ने जन समस्याओं के निवारण हेतु अदालत का आयोजन किया
बिलासपुर । भारतीय डाक विभाग के द्वारा जन समस्याओं के निवारण के तत्वाधान में दिनांक 08.12.2025 को सुबह 11:00 बजे कार्यालय अधीक्षक डाकघर बिलासपुर संभाग, बिलासपुर में डाक अदालत का आयोजन किया गया है जिसमे उपभोक्ताओं की समस्याओं की सुनवाई होगी तथा उनका निराकरण किया जायेगा | इस दौरान काउंटर सेवा, मनी आर्डर, बचत बैंक 1. मूल्य देय वस्तुएं, डाक जीवन बीमा एवं ग्रामीण डाक जीवन बिगा, स्पीड पोस्ट वस्तुएं व विदेशी डाक वस्तुएं आदि से जुड़ी समस्याओं की सुनवाई होगी। किसी उपभोक्ता को इन मामलों में शिकायत हो और उसका अभी तक संतोष जनक जवाब नहीं मिला हो तो वह शिकायत का ब्यौरा 05.12.2025 तक कार्यालय अधीक्षक डाकघर बिलासपुर संभाग, बिलासपुर को प्रेषित कर सकते हैं ।
वित नियंत्रक शंकर झा द्वारा रचित छ.ग. भण्डार क्रय नियम एवं जेम पोर्टल से शासकीय क्रय पुस्तक का विमोचन
रायपुर । पुलिस मुख्यालय नवारायपुर में पदस्थ राज्य वित सेवा के वित नियंत्रक शंकर झा द्वारा छ.ग. भण्डार क्रय नियम एवं जेम पोर्टल से शासकीयक्रय नामक पुस्तक लिखी गई है यह पुस्तिका शासकीय सामाग्रीयों की खरीदी में काफीउपयोगी व मार्गदर्शी है। इस मार्ग दर्शिका में भण्डार क्रय नियम के अद्यतनप्रावधानों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियम-2002 भण्डार से संबंधित वित्तीय संहिता के प्रावधान पुरानी भण्डार सामाग्री का निराकरण ]जीएसटी में स्त्रोत पर कटौती (टीडीएस) के संबंध में मार्गदर्शिका] शासकीय दूरभाष सुविधा शासकीय वाहन व्यवस्था] Purchasefrom GEM Portal वित्तीय अधिकार भाग-1 2024 भी समाहित है। पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम द्वारापुलिस मुख्यालय के कान्फ्रेंस हॉल में उक्त पुस्तिका का विमोचन किया गया। इस अवसरपर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एसआरपी कल्लूरी अमित कुमार अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक प्रदीप गुप्ता अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक एवं समस्त पुलिस महानिरीक्षक] उप पुलिस महानिरीक्षक] सहायक पुलिस महानिरीक्षक तथा अन्य अधिकारी गण उपस्थित रहें।
Editorial : नारी शक्ति से विकास: महिलाओं के नेतृत्व वाली प्रगति पर फोकस करने की ज़रुरत
Editorial : लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण हमारे उज्जवल आज और बदलते कल के लिए बेहद ज़रुरी आधार है। तेज़ रफ्तार से आगे बढ़ते इस वक्त में हम लैंगिक समानता हासिल करने के लिए एक और शताब्दी तक इंतज़ार नहीं कर सकते। नारी शक्ति और भारत की विश्व को सभ्यतागत देन, महिलाओं को देवी के रूप में देखने की मूल अवधारणा को अब महज़ एक प्रतीक से आगे ले जाकर व्यावहारिक जीवन में लाना होगा और महिलाओं के प्रति सम्मान की हमारी विरासत को महिलाओं के नेतृत्व वाले सतत् विकास के मार्ग पर ले जाना होगा।
जब आधी मानवता की स्वतंत्रता और जीवन जीने के अवसर बढ़ते हैं, तो नए समाज में फिर से एक नई ऊर्जा का संचार होता है। लैंगिक समानता अपने आप में एक आदर्श विचार है, और सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, तकनीकी और पर्यावरणीय प्रगति का एक शक्तिशाली कारक भी है। मैकिन्से ग्लोबल इंस्टीट्यूट की 2015 की रिपोर्ट, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों पर आधारित वर्ष 2024 का विश्लेषण और ईवाय का इंडिया@100 कार्य, मिलकर एक ठोस आर्थिक तर्क पेश करते हैं: लैंगिक अंतर को कम करने से सकल घरेलू उत्पाद में 20 से 30% की वृद्धि हो सकती है और यह भारत के लिए 2047 तक 28 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए बेहद ज़रुरी है।
भारत एक जनसांख्यिकीय दौर से गुज़र रहा है। हमारी युवा आबादी का तभी लाभ उठाया जा सकता है, जब वह महिलाओं के लिए फायदेमंद हो। प्रजनन क्षमता घट रही है और लड़कियों तथा युवतियों की महत्वाकांक्षाएँ बढ़ रही हैं, भारत अब उच्च शिक्षा में लगभग बराबरी पर है और करीब 43% स्टेम छात्राएँ हैं। कई सालों तक महिलाओं के काम को अनौपचारिक और अदृश्य बनाए रखने के बाद, आखिरकार महिलाओं की श्रमशक्ति में भागीदारी फिर से बढ़ने लगी है और अब इसे बेहतर गुणवत्ता, औपचारिक और भविष्य के लिए तैयार नौकरियों में तब्दील होना चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की एक खास विशेषता ऐसे प्रमुख कार्यक्रमों को लक्षित करना है, जिनमें महिलाएँ प्रमुख लाभार्थी हैं। इसके अलावा बुनियादी ढाँचे, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े ऐसे कार्यक्रम भी सरकार के फोकस में हैं, जो लैंगिक भेदभाव के प्रति संवेदनशील हैं। छात्रवृत्ति, छात्रावास और आरक्षित सीटों ने उच्च एवं तकनीकी शिक्षा में महिलाओं की मौजूदगी को बढ़ाया है और ज्ञान, स्वास्थ्य, हरित और देखभाल अर्थव्यवस्थाओं में उनके लिए नए रास्ते खोले हैं। डिजिटल मिशन और ग्रामीण कार्यक्रमों ने करोड़ों महिलाओं को प्रशिक्षित किया है और उनके हाथों में किफायती डेटा वाले स्मार्टफोन और जन धन खाते दिए हैं, जिससे उन्हें सूचना, बाज़ार और सेवाओं तक सीधी पहुँच मिली है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री मुद्रा, स्वच्छ भारत और प्रधानमंत्री आवास जैसी प्रमुख योजनाओं ने करोड़ों महिलाओं को स्वच्छ ऊर्जा, ऋण तक पहुँच, स्वच्छता और सुरक्षित आवास जैसी सुविधाएं दी हैं, जबकि सुकन्या समृद्धि और लखपति दीदी जैसी योजनाओं ने उनके बैंक खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और उनकी आय में बढ़ोत्तरी को मुमकिन बनाया है। अब अगले स्तर पर उन्हें निर्णायक रूप से लाभार्थी से अधिकार पति, यानी अधिकारों के प्राप्तकर्ता से पूर्ण अधिकार धारक और अर्थव्यवस्था तथा समाज में फैसला लेने वाली महिला के रूप में स्थापित करना होगा। 2030 तक लैंगिक समानता पर सतत् विकास लक्ष्य 5 को प्राप्त करने का यही असल सार है।
भारत में अंतर्संबंध का अर्थ है, कि कई महिलाओं को गरीबी, जाति, जनजाति, धर्म, दिव्यांगता या स्थान के कारण कई स्तरों पर मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। तीन तलाक के उन्मूलन ने मुस्लिम महिलाओं के विवाह अधिकारों को मज़बूत किया है। जनजातीय पृष्ठभूमि की महिला, द्रौपदी मुर्मू का भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुनाव इस बात का प्रतीक है कि हाशिए पर रहने वाले समाज की महिला एक गणतंत्र में किस ऊँचाई तक पहुँच सकती है और लैंगिक और सामाजिक न्याय के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को और गहरा कर सकती है। मौजूदा वक्त में हमें जिस कल का निर्माण करना है, वह ऐसा होना चाहिए, जिसमें विकास के ऐसे उदाहरण, असाधारण न होकर, व्यवस्था का हिस्सा हों और व्यापक रुप से दिखाई दें।
हिंसा से मुक्ति, एक लैंगिक समानता वाले समाज का अनिवार्य आधार बनी हुई है। घरेलू दुर्व्यवहार और मानव तस्करी से लेकर कार्यस्थल पर उत्पीड़न और ऑनलाइन घृणा तक, महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हर प्रकार की हिंसा को खत्म करना, हमारे एजेंडे में सबसे ऊपर होना चाहिए, साथ ही महिलाओं के स्वास्थ्य और यौन तथा प्रजनन अधिकारों पर निरंतर काम करना चाहिए, जो स्वायत्तता और सम्मान की गारंटी देते हैं।
राजनीतिक आवाज़ और नेतृत्व हर दूसरे हस्तक्षेप के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देते हैं और महिलाओं को भविष्य के नियमों को आकार देने की ताकत देते हैं। जमीनी स्तर पर, पंचायतों और शहरी स्थानीय निकायों में 33% से 50% आरक्षण ने 15 लाख महिला नेताओं को जन्म दिया है। लोकसभा और सभी राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित करने वाला नारी शक्ति वंदन अधिनियम, कानून निर्माण और शासन में वास्तविक समानता की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। जैसा कि हाल ही में बिहार में देखा गया, महिलाएँ चुनावी नतीजों को भी नया रूप दे रही हैं, जहाँ जागरूक मतदाता सुरक्षा, गतिशीलता, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका के क्षेत्र में काम करने वाली सरकारों को चुन रहे हैं।
संस्कृति एक बुनियादी ढाँचा है, जिसके ज़रिए कोई भी समाज खुद को समझता है और अपने भविष्य की कल्पना करता है। सदियों से, इसका निर्माण पितृसत्ता के पुरुषवादी दृष्टिकोण से हुआ है, यहाँ तक कि उन सभ्यताओं में भी जहाँ महिलाओं की पूजा की जाती थी। आज, मीडिया और साहित्य से लेकर सिनेमा, संगीत, खेल और डिजिटल सामग्री तक, रचनात्मक उद्योगों में महिलाएँ उस पटकथा को नए सिरे से लिख रही हैं और देवी के विचार को दोबारा एक नई परिभाषा दे रही हैं, ताकि उनके प्रति श्रद्धा को घर, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक क्षेत्र में समान अधिकार, समान सम्मान और साझा ज़िम्मेदारी के रूप में दर्शाया जा सके।
परिवर्तन के अगले स्तर का नेतृत्व अब संसदों के साथ-साथ कार्यालयों, बोर्ड रूम, प्रयोगशालाओं और डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म से भी होना चाहिए। सरकारी विभागों और राजनीतिक दलों से लेकर विश्वविद्यालयों, अनुसंधान परिषदों, स्टार्टअप्स और बड़े निगमों तक, हर संस्थान को लैंगिक समानता को अपने डीएनए में शामिल करना होगा। इसका अर्थ है कि लैंगिक समानता वाली शिक्षा से लेकर नौकरियों की मूल्य श्रृंखला तक, जहाँ लड़कियाँ कक्षाओं से आगे बढ़कर व्यापक उद्योग 4.0 व्यवस्था तंत्र में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में करियर बना सकें। इसका एक दूसरा अर्थ ये भी है कि कॉर्पोरेट नेता और मुख्य कार्यकारी अधिकारी, भर्ती, प्रतिधारण, दोबारा प्रवेश और पदोन्नति में समानता के लिए प्रतिबद्ध हों और वरिष्ठ प्रबंधन और बोर्ड में और ज्यादा महिलाओं को शामिल करें। इसके लिए एक शोध और नवाचार प्रणाली और एक स्टार्टअप संस्कृति को तैयार करना होगा, जहां महिला संस्थापक, वैज्ञानिक और रचनाकार समान शर्तों पर ऋण, मार्गदर्शन और बाज़ार तक पहुँच सकें।
जी-20 की अध्यक्षता के दौरान, भारत ने महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास को एजेंडे के केंद्र में रखा, डिजिटल लैंगिक अंतर को पाटने, महिलाओं की श्रमशक्ति में भागीदारी बढ़ाने और महिला उद्यमिता और नेतृत्व का विस्तार करने की प्रतिबद्धताएँ ज़ाहिर कीं। सशक्त महिलाएँ हमारे युग की महान बदलावकारी शक्ति हैं। अपने परिवारों, समुदायों, देशों और दुनिया को बदलने वाली परिवर्तित महिलाओं के रूप में, वे जनसांख्यिकीय लाभ उठाते हुए महिलाओं और लड़कियों को आज़ादी, विकल्प और सम्मान से जीवन जीने में सक्षम बनाती हैं। भारत अगर इस आंदोलन को इसी रफ्तार से आगे बढ़ाता है, तो एक अग्रणी शक्ति के रूप में इसकी दूसरी पारी की शुरूआत, 2047 तक विकसित भारत की यात्रा से शुरू होगी, वो यात्रा जो नारी शक्ति द्वारा प्रज्वलित और संचालित होगी।
लेखिका लक्ष्मी पुरी संयुक्त राष्ट्र की पूर्व सहायक महासचिव और लैंगिक समानता तथा महिला-नेतृत्व वाले विकास की एक अग्रणी वैश्विक समर्थक हैं। लेख में व्यक्त किए गए विचार उनके व्यक्तिगत विचार हैं।
दरगाह लुतरा शरीफ से प्रकाशित ‘फैज़ाने बाबा सैय्यद इंसान अली शाह’ कैलेंडर 2026 का मुफ़्ती सलमान अज़हरी ने कोरबा में भव्य विमोचन किया
कोरबा/बिलासपुर । कोरबा के घण्टाघर में आयोजित मरकज़ी सीरत कमेटी के सीरतुन्नबी जलसे के मुख्य मंच से मुस्लिम समाज के प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध आलिम-ए-दीन धर्मगुरु मुफ़्ती सलमान अज़हरी साहब ने दरगाह लुतरा शरीफ से प्रकाशित फैज़ाने बाबा सैय्यद इंसान अली शाह कैलेंडर 2026 का बड़े ही शानो शौकत के साथ आध्यात्मिक माहौल में विमोचन किया।
विमोचन के दौरान मुफ़्ती सलमान अज़हरी साहब ने कहा कि फैज़ाने बाबा सैय्यद इंसान अली शाह कैलेंडर इस्लामी इल्म का एक अनमोल खज़ाना है। इसमें साल भर के इस्लामी त्योहार, औलियाए किराम के उर्स की तिथियाँ, शादियों के मुबारक दिन, दुआएँ और इस्लामी तौर-तरीक़े संकलित हैं, जो हर मुसलमान की ज़िंदगी के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने कैलेंडर प्रकाशन की इस सराहनीय पहल को समाज के धार्मिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए अत्यंत लाभकारी बताया।
कार्यक्रम में मरकज़ी सीरत कमेटी, सूबेभर से आए उलेमा-ए-किराम, सामाजिक प्रतिनिधि तथा दरगाह लुतरा शरीफ इंतेजामिया कमेटी के पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल रहे। सभी ने इस कैलेंडर को मुस्लिम समाज की जरूरतों के अनुरूप एक उत्कृष्ट दस्तावेज़ बताया।
मरकजी सीरत कमेटी कोरबा के अध्यक्ष मिर्जा आसिफ बेग (निशु) ने बताया कि हमारी कमेटी के माध्यम से कार्यक्रम में शामिल होने आए प्रदेशभर के लोगों को निःशुल्क कैलेंडर वितरण किया गया। इंतेजामिया कमेटी के अध्यक्ष इरशाद अली ने जानकारी दी कि आगामी 8 दिसंबर को दरगाह लुतरा शरीफ में हज़रत बाबा सैय्यद इंसान अली शाह रहमतुल्लाहि अलैह के महीना उर्स मुबारक पर आने वाले जायरीन को भी यह कैलेंडर निःशुल्क दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इससे पहले वक्फ बोर्ड कार्यालय, रायपुर में भी बोर्ड के चेयरमैन कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त डॉ. सलीम राज व अन्य अतिथियो द्वारा परंपरा अनुसार पहली प्रतियों का विमोचन किया गया था।
विमोचन के दौरान विशेष रूप से
दरगाह इंतेजामिया कमेटी के अध्यक्ष इरशाद अली,सेक्रेटरी रियाज़ अशरफी,मरकज़ी सीरत कमेटी के अध्यक्ष मिर्ज़ा आसिफ बैग ‘निशु’, आरिफ खान,मोहसिन मेमन, रोशन खान, फिरोज़ खान, महबूब खान, हाजी अब्दुल करीम, दरगाह के खादिम मोहम्मद उस्मान खान, हाजी साबिर खान तथा रूहुल अमीन खान सहित बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।
सीएम के अपमान पर भाजयुमो करेगी घेराव आज
सिविल लाइन पहुंचकर FIR दर्ज करने की करेंगी मांग
बिलासपुर। भाजपा जनता पार्टी युवा मोर्चा ने कांग्रेस पार्टी के द्वारा विरोध प्रदर्शन में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अपमान कर विरोध जताने पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राहुल टिकरिया ने कड़ा विरोध जताया है ।इसको लेकर आज भाजयुमो बड़ी संख्या में उग्र आंदोलन कर सिविल लाइन थाने में घेराव करेगी। राहुल टिकरिया ने कहा कि कांग्रेस ने बिलासपुर में प्रदर्शन के दौरान मुख्यमंत्री जी का भद्दा अपमान कर सारी सीमाएं और मर्यादाएं लांघी हैं। यह सिर्फ मुख्यमंत्री जी का नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश का अपमान है। आज हम गुजरात में हैं, लेकिन हमारे युवा मोर्चा के साथी बिलासपुर के सिविल लाइन थाना पहुंचकर, इस कृत्य में शामिल सभी कांग्रेस कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज करवाएंगे और पुलिस प्रशासन से कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग करेंगे। विरोध करना है तो करो, लेकिन मर्यादा में रहो नहीं तो युवा मोर्चा हर जगह इसका जवाब देने हेतु तत्पर रहेगा।
अरपा रिवर वैली इंटरनेशनल स्कूल में I I M U N का आयोजन
बिलासपुर। अरपा रिवर वैली इंटरनेशनल स्कूल में दिनांक 14/11/2025 को I I M U N आयोजन समारोह उद्घाटन बड़े उत्साह के साथ किया गया।
आयोजन का आगाज विशिष्ट अतिथियों, विद्यालय प्रबंधन तथा छात्र पालकों के द्वारा मां सरस्वती की छायाचित्र पर पुष्पहार एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। कश्मीर से आई हुई सुश्रीअंबर फातिमा ने I I M U N का परिचय देते हुए उसके उद्देश्य पर प्रकाश डाला। विद्यालयीन छात्राओं द्वारा विभिन्न राज्यों की लोकगीतों पर आधारित मनमोहक नृत्य प्रस्तुत किया।
एडमिरल आर. हरि कुमार ने अपने उद्बोधन में सर्वप्रथम बाल दिवस के अवसर पर बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि I I M U N विद्यार्थियों को शिक्षा में श्रेष्ठ बनाने के अलावा उनके व्यक्तित्व को निखारने में विशेष भूमिका निभाता है एवं आत्मनिर्भर बनने के लिए उनका रास्ता प्रशस्त करता है। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि नगर विधायक श्री अमर अग्रवाल जी ने अपने उद्बोधन में स्वामी विवेकानंद के कथन को दोहराते हुए कहा कि भारत पूरे विश्व का प्रतिनिधित्व कर सकता है, विद्यालय में इस तरह के I I M U N जैसे आयोजन इस कड़ी में मील का पत्थर साबित होगा।
जीवन में कुछ भी असंभव नहीं है। पारुल विश्वविद्यालय से आए डॉ सुभांगी राव ने अपने उद्बोधन में बताया कि यह विद्यार्थी जीवन में हमारी सोच को बदल कर ऊंचाइयों की ओर ले जाता है। विद्यालय के प्रबंध निदेशक श्री सुरिंदर सिंह चावला ने स्कूल आरंभ करने की यात्रा को बताते हुए कहा कि हमे साधारण से असाधारण बनना है। हमें अपने आप को अच्छाईयों से जोड़ कर रखना है और बुराइयों से दूर रखना है।
कार्यक्रम के अंत में सभी विशिष्ट अतिथियों को विद्यालय प्रबंधन से प्रबंध निदेशक द्वारा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।
14 नवंबर से 16 नवंबर तक तीन दिवसीय चलने वाली I I M U N को विभिन्न समितियों में विभक्त किया गया है। प्राथमिक विद्यालय समिति कक्षा 5वीं-7वीं 1. U N E P जलवायु परिवर्तन का मुकाबला। माध्यमिक विद्यालय समिति (कक्षा 7वीं-9वीं) C L A: अमृतकाल विजन 2047 पर ज़ोर देते हुए एक विकसित राज्य बनने की रूपरेखा पर चर्चा। 2. U N W संघर्ष क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति। 3.Harry Potter: ट्राइविज़ार्ड टूर्नामेंट का पुनरुद्धार। उच्चतर विद्यालय समिति (कक्षा 10वीं-12वीं) 1. * लोकसभा*: W A G F संशोधन आदि समितियों एवं विषयों पर प्रथम दिवस में विभिन्न चर्चाएं हुई।
विद्यालय के अध्यक्ष किरनपाल सिंह चावला, डायरेक्टर श्री गुरमेहर सिंह चावला एवं प्राचार्य फरहान अहमद ने विद्यालयीन छात्र-छात्राओं को उनकी मेहनत और लगन के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं एवं बधाई दी।
भारतीय डाक विभाग द्वारा 06 से 30 नवंबर तक डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट जीवन प्रमाण पत्र शिविर
बिलासपुर । जिले के सभी डाकघरों में 06 से 30 नवंबर 2025 तक डाक विभाग (इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक) द्वारा विशेष डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट (जीवन प्रमाण पत्र) शिविर आयोजित किया जा रहा है। इस शिविर के माध्यम से पेंशनभोगियो के लिए बायोमैट्रिक सक्षम डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र बनाया जाएगा। पूर्ण रुप से कागज रहित – फिंगरप्रिंट/चेहरे का प्रमाणीकरण द्वारा जीवन प्रमाणपत्र जारी। पेंशन विभाग/बैंको तक जाने की कोई आवश्यकता नहीं है, डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र सीधे पेंशन विभाग के साथ अपडेट किया जाता है। मामूली शुल्क – मात्र 70 रूपये (कर सहित) के शुल्क पर सेवा उपलब्ध।
भारत सरकार के वित्तीय समावेशन के लक्ष्य को साकार में इंडिया पोस्ट अपनी अहम भूमिका निभा रहा है। देश के हर कोने और गांव-गांव तक फैले डाकघरों और डाक सेवाओं के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के प्रत्येक नागरिक तक बैंकिंग एवं बीमा सेवाएं आसानी से पहुंचे। इस विशेष शिविर से आमजन विशेष रूप से लाभान्वित होंगे और न्यूनतम शुल्क में जीवन प्रमाण पत्र जारी करा पाएंगे। बिलासपुर के सभी डाकघरों में यह शिविर लगाया जा रहा है एवं इसके माध्यम से आम जनता को लाभान्वित कर उनके सुरक्षित भविष्य, परिजनों के लिए इस कैंप का आयोजन किया जा रहा है।
मैत्री एकता साहित्यिक मंच के तत्वधान में आयोजित मासिक काव्यगोष्ठी का सफल आयोजन संपन्न हुआ
बिलासपुर । रूप चौदस के अवसर पर सामुदायिक भवन रामकृष्ण नगर (तोरवा मोपका मार्ग )में आयोजित मासिक काव्य गोष्ठी के संयोजक मैत्री एकता साहित्यिक मंच के अध्यक्ष जगतारण डहरे (शिक्षक एवं साहित्यकार) ने बहुत ही प्रभावी एवं उत्कृष्ट मंच संचालन कर किया गया। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार एवं समीक्षक अशोक शर्मा जी ने अपनी लंबे साहित्यिक अनुभवों को साझा करते हुए शानदार गीत,मुक्तक से खूब तालियां बटोरी। मुख्य अतिथि डॉ. राजेंद्र कुमार वर्मा “दीपक” (वरिष्ठ साहित्यकार रतनपुर) के द्वारा प्रेरणाप्रद गीत का वाचन किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि रहे अजय कुमार सिन्हा (रिटायर्ड वायु सेना),
रीता सिन्हा, दशरथ मतवाले ने किया। वही बिलासपुर अंचल से आमंत्रित वीर रस के ओजस्वी कवि दीपक दुबे “सागर” ने मां भारती की वंदना करते हुए सनातन धर्म के मर्यादपुरुषोतम प्रभु श्रीराम के चरणों में अपनी ओजपूर्ण काव्यांजलि अर्पित कर देशभक्ति भावों से ओतप्रोत किए । रचनाकार अनमोल सिन्हा ने अपनी बेहतरीन गजल से एक शमा बांधकर लोगो को मंत्रमुग्ध होने पर विवश कर दिया। ठाकुर व्यास सिंह गुमसुम कोटमी सुनार (जांजगीर), डॉ. दुर्गा प्रसाद मेरसा गजलकार, मदन सिंह ठाकुर,(गीतकार एवं वरिष्ठ पत्रकार) हरीश पाण्डल, टेकचंद पाण्डल, श्याम रतन खांडे बी.ई.ओ. बलौदा ने काव्य पाठ किए।सभी रचनाकारों ने अपनी विधा अनुरूप शानदार काव्य पाठ कर कार्यक्रम को सफलता के शिखर पर स्थापित करने में अपनी महती भूमिका अदा किया। कार्यक्रम आयोजक श्री एस. एस. सूर्यवंशी एस. डी.ओ. बलौदा (अध्यक्ष – गुरुघासी दास वेलफेयर सोसाइटी मोपका)ने कार्यक्रम के अन्त में सभी के प्रति आभार व्यक्त किया।