बिलासपुर आरटीओ दफ्तर में अफसर नदारद! लाइसेंस बनवाने वालों की मुसीबतें बढ़ीं, शिकायत तक करनी पड़ रही दूसरे जिले में

 बिलासपुर। संभागीय मुख्यालय होते हुए भी बिलासपुर का आरटीओ दफ्तर बिना स्थायी अधिकारी के चल रहा है। स्थिति अब इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस जैसे जरूरी कामों के लिए भी भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

लाइसेंस बनवाने, ट्रांसफर या वाहन पंजीयन जैसे कार्यों के लिए आने वाले लोगों का कहना है आरटीओ में किसी प्रकार की समस्याएं हो जाती है आरटीओ अधिकारी दिखते ही नहीं हैं। कई दिनों तक चक्कर लगाने के बाद भी उनका काम नहीं हो पा रहा है।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जब नागरिक किसी उच्च अधिकारी से शिकायत करना चाहते हैं, तो उन्हें दूसरे जिले जाना पड़ेगा, यह अधिकारी इस जिले में कब बैठेगा उसका इंतजार करना पड़ेगा क्योंकि बिलासपुर में आरटीओ अधिकारी स्थायी रूप से नियुक्त ही नहीं है। दूसरे जिले के अधिकारी को प्रभार के रूप है मिली है जिम्मेदारी।

इस लापरवाही से न केवल आम जनता की सुविधा प्रभावित हो रही है, बल्कि पूरे संभागीय मुख्यालय की गरिमा पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। अब सवाल यह है कि आखिर कब तक बिलासपुर बिना अपने आरटीओ अधिकारी के रहेगा?

मिलावट का खेल साल भर चलता है पर लोगों को याद सिर्फ त्योहारों पर आता हैं 

बिलासपुर । दीपावली और अन्य त्योहारों का मौसम आते ही पूरा शहर मिठाइयों, दूध, पनीर और आटे की खरीदारी में जुट जाता है। लेकिन इससे जुड़ी एक कड़वी सच्चाई यह है कि लोगों को सबसे ज़्यादा मिलावटी सामान इन्हीं दिनों में मिलता है। हर साल खाद्य विभाग द्वारा छापेमारी के बावजूद शहर में मिलावटखोरी पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पाई है।

स्थानीय दुकानों में खुलेआम नकली दूध, पनीर और मिठाइयाँ बिकती हैं। उपभोक्ता स्वाद और परंपरा के मोह में इन्हें खरीदते भी हैं, लेकिन जाँच रिपोर्ट के अनुसार, इन्हीं उत्पादों में मिलावट और रासायनिक तत्वों की मात्रा सबसे अधिक पाई जाती है। त्योहारों के बाद सालभर यही लोग बीमारियों से जूझते रहते हैं — कभी पेट दर्द, कभी संक्रमण तो कभी लंबे समय की एलर्जी।

खाद्य विभाग के जांच भी सवाल के घेरे में 

सरकार द्वारा बनाया गया एक विभाग है खाद्य विभाग जिसे मिलावटी और अवैध कारोबार रोक अंकुश लगाना चाहिए परंतु विभाग का सुस्त रवैया जिससे मिलावट जोरों पर है।

लोगों की यह बड़ी समस्या है साल भर तक मिलावटी खाते हैं और इन्हें याद सिर्फ त्योहारों के समय आता है इसमें मिलावटी भी होती है ।

विशेषज्ञों का कहना है कि मिलावट की पहचान करना आसान नहीं है, फिर भी नागरिकों को सतर्क रहना चाहिए। घर पर बनी मिठाइयों को प्राथमिकता देने और भरोसेमंद विक्रेताओं से ही सामग्री खरीदने की सलाह दी जाती है।

श्रीराम रसोई में तोखन के जन्मदिवस पर चैंबर ऑफ कॉमर्स द्वारा सेवा कार्य खुशियों का डिब्बा वितरित कर बच्चों में बांटी गई मुस्कान

शहर में आज एक विशेष आयोजन के अंतर्गत श्रीराम रसोई में केंद्रीय राज्य मंत्री माननीय तोखन साहू  का जन्मदिवस अत्यंत श्रद्धा और सेवा भावना के साथ मनाया गया।* इस अवसर पर चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से भव्य भोजन सेवा का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ज़रूरतमंदों को भोजन कराया गया।
केंद्रीय राज्य मंत्री माननीय तोखन साहू जी की उपस्थिति में
साथ ही श्रीराम रसोई द्वारा तैयार किया गया विशेष दिवाली उपहार  खुशियों का डिब्बा  गरीब बच्चों को वितरित किया गया। इस उपहार को पाकर बच्चों के चेहरों पर जो मुस्कान देखने को मिली, वह इस आयोजन की सच्ची सफलता का प्रतीक बनी।

इस कार्यक्रम में चैंबर ऑफ कॉमर्स के प्रमुख सदस्यगण शामिल रहे, जिनमें विशेष रूप से
छत्तीसगढ़ चेम्बर् आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज बिलासपुर के अध्यक्ष, भगचंद बजाज,सचिव महितोष सराफ, कोषाध्यक्ष अविनाश आहूजा प्रदेश उपाध्यक्ष नवदीप अरोरा धीरज रोहरा घनश्याम केशरवानी कैप्टन गंभीर प्रदीप गुप्ता प्रकाश चावला सहित चेम्बर् के पदाधिकारी उपस्थित थे। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष नंदकुमार नायडू, मानस पांडे भी उपस्थित रहे
साथ ही, राजीव प्लाजा व्यापारी संघ के अध्यक्ष तेजपाल सिंह, नारायण दयालानी, सतीश लाल, कैलाश पेसवानी, शंकर राव एवं अन्य सदस्यगण ने भी कार्यक्रम में सक्रिय सहभागिता निभाई।

इस सेवा कार्य में श्रीराम रसोई की संपूर्ण टीम ने सक्रिय योगदान दिया। प्रमुख संयोजकों में
राजीव अग्रवाल, पूनम अग्रवाल, राजकुमार अग्रवाल, दिनेश पिल्ले सहित अन्य सदस्य विशेष रूप से उपस्थित रहे और आयोजन की सफलता सुनिश्चित की।
चेम्बर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्रीज बिलासपुर इकाई व श्रीराम रसोई द्वारा आयोजित कार्यक्रम की माननीय तोखन साहू  ने भी बहुत सराहना की

केन्द्रीय मंत्री  तोखन ने बिलासपुर विमान सेवाओं के विस्तार हेतु नागरिक उड्डयन मंत्री से सौजन्य भेंट

आज भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्री एवं देश के सबसे युवा कैबिनेट सदस्य श्री किंजरापु राममोहन नायडू जी से केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने नई दिल्ली में मुलाकात हुई

भेंट के दौरान बिलासपुर हवाई अड्डे से संचालित उड़ान सेवाओं के विस्तार और सुचारू संचालन से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। वर्तमान में बिलासपुर से उड़ान सेवाएं सप्ताह में 5 दिन संचालित की जा रही हैं, जबकि पूर्व में यह सेवा सप्ताह के सातों दिन उपलब्ध थी।

श्री साहू ने नागरिक उड्डयन मंत्री महोदय से आग्रह किया कि बिलासपुर क्षेत्र की बढ़ती यात्री मांग, औद्योगिक गतिविधियों, छात्रों और व्यापारिक समुदाय की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उड़ान सेवाओं को पुनः दैनिक संचालन (Daily Operations) के रूप में बहाल किया जाए।

नायडू  ने श्री साहू द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त किया

छात्र राजनीति से कांग्रेस नेतृत्व तक, रविंद्र सिंह ने जताई जिला ग्रामीण अध्यक्ष पद की दावेदारी

बिलासपुर । जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष पद हेतु रविंद्र सिंह ने किया दावेदारी। रविन्द्र सिंह छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय है । बिलासपुर संभाग के सबसे बड़े महाविद्यालय सीएमडी कॉलेज के छात्र संघ सचिव के बाद भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन के गुरु घसीदास विश्वविद्यालय के अध्यक्ष बने । छात्र संगठन में श्री सिंह  के पकड़ व मजबूती को देखते हुए उनको एन एस यूआई जिला ग्रामीण अध्यक्ष का दायित्व सौपा गया। उसके बाद लगातार तीन बार बिलासपुर नगर निगम में पार्षद के रूप में जनता का वे सेवा किये।वहीं नेता प्रतिपक्ष के रूप में भी उन्होंने सदन में लगातार जनता के समस्याओं को समय-समय पर उठाते रहे हैं। बिलासपुर जिला ग्रामीण सचिव के रूप में उत्तरदायित्व मिला‌ जिसको पूरा करते हुये। बिलासपुर जिला शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने और नगर के विभिन्न समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरकर आंदोलन कर जनता के साथ हमेशा खड़े रहे। रविन्द्र सिंह ठाकुर के संगठन के प्रति समर्पण की भावना को देखते हुए छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सचिव बनाया गया उसके बाद सरकार में छत्तीसगढ़ योग आयोग के सदस्य के रूप में जिम्मेदारी दी गई। निश्चित ही श्री सिंह को बिलासपुर जिला ग्रामीण की जिम्मेदारी दी जाती है तो संगठन को एक नई मजबूती मिलेगी।

त्रिलोक की जिला कांग्रेस (ग्रामीण) अध्यक्ष पद पर दावेदारी से कार्यकर्ताओं में अभूतपूर्व उत्साह

बिलासपुर। जिले के लोकप्रिय, सक्रिय, ऊर्जावान कांग्रेसी नेता त्रिलोक चंद्र श्रीवास, राष्ट्रीय समन्वयक – अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी, प्रभारी – उत्तर प्रदेश तथा गुजरात, सचिव, प्रदेश कांग्रेस कमेटी छत्तीसगढ़, मार्गदर्शक- जिला पंचायत सदस्य क्षेत्र क्रमांक- 3 बिलासपुर, ने जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण में अध्यक्ष पद हेतु दावेदारी करने का निर्णय लिया है, आज बिलासपुर जिले के विभिन्न विधानसभा ब्लाक से सैकड़ो के तादाद में उनके सहयोगी और कांग्रेस नेताओं ने उनके निवास पहुंचकर उन्हें जिला कांग्रेस कमेटी बिलासपुर ग्रामीण अध्यक्ष हेतु नियुक्त पर्यवेक्षक के समक्ष मजबूत दावेदारी पेश करने का अनुरोध किया,, जिस पर जिस पर त्रिलोक श्रीवास ने बिलासपुर जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष हेतु दावेदारी प्रस्तुत करने का निर्णय लिया है, विदित हो कि  त्रिलोक चंद्र श्रीवास कांग्रेस पार्टी में विगत 30 वर्षों से ज्यादा समय से सक्रिय है, एवं कांग्रेस पार्टी के जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर के दर्जनों पद पर रहकर कार्य कर चुके हैं, बेलतरा विधानसभा क्षेत्र से विगत पांच चुनाव से मजबूत दावेदार रहे हैं, हाल ही में संपन्न महापौर चुनाव में भी कांग्रेस उम्मीदवार के लिए उनका नाम मजबूती से चला था, बिलासपुर जिले में लगातार 24 घंटे कांग्रेस पार्टी में अन्य सामाजिक कार्यों में त्रिलोक श्रीवास सक्रिय रहते हैं, वह पूर्व में भी जिला किसान कांग्रेस, जिला नगरी निकाय कांग्रेस, जिला राजीव गांधी पंचायत संगठन, झुग्गी झोपड़ी प्र. ईंटक,मे जिला अध्यक्ष और युवा कांग्रेस आदि में पदाधिकारी रहे हैं, पिछड़ा वर्ग में वह प्रदेश कांग्रेस से संयोजक भी रह चुके हैं, वर्तमान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पि. व. विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक एवं उत्तर प्रदेश तथा गुजरात के प्रभारी हैं, सर्वसेन समाज के प्रदेश अध्यक्ष भी हैं, श्री त्रिलोक चंद्र श्रीवास, एवं उनके परिवार ने लगभग दो दर्जन चुनाव (एक चुनाव छोड़कर) लगातार जीते हैं,  जिले में प्रत्येक ब्लॉक और विधानसभा में उनके समर्थकों, चाहने वालों की पर्याप्त संख्या मौजूद है, त्रिलोक चंद्र श्रीवास के जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष हेतु दावेदारी करने से जिले में उनके सहयोगियों सहित कांग्रेस कार्यकर्ताओं में अपार उत्साह का वातावरण निर्मित हुआ है, आम कार्यकर्ताओं में यह बात चर्चा चल रही है कि यदि  त्रिलोक श्रीवास की नियुक्ति जिला अध्यक्ष रूप में होती है, तो कांग्रेस संगठन जिले में सशक्त रूप से मजबूत होगा, और ग्रामीण क्षेत्र के जनाधार वाले आम कार्यकर्ताओं को जिला कांग्रेस मे भरपुर प्रतिनिधित्व मिलेगा।

पीएम सूर्यघर योजना: बिलासपुरवासियों को मुफ्त बिजली से बड़ी राहत

बिलासपुर । पीएम सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना से जिलेवासियों को बिजली बिल में बड़ी राहत मिल रही है। योजना के अंतर्गत लगवाए गए सोलर पैनल से बिजली बिल या तो शून्य हो गया है या बहुत कम रह गया है। इसके साथ ही पर्यावरण संरक्षण और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिल रहा है।

 योजना से मिली आर्थिक राहत

शहर के राधिका विहार फेस 2 निवासी क्रांति कुमार शर्मा ने बताया कि उन्होंने एक साल पहले 5 किलोवॉट का सोलर पैनल लगवाया। पहले उनका बिजली बिल लगभग 6 हजार रुपए प्रतिमाह आता था, लेकिन अब यह बिल शून्य हो गया है। सोलर पैनल लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार से उन्हें सब्सिडी भी मिली।

इसी तरह, गुरमुख दास मूलचंदानी ने अपने पिताजी के नाम पर सोलर पैनल स्थापित करवाया। पहले उनके बिल 5 हजार रुपए प्रतिमाह आते थे, अब बिल शून्य हो गया है।

 योजना की विशेषताएँ

एक बार निवेश**, 25 वर्षों तक सतत बिजली आपूर्ति।
कोई विशेष मेंटेनेंस खर्च नहीं।
अतिरिक्त बिजली को ग्रिड में सप्लाई कर आय अर्जित करने का अवसर।
केंद्र सरकार से 78 हजार रुपये तक और राज्य सरकार से 30 हजार रुपये तक सब्सिडी।
सरकार द्वारा 300 यूनिट प्रतिमाह मुफ्त बिजली** प्रदान की जा रही है।

वैभव कुमार अग्रवाल ने बताया कि योजना से उन्हें बिल में बड़ी राहत मिली है और यह पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पीएम सूर्यघर योजना से न केवल आर्थिक बचत होती है बल्कि यह ऊर्जा आत्मनिर्भरता और नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा देती है।

बिहार रेलवे लाइन डबल ट्रैकिंग और CSIR क्षमता निर्माण योजना मंजूर

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बिहार में बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया एकल रेलवे लाइन खंड (104 किमी) के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान की, जिसकी कुल लागत लगभग 2,192 करोड़ रुपये है।

यह परियोजना बिहार राज्य के चार जिलों को कवर करेगी और भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 104 किलोमीटर की वृद्धि रहेगी।

यह रेल मार्ग राजगीर (शांति स्तूप), नालंदा, पावापुरी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्‍थलों को जोड़ता है, जो देश भर से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

इस मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 1,434 गांवों और लगभग 13.46 लाख आबादी, जिसमें दो आकांक्षी जिलें (गया और नवादा) शामिल हैं, की कनेक्टिविटी बढ़ेगी।

ये मार्ग कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, फ्लाई ऐश आदि वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्‍यक है। क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 26 मिलियन टन प्रति वर्ष की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। रेलवे पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन साधन होने के नाते देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और रसद लागत को कम करने में मदद करेगा, साथ ही तेल आयात (5 करोड़ लीटर) को घटाएगा और सीओ2 उत्सर्जन (24 करोड़ किलोग्राम) को कम करेगा, जो एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

बढ़ी हुई लाइन क्षमता से गतिशीलता में सुधार होगा तथा भारतीय रेल की कार्यकुशलता और सेवा विश्वसनीयता बढ़ेगी। मल्टी-ट्रैकिंग का यह प्रस्ताव परिचालन को सुगम बनाएगा और भीड़ को कम करेगा, जिससे भारतीय रेलवे की सबसे व्यस्त खंडों पर आवश्यक बुनियादी ढांचागत विकास होगा। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘नए भारत’ के विज़न के अनुरूप हैं, जो इस क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से “आत्मनिर्भर” बनाएंगी, जिससे  उनके रोज़गार/स्वरोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने पंद्रहवें वित्त आयोग 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए 2277.397 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास” पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग/वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (डीएसआईआर/सीएसआईआर) योजना को मंजूरी दे दी है।

इस योजना में सीएसआईआर द्वारा कार्यान्वित की जा रही है और देश भर के सभी अनुसंधान एवं विकास संस्थान, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, प्रतिष्ठित संस्थान और विश्वविद्यालय शामिल किए जाएंगे। यह पहल विश्वविद्यालयों, उद्योग, राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों में करियर बनाने के इच्छुक युवा, उत्साही शोधकर्ताओं के लिए एक व्यापक मंच प्रदान करती है। प्रख्यात वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों के मार्गदर्शन में, यह योजना विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग, चिकित्सा और गणितीय विज्ञान (एसटीईएमएम) के विकास को बढ़ावा देगी।

क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास योजना, प्रति दस लाख जनसंख्या पर शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ाकर, भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के स्‍थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस योजना ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में क्षमता निर्माण और उच्च-गुणवत्ता वाले मानव संसाधनों के भंडार का विस्तार करके अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है।

पिछले दशक के दौरान भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) के लिए किए गए समन्वित प्रयासों से, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) की रैंकिंग के अनुसार, भारत ने 2024 में वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) में अपनी स्थिति सुधारकर 39वीं रैंक प्राप्त कर ली है, जो भारत के प्रधानमंत्री के दूरदर्शी मार्गदर्शन में निकट भविष्य में और भी बेहतर होगी। सरकार द्वारा अनुसंधान एवं विकास को दिए गए सहयोग के परिणामस्वरूप, एनएसएफ, यूएसए के आंकड़ों के अनुसार, भारत अब वैज्ञानिक शोधपत्र प्रकाशनों के मामले में शीर्ष तीन में शामिल है। डीएसआईआर की योजना हजारों शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान कर रही है, जिनके परिणामों ने भारत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस अनुमोदन ने सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना कार्यान्वयन के माध्यम से सीएसआईआर की भारतीय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान को दी गई 84 वर्षों की सेवा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्रदान की है जो वर्तमान और भावी पीढ़ियों में देश की अनुसंधान एवं विकास प्रगति को गति प्रदान करती है। सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास (सीबीएचआरडी)” की चार उप-योजनाएँ हैं, जैसे (i) डॉक्टरेट और पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप (ii) एक्स्ट्राम्‍यूरल रिसर्च स्कीम, एमेरेटस साइंटिस्ट स्कीम और भटनागर फेलोशिप कार्यक्रम; (iii) पुरस्कार योजना के माध्यम से उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और मान्यता प्रदान करना; और (iv) यात्रा और संगोष्ठी अनुदान योजना के माध्यम से ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना।

यह पहल एक मजबूत अनुसंधान एवं विकास संचालित नवाचार इकोसिस्‍टम के निर्माण और 21वीं सदी में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय विज्ञान को तैयार करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एकीकृत योजना और हितधारक परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाने पर केन्‍द्रीत है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।

कैबिनेट ने 2277.397 करोड़ रुपये की डीएसआईआर योजना ‘क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास’ को मंजूरी दी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने पंद्रहवें वित्त आयोग 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए 2277.397 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास” पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग/वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (डीएसआईआर/सीएसआईआर) योजना को मंजूरी दे दी है।

इस योजना में सीएसआईआर द्वारा कार्यान्वित की जा रही है और देश भर के सभी अनुसंधान एवं विकास संस्थान, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, प्रतिष्ठित संस्थान और विश्वविद्यालय शामिल किए जाएंगे। यह पहल विश्वविद्यालयों, उद्योग, राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों में करियर बनाने के इच्छुक युवा, उत्साही शोधकर्ताओं के लिए एक व्यापक मंच प्रदान करती है। प्रख्यात वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों के मार्गदर्शन में, यह योजना विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग, चिकित्सा और गणितीय विज्ञान (एसटीईएमएम) के विकास को बढ़ावा देगी।

क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास योजना, प्रति दस लाख जनसंख्या पर शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ाकर, भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के स्‍थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस योजना ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में क्षमता निर्माण और उच्च-गुणवत्ता वाले मानव संसाधनों के भंडार का विस्तार करके अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है।

पिछले दशक के दौरान भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) के लिए किए गए समन्वित प्रयासों से, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) की रैंकिंग के अनुसार, भारत ने 2024 में वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) में अपनी स्थिति सुधारकर 39वीं रैंक प्राप्त कर ली है, जो भारत के प्रधानमंत्री के दूरदर्शी मार्गदर्शन में निकट भविष्य में और भी बेहतर होगी। सरकार द्वारा अनुसंधान एवं विकास को दिए गए सहयोग के परिणामस्वरूप, एनएसएफ, यूएसए के आंकड़ों के अनुसार, भारत अब वैज्ञानिक शोधपत्र प्रकाशनों के मामले में शीर्ष तीन में शामिल है। डीएसआईआर की योजना हजारों शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान कर रही है, जिनके परिणामों ने भारत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस अनुमोदन ने सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना कार्यान्वयन के माध्यम से सीएसआईआर की भारतीय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान को दी गई 84 वर्षों की सेवा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्रदान की है जो वर्तमान और भावी पीढ़ियों में देश की अनुसंधान एवं विकास प्रगति को गति प्रदान करती है। सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास (सीबीएचआरडी)” की चार उप-योजनाएँ हैं, जैसे (i) डॉक्टरेट और पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप (ii) एक्स्ट्राम्‍यूरल रिसर्च स्कीम, एमेरेटस साइंटिस्ट स्कीम और भटनागर फेलोशिप कार्यक्रम; (iii) पुरस्कार योजना के माध्यम से उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और मान्यता प्रदान करना; और (iv) यात्रा और संगोष्ठी अनुदान योजना के माध्यम से ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना।

यह पहल एक मजबूत अनुसंधान एवं विकास संचालित नवाचार इकोसिस्‍टम के निर्माण और 21वीं सदी में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय विज्ञान को तैयार करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मिशन नीव के तहत राष्ट्रीय पोषण माह का आयोजन

भोपाल। मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में मिशन नीव कार्यक्रम के अंतर्गत राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर ECCE थीम पर आधारित कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों में पपेट शो, स्टोरी टेलिंग, गतिविधि आधारित शिक्षण और अभिभावक बैठक जैसी महत्वपूर्ण गतिविधियाँ शामिल थीं। इन आयोजनों का उद्देश्य प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा (ECCE) के माध्यम से बच्चों के समग्र विकास को बढ़ावा देना था। मध्यप्रदेश के अलग-अलग जिलों में हुए इन कार्यक्रमों में समुदाय की सक्रिय भागीदारी देखी गई।