jalbharav-samasya : बरसात में जलभराव से निजात के लिए स्थायी समाधान जरूरी : नेता प्रतिपक्ष भरत

Bilaspur Barish Jalbharav Samasya एक बार फिर सामने आई है। तेज बरसात से शहर के कई वार्डों में पानी भर गया, जिससे लोगों का जनजीवन प्रभावित हुआ। इसी पर नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप ने नगर निगम से स्थायी समाधान निकालने की मांग की है।

बिलासपुर। शहर में हुई लगातार बारिश के बाद कई वार्डों में जलभराव की स्थिति बनने पर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष भरत कश्यप ने निगम प्रशासन को गंभीर कदम उठाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर बाढ़ से बचाव और पानी निकासी की समस्या का स्थायी समाधान होना चाहिए।

भरत कश्यप ने सुझाव दिया कि जिन इलाकों में हर साल पानी भरता है, वहां तकनीकी टीम से सर्वे कराकर नालियों और नालों का निर्माण किया जाए। ताकि आने वाले वर्षों में बारिश के समय नागरिकों को बार-बार जलभराव का सामना न करना पड़े।

हर साल दोहराई जाती है समस्या

कश्यप ने कहा कि बारिश के बाद नगर निगम प्रशासन पानी निकासी पर कोई ठोस योजना नहीं बनाता। परिणामस्वरूप हर साल वही स्थिति दोहराई जाती है। हाल ही में हुई तेज बारिश में कई मोहल्लों में 2000 से अधिक घरों में पानी घुस गया, कच्चे मकान ढह गए और झुग्गी बस्तियों के लोग सड़क पर आ गए।

इन इलाकों में जलभराव की समस्या

नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि पुराना बस स्टैंड, श्रीकांत वर्मा मार्ग, विनोबा नगर, लिंक रोड, तोरवा, देवरी खुर्द, अरविंद नगर, बंधवा पारा, जोरा पारा, नेहरू नगर, कस्तूरबा नगर और पत्रकार कॉलोनी सहित कई इलाके हर साल बाढ़ जैसी स्थिति झेलते हैं। इन क्षेत्रों में नालों और कलवर्ट का वैज्ञानिक ढंग से निर्माण जरूरी है।

सभी दलों को साथ आने का आग्रह

भरत कश्यप ने कहा कि भाजपा और कांग्रेस दोनों की सरकारों के दौरान नालों पर करोड़ों रुपये खर्च हुए, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं निकल सका। उन्होंने महापौर और निगम प्रशासन से अपील की कि सभी पार्षदों और इंजीनियरों की बैठक बुलाकर, सर्वे कराकर ठोस कार्ययोजना बनाई जाए।

उन्होंने कहा – “जब शहर में ट्रिपल इंजन की सरकार है तो उसका फायदा जनता को मिलना चाहिए। दलगत राजनीति छोड़कर ज्वाली नाला की तर्ज पर स्थायी व्यवस्था हो, तभी शहर स्वच्छ और सुंदर बन पाएगा।”

PM Viksit Bharat Rozgar प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना देगी युवा शक्ति के सपनों को नई उड़ान

PM Viksit Bharat Rozgar : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘प्रधानमंत्री विकसित भारत रोज़गार योजना’ की घोषणा की, जो देश के युवाओं को नई उड़ान देने वाली ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। 1 लाख करोड़ रुपये के परिव्यय वाली यह योजना 3.5 करोड़ से अधिक रोज़गार सृजित करने का लक्ष्य रखती है और इसमें पहली बार नौकरी करने वालों के साथ-साथ नियोक्ताओं को भी प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। इसके जरिए न केवल औपचारिकीकरण और सामाजिक सुरक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में एक मजबूत आधार भी तैयार होगा।

डॉ. मनसुख मांडविया केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री, भारत सरकार

भारत की विकास गाथा हमेशा से उसकी श्रम शक्ति द्वारा लिखी गई है। देश की अर्थव्यवस्था को गति देने में करोड़ों श्रमिकों के समर्पण और क्षमता की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, पिछले 11 वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति ने उल्लेखनीय प्रगति की है। वर्ष 2014 में, भारत विश्व की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ते हुए आज चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। भारत ने वैश्विक पटल पर अपने लिए एक उल्लेखनीय स्थान बनाया है और इसमें इसके मानव संसाधन की शक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
इस सफलता की कहानी को बल देने वाला तथ्य यह है कि भारत के आर्थिक विकास के साथ-साथ रोजगार का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। आरबीआई-केएलईएमएस के अनुसार, जहां 2004-2014 के बीच केवल 2.9 करोड़ रोजगार सृजित हुए थे, उसके बाद के दशक में 17 करोड़ से अधिक रोजगार सृजित हुए। औपचारिकीकरण में भी तेजी आई है, ईपीएफओ के आंकड़ों के अनुसार पिछले सात वर्षों में लगभग आठ करोड़ नौकरियां सृजित हुई हैं।
भारत में सामाजिक सुरक्षा कवरेज में बढ़तोरी होना भी हमारी एक बड़ी उपलब्धि है। 2015 में, केवल 19 प्रतिशत भारतीय कम से कम एक सामाजिक सुरक्षा योजना के अंतर्गत आते थे। 2025 तक, यह संख्या बढ़कर 64.3 प्रतिशत हो चुकी है और 94 करोड़ लाभार्थी इसके दायरे में आए हैं, जिससे भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा सामाजिक सुरक्षा कवरेज देने वाला देश बन गया है। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने इस उपलब्धि को वैश्विक स्तर पर कवरेज के सबसे तेज विस्तार में से एक माना है।
यह स्पष्ट है कि राष्ट्र का भविष्य न केवल जीडीपी वृद्धि की गति से, बल्कि हमारे द्वारा सृजित नौकरियों की गुणवत्ता, श्रमिकों को दी जाने वाली सुरक्षा और अपने युवाओं को प्रदान किए जाने वाले अवसरों से भी तय होगा। बढ़ते स्वचालन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से कारण बनी अनिश्चितता की स्थिति, आपूर्ति-श्रृंखला में बदलाव और दुनिया भर में नौकरियों को आकार देने वाली कई अन्य कमजोरियों की वैश्विक पृष्ठभूमि में, भारत एक जनसांख्यिकीय परिवर्तन के बिंदु पर खड़ा है।
हमारी 65 प्रतिशत आबादी 35 वर्ष से कम आयु की है, जो एक महत्वपूर्ण जनसांख्यिकीय लाभांश है जो हमारी अर्थव्यवस्था को गति दे देता है, जबकि पश्चिमी देशों में आबादी वृद्ध होती हो रही है। वर्षों से, भारत के जनसांख्यिकीय लाभांश यानी इसकी युवा शक्ति को इसकी सबसे बड़ी ताकत माना जाता रहा है। फिर भी, पिछली सरकारों के अधीन, इस क्षमता का पूरा उपयोग नहीं किया गया। अमृत काल में, जब हम 2047 तक एक विकसित भारत के विजन की दिशा में प्रयास कर रहे हैं, हमारे सामने कार्य स्पष्ट है: हमें “संभावना” से “समृद्धि” की ओर बढ़ना होगा।
इस पृष्ठभूमि में, रोजगार अब केवल एक आर्थिक संकेतक नहीं रह गया है; यह सम्मान, समानता और राष्ट्रीय शक्ति का आधार है। इसके लिए आवश्यक है कि हम अपने युवाओं को रोजगार योग्य बनाएं, उन्हें औपचारिक अर्थव्यवस्था में एकीकृत करें, उन्हें वित्तीय साक्षरता से लैस करें और यह सुनिश्चित करें कि वे एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा प्रणाली द्वारा सुरक्षित हों। तभी हमारा जनसांख्यिकीय लाभ वास्तव में एक स्थायी राष्ट्रीय लाभांश में परिवर्तित हो सकता है।
इसी चुनौती का समाधान करने और आकांक्षा व अवसर के बीच के अंतर को पाटने के लिए, 15 अगस्त को लाल क़िले की प्राचीर से प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना शुरू करने की घोषणा की है। शुरुआत में केंद्रीय बजट 2024-25 में प्रस्तुत और प्रधानमंत्री जी के अपने 12वें स्वतंत्रता दिवस संबोधन में घोषित यह योजना पैमाने और डिजाइन, दोनों ही दृष्टि से एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करती है। 1 लाख करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ, यह भारत के इतिहास का सबसे महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है, जिससे 3.5 करोड़ से ज़्यादा रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। इनमें से दो करोड़ लाभार्थी पहली बार नौकरी पाने वाले होंगे।
योजना के दो स्तंभ: पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों को प्रोत्साहन और नियोक्ताओं को सहायता
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना को इसकी संरचना ही अलग बनाती है। रोजगार सृजन को बढ़ावा देने वाले पहले के कार्यक्रमों के विपरीत, यह योजना युवाओं की रोजगार क्षमता और उद्यम प्रतिस्पर्धात्मकता की दोहरी चुनौती का एक साथ समाधान करती है। भाग ‘ए’ के तहत पहली बार नौकरी करने वाले कर्मचारियों (दो किश्तों में 15,000 रुपए तक) और भाग ‘बी’ के तहत नियोक्ताओं (प्रत्येक नए कर्मचारी के लिए प्रति माह 3,000 रुपए तक) को प्रत्यक्ष वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करके, यह श्रमिकों के लिए प्रवेश बाधाओं को कम करता है और साथ ही व्यवसायों के लिए नियुक्ति जोखिम को भी कम करता है।
इस योजना का औपचारिकीकरण और सामाजिक सुरक्षा एकीकरण की दिशा में प्रोत्साहन भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसके लाभ प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से प्रदान किए जाएंगे, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित होगी और नए कर्मचारियों को पहले दिन से ही सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों से जोड़ा जा सकेगा। इस प्रकार, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना, एक औपचारिक, सुरक्षित और उत्पादक श्रम बाजार की ओर एक संरचनात्मक कदम है। इसके अलावा, विनिर्माण क्षेत्र में नियोक्ताओं को प्रोत्साहन पर अतिरिक्त ध्यान, भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और प्रयास है।
समावेशी और सतत विकास को गति देना
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना, योजना-आधारित पहलों से हटकर एक व्यापक रोजगार प्रणाली की ओर बदलाव का संकेत देती है। यह पूर्व की पहलों से मिली सीख पर आधारित है, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई), राष्ट्रीय विनिर्माण मिशन और मेक इन इंडिया जैसी वर्तमान योजनाओं का पूरक है और प्रतिस्पर्धी वैश्विक व्यवस्था में काम की बदलती प्रकृति को पहचानती है।
श्रमिकों और नियोक्ताओं, दोनों को प्रोत्साहन देकर, प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना यह मान्यता देती है कि रोजगार सृजन एक साझा जिम्मेदारी है। भारत डिजिटल नवाचार को अपनाते हुए एक वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनने का प्रयास कर रहा है, इसलिए यह योजना सुनिश्चित करती है कि कोई भी पीछे न छूटे – यहां तक कि सबसे छोटा उद्यम और कार्यबल में शामिल होने वाला सबसे नया व्यक्ति भी राष्ट्रीय विकास की यात्रा में भागीदार बने।
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना: नए भारत की नींव
प्रधानमंत्री विकसित भारत रोजगार योजना एक नीतिगत घोषणा से कहीं अधिक बढ़कर है। यह जनसांख्यिकीय लाभांश को सार्वजनिक समृद्धि में बदलने की दिशा में एक ठोस कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, यह पहल विकसित भारत के विजन को साकार करने की नींव का हिस्सा है, जहां हर युवा को सार्थक रोजगार मिले, हर काम में सम्मान हो और हर युवा को अपने सपनों को साकार करने का अवसर मिले।
रोजगार निर्माण सही मायने में राष्ट्र निर्माण है। इस पहल के साथ, मोदी सरकार अपनी इस प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ रही है कि कोई भी आकांक्षा अधूरी नहीं रहेगी और कोई भी युवा अवसर से वंचित नहीं रहेगा। हम सब मिलकर भारत की युवा शक्ति को नई उड़ान दे रहे हैं और उनके माध्यम से, विकसित भारत के सपने को भी नई गति प्रदान कर रहे हैं।

Gaganyaan : ‘2035 तक भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन होगा’

Gaganyaan   : भारत अंतरिक्ष अन्वेषण के नए युग की ओर बढ़ रहा है। केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि गगनयान मिशन न सिर्फ मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं की पुनः पुष्टि करेगा, बल्कि 2035 तक भारत के अपने अंतरिक्ष स्टेशन की नींव भी रखेगा। इससे भारत वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय में अग्रणी भूमिका निभाएगा और वैज्ञानिक अनुसंधान से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक नई संभावनाएँ खुलेंगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा केंद्रीय मंत्री : केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह का कहना है भारत की अंतरिक्ष आकांक्षाओं को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित होगा, जो उसकी मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमताओं की पुनः पुष्टि करेगा और पृथ्वी के लिए लाभकारी अनुप्रयोगों सहित वैज्ञानिक ज्ञान में वृद्धि करेगा।
प्रश्न: भारत के अंतरिक्ष भविष्य के लिए गगनयान का सबसे बड़ा परिणाम क्या होगा?
उत्तर:अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत का उदय पहले ही हो चुका है और इसे वैश्विक स्त्र पर स्वीककार किया गया है। अब हम अनुयायी मात्र नहीं हैं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में समान भागीदार हैं। गगनयान मिशन एक और निर्णायक मोड़ का प्रतीक होगा। यह न केवल मानव अंतरिक्ष उड़ान में भारत की क्षमताओं की पुन:पुष्टि करेगा, बल्कि हमारे वैज्ञानिक ज्ञान में भी वृद्धि करेगा। अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन में अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला द्वारा सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण या माइक्रोग्रेविटी, कृषि और जीवन विज्ञान पर किए गए प्रयोगों के साथ-साथ, यह मिशन पृथ्वी पर अनुप्रयोगों के बारे में जानकारी प्रदान करेगा। यह भारत को अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी देश के रूप में स्थापित करेगा, जबकि हम बुनियादी ढाँचे, विकास और जीवन को सुगम बनाने के लिए अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का उपयोग जारी रखेंगे।
प्रश्न: शुक्ला जैसे युवा अंतरिक्ष यात्रियों के आने से, हमारी मानव अंतरिक्ष यात्रा को आकार देने में युवाओं की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है?
उत्तर:अंतरिक्ष सहित हर क्षेत्र में भारत के भविष्य के लिए युवा अपरिहार्य हैं। हमारी 70 प्रतिशत से अधिक आबादी 40 वर्ष से कम आयु की है, इसलिए स्वाभाविक रूप से, वे विकसित भारत के पथप्रदर्शक हैं। अंतरिक्ष में, शारीरिक और मानसिक अनुकूलनशीलता की आवश्यकता के कारण युवाओं को बढ़त हासिल है। उदाहरण के लिए, गगनयान के लिए प्रशिक्षित चार अंतरिक्ष यात्रियों में, शुभांशु सबसे कम उम्र के थे और यह बात लाभदायकरही। अंतरिक्ष मिशनों के लिए त्वरित अनुकूलन की आवश्यकता होती है, जिसे युवा अधिक कुशलता से संभाल सकते हैं।
प्रश्न:क्या आपको लगता है कि गगनयान वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और महिला अंतरिक्ष यात्रियों के लिए संभावनाओं के द्वार खोलेगा?
उत्तर:जी बिल्कुल। अंतरिक्ष विज्ञान में पुरुषों और महिलाओं के बीच कोई भेद नहीं है। 15 अगस्त, 2018 कोजब प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पहली बार गगनयान की घोषणा की थी, तो उन्होंने कहा था कि भारत का एक बेटा या बेटी अंतरिक्ष में जाएंगे । वर्तमान में, चयनित चार अंतरिक्ष यात्री पुरुष हैं,वे वायु सेना से हैंऔरइसका कारण मुख्यतः उनका उन्नत प्रशिक्षण प्राप्तन होना है। लेकिन आगे चलकर, वायु सेना से बाहर के अंतरिक्ष यात्रियों को भी शामिल किया जाएगा, जिनमें महिलाएँ भी होंगी। वैश्विक स्तर पर, महिलाएँ अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी रही हैं। भारत में भी, इसरो की कई परियोजनाओं का नेतृत्व महिला वैज्ञानिकों ने किया है, चाहे वह चंद्रयान हो, आदित्य हो या अन्य।
प्रश्न: क्या गगनयान भारत के लिए अंतर्राष्ट्रीय मानवयुक्त अंतरिक्ष यान मिशनों में शामिल होने या अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने का मार्ग प्रशस्त करेगा?
उत्तर:भारत 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन नामक स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने वाला है। प्रधानमंत्री ने “सुदर्शन सुरक्षा चक्र” का भी उल्लेख किया है, जहाँ अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी राष्ट्रीय सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। इसलिए, 2035 एक युगांतकारी वर्ष होगा… उसके पाँच साल बाद, भारत का लक्ष्य चंद्रमा की सतह पर मानव सहित मिशन भेजना है।
प्रश्न: भारत सेमीकंडक्टर और एआई तकनीकों में प्रगति कर रहा है, ऐसे में सरकार भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन जैसी परियोजनाओं के लिए सेमीकंडक्टर मिशन को अंतरिक्ष-स्तरीय आवश्यकताओं के साथ कैसे जोड़ रही है?
उत्तर:सेमीकंडक्टरों के व्यापक अनुप्रयोग होंगे, जिनमें अंतरिक्ष मिशन भी शामिल हैं। इसी प्रकार, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर न केवल पृथ्वी के घने या दुर्गम क्षेत्रों में, बल्कि लंबी अवधि के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी महत्वपूर्ण होंगे। ये तकनीकें अंतरिक्ष स्टेशन जैसी भविष्य की परियोजनाओं को बनाए रखने में महत्वपूर्ण होंगी।
प्रश्न:चंद्रमा या मंगल मिशन के दौरान आप भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को किस प्रकार के प्रयोग करते देखना चाहेंगे?
उत्तर:हाल के मिशन में, प्रयोगों को सात श्रेणियों में बांटा गया था। जीवन विज्ञान विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। उदाहरण के लिए, मायोजेनेसिस—सूक्ष्मगुरुत्व या माइक्रोग्रेविटी में मांसपेशियों के क्षय और पुनर्जनन—का अध्ययन कैंसर, मधुमेह या यहाँ तक कि पृथ्वी पर फ्रैक्चर से उबरने जैसी स्थितियों के लिए सीधे तौर पर प्रासंगिक है। एक अन्य समूह ने लंबे समय तक स्क्रीन के संपर्क में रहने के संज्ञानात्मक प्रभावों का अध्ययन किया, जो आज के डिजिटल युग में अत्यधिक प्रासंगिक है। हमने सूक्ष्मगुरुत्व या माइक्रोग्रेविटीमें मेथी जैसे पौधे उगाने का भी प्रयोग किया, जो पुनर्योजी जीव विज्ञान और आनुवंशिक अनुप्रयोगों से संबंधित अनुसंधान में सहायक हो सकता है।
मुख्य बात यह है कि अंतरिक्ष प्रयोग केवल कक्षा में मौजूद अंतरिक्ष यात्रियों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पृथ्वी पर लोगों के लिए भी लाभकारी हैं और ‘विश्वगुरु भारत’ के विचार को आगे बढ़ाते हैं।
प्रश्न: स्पैडेक्स के बाद, भारत वैश्विक ग्राहकों के लिए अंतरिक्ष डॉकिंग और उपग्रह सेवा का मुद्रीकरण कब शुरू करेगा?
उत्तर:हमने स्पैडेक्स के माध्यम से डॉकिंग और अनडॉकिंग का अनुभव प्राप्त करना शुरू कर दिया है। आगामी चंद्रयान-4 मिशन, जो 2028 के आसपास अपेक्षित है, में जटिल डॉकिंग और अनडॉकिंग प्रक्रियाएँ करने वाले कई मॉड्यूल शामिल होंगे। इससे हमें अंतरिक्ष स्टेशन जैसी बड़ी परियोजनाओं के लिए आवश्यक विशेषज्ञता प्राप्त होगी। अंतरिक्ष पर्यटन व्यवहार्य होते ही, डॉकिंग तकनीक यात्री सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण होगी। समय के साथ, भारत द्वारा वैश्विक ग्राहकों के लिए डॉकिंग, सर्विसिंग और पर्यटन संबंधी बुनियादी ढाँचा प्रदान करने के साथ ही मुद्रीकरण भी होगा।
प्रश्न: भारत सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से पाँच वर्षों में 52 जासूसी उपग्रह प्रक्षेपित करने की योजना बना रहा है। ऐसे सहयोगों से राष्ट्रीय सुरक्षा कैसे सुनिश्चित होगी?
उत्तर:सुरक्षा उपाय पहले से ही मौजूद हैं। हमने इन-स्पेतस (भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र) बनाया है, जो अंतरिक्ष में सार्वजनिक-निजी भागीदारी को नियंत्रित करता है। यह सुरक्षा संबंधी सरोकारों का पूरी तरह ध्यान में रखना सुनिश्चित करते हुए सहयोग के पैमाने और प्रकृति का निर्धारण करता है। साथ ही, हमने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देकर इस क्षेत्र को उदार बनाया है। विनियमन और खुलेपन का यह संतुलन राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना नवाचार को संभव बनाता है।
प्रश्न:1,000 करोड़ रुपये के उद्यम पूंजी कोष को मंज़ूरी मिल गई है, लेकिन पिछले साल अंतरिक्ष-तकनीक फंडिंग में कमी आई। यह कोष स्टार्टअप्स को कैसे सहायता देगा?
उत्तर:कुछ साल पहले तक, अंतरिक्ष क्षेत्र में स्टार्टअप्स का होना लगभग असामान्ये था। आज, हमारे पास लगभग 400 स्टार्टअप हैं, जिनमें से कुछ पहले ही सफल उद्यमी बन चुके हैं। स्टार्टअप केवल रॉकेट लॉन्च करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये मैपिंग, स्मार्ट सिटी, कृषि, टेलीमेडिसिन और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों में भी फैले हुए हैं।
इस कोष का उद्देश्य उन्हें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक वित्तीय सहायता प्रदान करना है। अंतरिक्ष अचानक करियर का एक आकर्षक विकल्प बन गया है। एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, जो कभी एक विशिष्ट क्षेत्र हुआ करता था, अब आईआईटी में सबसे अधिक मांग वाली शाखाओं में से एक है। यह बदलाव अपने आप में इस क्षेत्र में बढ़ते अवसरों को दर्शाता है।
प्रश्न: भारत ने 2033 तक वैश्विक अंतरिक्ष बाजार का8 प्रतिशत हिस्सा प्राप्तत करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उपग्रह प्रक्षेपणों के अलावा, कौन सी तकनीकें भारत को स्पेसएक्स और चीन से मुकाबला करने में मदद करेंगी?
उत्तर:ज़्यादा ध्यान रॉकेट और प्रक्षेपणों पर है, लेकिन लगभग आधे अंतरिक्ष अनुप्रयोग पृथ्वी पर ही हैं। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी कृषि, बुनियादी ढाँचे और यहाँ तक कि युद्ध में भी एकीकृत है। प्रधानमंत्री गति शक्ति योजना का ही उदाहरण लें; यह समय, धन और कागजी कार्रवाई बचाने के लिए उपग्रह चित्रों का उपयोग करती है, जिससे आर्थिक विकास में सीधा योगदान मिलता है। इसी तरह, अंतरिक्ष इनपुट किसानों को बुवाई और फसल उगाने का समय तय करने में मदद करते हैं। ये बचत धन सृजन जितनी ही मूल्यवान है। इसलिए हमें उम्मीद हैं कि भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था, जो वर्तमान में लगभग 8 बिलियन डॉलर है, अगले दशक में पाँच गुना बढ़कर 40-45 बिलियन डॉलर हो जाएगी, जिससे भारत को वैश्विक रैंकिंग में ऊपर उठने में मदद मिलेगी।
प्रश्न/ क्या आप केवल वायु सेना के पायलटों को ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों को भी भारत के अंतरिक्ष यात्री समूह में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करेंगे?
उत्तर:बिल्कुल। फ़िलहाल, वायु सेना के पायलट हाई एल्टीट्यूड जेट विमानों में प्रशिक्षण के कारण बेहतर रूप से तैयार हैं, लेकिन यह तो बस शुरुआत है। भविष्य में, हमारे अंतरिक्ष यात्री समूह का विस्तार होगा और इसमें आम नागरिक, महिलाएँ, जैव-प्रौद्योगिकीविद, अंतरिक्ष चिकित्सक और यहाँ तक कि मीडिया पेशेवर भी शामिल होंगे ताकि मिशनों को वास्तविक समय में रिकॉर्ड किया जा सके। जैसे-जैसे यह प्रणाली विकसित होगी, भारत को अपनी महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरा करने के लिए अंतरिक्ष यात्रियों के एक बड़े और अधिक वैविध्यकपूर्ण समूह की आवश्यकता होगी।

Bharat GDP Growth : भारत का आर्थिक मंथन और विकास का अमृत

Bharat GDP Growth: हरदीप एस. पुरी लेखक केन्द्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हैं

Bharat GDP Growth: भारतीय सभ्यतामें अरसे से यह मान्यता रही है कि कामयाबीसे पहलेपरीक्षाहोती है। समुद्र मंथन, जहांमथने की प्रकिया से अमृत निकला था,इसी तरहहमारे आर्थिक मंथन ने भी हमेशा ही नवीनता का मार्ग प्रशस्त किया है। वर्ष1991के संकट से जहां उदारीकरण का जन्म हुआ; वहीं महामारी से डिजिटल उपयोग तेज हुआ।और आज, भारत को एक “मृत अर्थव्यवस्था” कहने वाले संशयवादियों के शोर-शराबे के बीच-तीव्र विकास, मजबूत बफर, और व्यापक अवसर – की एक तथ्यपरक कहानी उभर कर सामने आई है।
जीडीपी के ताजा आंकड़ों पर जरागौर करें। वित्तीय वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में वास्तविक जीडीपी 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी। यह वृद्धि दरपिछली पांच तिमाहियों में सबसे अधिक है। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह वृद्धि व्यापक है: सकल मूल्य वर्धन (जीवीए) 7.6 प्रतिशत बढ़ा है, जिसमें मैन्यूफैक्चरिंग 7.7 प्रतिशत, निर्माण 7.6 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र लगभग 9.3 प्रतिशतबढ़ा है। नॉमिनल जीडीपी में 8.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यह कोईमनमाने तरीके से बताई गई तेजी नहीं है।यह बढ़ते उपभोग, मजबूत निवेश और निरंतरसार्वजनिक पूंजीगत व्यय वपूरी अर्थव्यवस्था में लागत कम करने वाले लॉजिस्टिक्स संबंधी सुधारों से हासिल नतीजोंका सबूत है।
भारत अब दुनिया की चौथी सबसे बड़ी और सबसे तेज गति से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था है। यह तेजी के मामले में दुनिया की पहली और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं क्रमशःअमेरिका और चीनसे भी आगे निकल गई है। वर्तमान गति से, हम इस दशक के अंत तक जर्मनी को पीछे छोड़कर बाजार-विनिमय के संदर्भ में तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर हैं। हमारी गति वैश्विक स्तर पर मायने रखती है।स्वतंत्र अनुमान बताते हैं कि भारत पहले से ही वैश्विक वृद्धि में 15 प्रतिशत से अधिक का योगदान दे रहा है। प्रधानमंत्री ने एक स्पष्ट लक्ष्यरखा है —सुधारों के मजबूत होने और नई क्षमताओं के सामने आने के साथ-साथ वैश्विक वृद्धि में हमारी हिस्सेदारी बढ़कर 20 प्रतिशत तक पहुंचे।
विभिन्न बाजारों और रेटिंग एजेंसियों ने हमारे इस अनुशासन को मान्यता दी है। एसएंडपी ग्लोबल ने मजबूत विकास, मौद्रिक विश्वसनीयता और राजकोषीय सुदृढ़ीकरण का हवाला देते हुए, 18 वर्षों में पहली बार भारत की ‘सॉवरेन रेटिंग’ को उन्नत किया है। इस अपग्रेड से उधार लेने की लागत कम होती है और निवेशक आधार का विस्तार होता है। यह “मृत अर्थव्यवस्था” की धारणा को भी झुठलाता है। जोखिम के स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं ने अपनी रेटिंग के साथ अपना मत दिया है।
उतना ही महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि आखिर इस सबका लाभ किसे मिला है। वर्ष 2013-14 और 2022-23 के बीच, 24.82 करोड़ भारतीय बहुआयामी गरीबीसे बाहर निकल आए हैं। यह बदलाव उन बुनियादी सेवाओं – बैंक खाते, रसोई के लिए स्वच्छ ईंधन, स्वास्थ्य बीमा, नल का जलऔर प्रत्यक्ष हस्तांतरण – की बड़े पैमाने पर आपूर्ति पर निर्भर है जो गरीबों को विकल्प चुनने का अधिकार देता है। दुनिया के सबसे जीवंत लोकतंत्र और उल्लेखनीय जनसांख्यिकीय चुनौतियों के बीच विकास का यह पैमाना बेहद खास है। विकास का भारत का यह मॉडल आम सहमति के निर्माण, प्रतिस्पर्धी संघवाद और डिजिटल माध्यमों के उपयोग से अंतिम छोर तक सेवा प्रदान करने को महत्व देता है। यह घोषणा के मामले में धीमा,क्रियान्वयन के मामले में तेज और निर्माण की दृष्टि से टिकाऊ है। जब आलोचक हमारी तुलना तेज भागने वाले सत्तावादियों से करते हैं, तो वे इस तथ्य को नजरअंदाज कर देते हैं किहम मैराथन धावक की तर्ज पर लंबी दूरी तय करने वाली एक अर्थव्यवस्था का निर्माण कर रहे हैं।
भारत के पेट्रोलियम मंत्री के रूप में, मैं इस बात की पुष्टि कर सकता हूं कि हमारी ऊर्जा सुरक्षा इस तीव्र विकास में किस प्रकार सहायक की भूमिका निभा रहीहै। आज, भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऊर्जा उपभोक्ता, चौथा सबसे बड़ा तेलशोधक (रिफाइनर) और एलएनजी का चौथा सबसे बड़ा आयातक है। हमारी तेलशोधन (रिफाइनिंग) क्षमता 5.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक हैऔर इस दशक के अंत तक इसे 400 मिलियनटन प्रति वर्ष (एमटीपीए) से आगे बढ़ाने का एक स्पष्ट रोडमैप हमारे पास उपलब्ध है।
भारत की ऊर्जा संबंधी मांग – जो 2047 तक दोगुनी होने का अनुमान है – बढ़ती वैश्विक मांग का लगभग एक-चौथाई हिस्सा होगी, जिससे हमारी सफलता वैश्विक ऊर्जा स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बन जाएगी। सरकार का दृष्टिकोण सुरक्षा को सुधार के साथ जोड़ने का रहा है। तेल की खोज का क्षेत्र 2021 में तलछटी घाटियों के 8 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 16 प्रतिशत से अधिक हो गया है। हमारालक्ष्य2030 तक इसे बढ़ाकर 10 लाख वर्ग किलोमीटर करना है। तथाकथित ‘निषिद्ध’ (नो-गो)क्षेत्रों में 99 प्रतिशत की भारी कमी ने अपार संभावनाओं को जन्म दिया है, जबकि ओपन एकरेज लाइसेंसिंग पॉलिसी (ओएएलपी)पारदर्शी वप्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया सुनिश्चित करती है। गैस मूल्य निर्धारण से संबंधी नए सुधारों – जिनमें कीमतों को भारतीय कच्चे तेल की टोकरी से जोड़ा गया है और गहरे पानी एवं नए कुओं के लिए 20 प्रतिशत प्रीमियम की पेशकश की गई है – ने निवेश को बढ़ावा दिया है।
हमारी ऊर्जा की कहानी सिर्फ हाइड्रोकार्बन की ही नहीं,बल्कि बदलाव की भी कहानी है। वर्ष 2014 में इथेनॉल मिश्रण 1.5 प्रतिशत से बढ़कर आज 1.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत के बराबर हो गईहै और किसानों को सीधे एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ है। सतत के तहत 300 से ज़्यादा संपीड़ित बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा रहे हैं, जिनका लक्ष्य 2028 तक 5 प्रतिशत मिश्रण का है और तेल से जुड़ी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हरित हाइड्रोजन के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।
भारत द्वारा रूस से कच्चे तेल की खरीद को लेकर कुछ जगहों में काफी शोरगुलहुआ है। आइए तथ्यों को इस शोरशराबे से अलग करके देखें। रूस की तेल पर ईरान या वेनेज़ुएला के कच्चे तेल की तरह कभी प्रतिबंध नहीं लगाया गया।यह जी7/ईयूमूल्य-सीमा प्रणाली के अंतर्गत है जिसे जानबूझकर राजस्व को सीमित रखते हुए तेल प्रवाह को बनाए रखने के लिए डिजाइन किया गया है। ऐसे पैकेजों के 18 दौर हो चुके हैंऔर भारत ने हरेक दौर का पालन किया है। प्रत्येक लेनदेन में कानूनी लदान(शिपिंग)एवं बीमा, अनुपालन करने वाले व्यापारियों और लेखा-परीक्षण (ऑडिट) किए गए चैनलों का उपयोग किया गया है। हमने कोई नियम नहीं तोड़े हैं।हमने बाजारों को स्थिर किया है और वैश्विक कीमतों को बढ़ने से रोका है।
कुछ आलोचकों का आरोप है कि भारत रूस के तेल के लिए एक “लौंड्रोमैट” बन गया है। इससे अधिक निराधार बात और कुछ नहीं हो सकती। भारत इस संघर्ष से काफी पहले दशकों से पेट्रोलियम उत्पादों का चौथा सबसे बड़ा निर्यातक रहा है और हमारे रिफाइनर विश्व भर से इस प्रकार के क्रूड का एक समूह बनाते हैं।निर्यात आपूर्ति श्रृंखलाओं को सक्रिय रखता है। वास्तव में, रूस के कच्चे तेल पर प्रतिबंध लगाने के बाद यूरोप ने भी भारतीय ईंधनों की ओर रुख किया। निर्यात की मात्रा और रिफाइनिंग मार्जिन (जीआरएम) मोटे तौर पर समान ही हैं।मुनाफे लेने का इसमें का कोई सवाल ही नहीं है।
यह तथ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि भारत ने यूक्रेन संघर्ष के बाद वैश्विक कीमतों में उछाल आने पर अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए निर्णायक रूप से कदम उठाए। तेल से जुड़े सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) ने डीजल पर 10 रुपये प्रति लीटर तक के नुकसान को सहन किया।सरकार ने केन्द्रीय और राज्य के करों में कटौती कीऔर निर्यात से जुड़े नियमों ने यह अनिवार्य किया कि विदेशों में पेट्रोल और डीजल बेचने वाले रिफाइनर को घरेलू बाजार में कम से कम 50 प्रतिशत पेट्रोल और 30 प्रतिशतडीजल बेचना होगा।
इन उपायों ने, काफी राजकोषीय लागत पर, यह सुनिश्चित किया कि एक भी खुदरा दुकान खाली न रहे और परिणामस्वरूप भारतीय घरों के लिए कीमतेंस्थिररहीं। बड़ा सच यह है किवैश्विक तेल का लगभग 10 प्रातशत आपूर्ति करने वाले दुनिया के इस दूसरे सबसे बड़े उत्पादक का कोई विकल्प ही नहीं है। जो लोग उंगली उठा रहे हैं, वे इस तथ्य की अनदेखी करते हैं।वसुधैव कुटुम्बकम के अपने सभ्यतागत मूल्यों के अनुरूपभारत द्वारा सभी अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का पालन करने से 200 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के विनाशकारी झटके को रोका गया।
यह वही ‘मेड इन इंडिया’ है जो विश्व दृष्टिकोण के लिए भारत में आकार ले रही नई औद्योगिक क्रांति को आकार देता है। इस औद्योगिक क्रांति में सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, नवीकरणीय ऊर्जा, रक्षा और विशेष रसायन शामिल हैं – जो उत्पादन से जुड़े प्रोत्साहनों (पीएलआई)और पीएम गतिशक्ति लॉजिस्टिक्स के सहारे संचालित हैं। सेमीकंडक्टर के उत्पादन में तेजी अब एक नए स्तर पर पहुंच रही है – जो नीतिगत गंभीरता और क्रियान्वयन का प्रमाण है। मंत्रिमंडल ने हाल ही में भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत चार अतिरिक्त सेमीकंडक्टर मैन्यूफैक्चरिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी हैऔर प्रधानमंत्री का जापान में एक सेमीकंडक्टर उत्पादन केन्द्र का हालिया दौराऔर जापान की निवेश संबंधी नवीनीकृत प्रतिबद्धताएं एक सुदृढ़ एवं विश्वसनीय तकनीकी आपूर्ति श्रृंखलाओं से संबंधित एक साझा रोडमैप को रेखांकित करती हैं।
डिजिटल अर्थव्यवस्था इन लाभों को कई गुना बढ़ा देती है। भारत वास्तविक समय में भुगतान के मामले में दुनिया भर में अग्रणी है। यूपीआई की सर्वव्यापकता छोटे व्यवसायों की उत्पादकता बढ़ाती हैऔर हमारा स्टार्टअप इकोसिस्टम नवाचार को सेवाओं एवं समाधानों के निर्यात में बदल रहा है। जब डिजिटल तेजीवास्तविक बुनियादी ढांचे के साथ मिलती है, तो प्रभाव बढ़ता है और परिणाम स्वरूप कम टकराव, सुव्यवस्थितऔर निवेश एवं उपभोग का एक बेहतर चक्र सुनिश्चित होता है।
आगे का रास्ता आशाजनक है। स्वतंत्र अनुमानों (ईवाई) के अनुसार, 2038 तक भारत पीपीपी के आधार पर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है, जिसका सकल घरेलू उत्पाद 34 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक होगा। यह प्रगति सतत सुधारों, मानव पूंजी और प्रत्येक उद्यम व परिवार के लिए प्रचुर, स्वच्छ एवं विश्वसनीय ऊर्जा पर निर्भर है।
एक महान सभ्यता की परीक्षा उसके कठिन क्षणों में होती है। अतीत में जब भी भारत की क्षमता पर संदेह किया गया, इस देश ने हरित क्रांतियों, आईटी क्रांतियों और शिक्षा व उद्यम के जरिए लाखों लोगों के गौरवपूर्ण उत्थान के साथ उसका जवाब दिया। आज का समय भी इससे कुछ अलग नहीं है। हम अपने दृष्टिकोण पर टिके रहेंगे, अपने सुधारों को निरंतर जारी रखेंगेऔर अपने विकास को तीव्र, लोकतांत्रिक एवं समावेशी बनाए रखेंगेताकि लाभ सबसे वंचित लोगों तक पहुंच सके। आलोचकों के लिए, हमारी उपलब्धियां ही हमाराजवाबहोंगी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, विकसित भारत महज एक आकांक्षा ही नहीं, बल्कि उपलब्धि का एक सार हैऔर विकास के ये आंकड़े उस व्यापक कहानी का ताजा अध्याय मात्र हैं।

Jan Dhan Yojana: भारत में वित्तीय समावेशन का अतीत,वर्तमान और भविष्य

Jan Dhan Yojana: अनिल गुप्ता माइक्रोसेव कंसल्टिंग में पार्टनर हैं और अभिषेक कटारिया माइक्रोसेव कंसल्टिंग में प्रबंधक

बहुत अधिक समय नहीं बीता जब केवल 35% भारतीयों के पास औपचारिक रूप से बैंक खाता हुआ करता था और उनमें से भी महज 8% औपचारिक ऋण की सुविधा लेते थे। ग्रामीण भारत की बुजुर्ग राजेश्वरी देवी जैसी अनगिनत महिलाओं को बैंक खाता खोलने के लिए संघर्ष करना पड़ता था। कम से कम एक बैंक खाते के साथ वित्तीय समावेशन प्राप्त करना भारत में एक महत्वपूर्ण चुनौती रही है।
भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाई) 28 अगस्त 2014 को शुरू किए जाने के बाद स्थिति नाटकीय रूप से बदल गई, जिसका उद्देश्य सभी नागरिकों को उचित दूरी के भीतर किफायती वित्तीय सेवाएं प्रदान करना था। पीएमजेडीवाई के छह स्तंभ हैं: i) बैंकिंग सुविधाओं तक सार्वभौमिक पहुंच, ii) रुपे डेबिट कार्ड और ओवरड्राफ्ट सुविधा के साथ कम से कम एक बेसिक बैंकिंग खाता प्रदान करना, iii) वित्तीय साक्षरता, iv) क्रेडिट गारंटी फंड का निर्माण और ऋण तक पहुंच, v) सूक्ष्म बीमा, और vi) असंगठित क्षेत्र के लिए पेंशन सुविधा।
वर्ष 2025 तक भारत में बैंक खाता रखने वालों की तादाद बढ़कर 90% हो गयी, जो 2011 के आंकड़े से दोगुने से भी अधिक है और 79% के विश्वव्यापी औसत से बेहतर प्रदर्शन कर रहा है। विश्व बैंक ने बताया कि भारत ने छह वर्षों में अपने वित्तीय समावेशन लक्ष्यों को प्राप्त कर लिया, जिसमें अन्यथा 47 साल लगते। पीएमजेडीवाई के तहत “मेरा खाता, भाग्य विधाता” बैंकिंग सुविधाओं से वंचित आबादी के लिए वित्तीय स्वतंत्रता को सक्षम करने के लक्ष्य को दर्शाता है।
वित्तीय समावेशन का एक उल्लेखनीय सफर— आंकड़े खुद बोलते हैं
जुलाई 2025 तक 55.98 करोड़ खातों का आधार और 2.62 लाख करोड़ रुपये का लगातार बढ़ता जमा आधार, निम्न और मध्यम आय वर्ग (एलएमआई) के लोगों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली में लाने में इस जन आंदोलन की सफलता को दर्शाता है।
खास बात यह है कि 66.7% लाभार्थी ग्रामीण या अर्ध-शहरी क्षेत्रों से हैं, जो दूरदराज के क्षेत्रों में लोगों तक पहुंचने में पीएमजेडीवाई के व्यापक प्रभाव को रेखांकित करता है। लगभग 55.8% पीएमजेडीवाई खाताधारक महिलाएं हैं, जो बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच में लगातार मौजूद लैंगिक अंतर को देखते हुए एक और उपलब्धि है।
पीएमजेडीवाई की सफलता इसके मिशन-मोड दृष्टिकोण, नियामक समर्थन, सार्वजनिक-निजी सहभागिता और बायोमेट्रिक पहचान के लिए आधार जैसे डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे के महत्व को उजागर करती है। अंतिम सिरे तक मौजूदगी रखने वाले 13 लाख से अधिक एजेंटों ने अपने आस-पास ग्राहकों में पारंपरिक बैंकिंग सेवाओं को मजबूत किया है।
जुलाई 2025 तक, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) के तहत लगभग 23.60 करोड़ लोगों ने कुल मिलाकर नामांकन किया था। इस बीच, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) में कुल 51 करोड़ मिलियन नामांकन हुए। इसके अलावा 7.6 करोड़ लोगों ने सेवानिवृत्ति कोष बनाने के लिए अटल पेंशन योजना (एपीवाई) योजना में नामांकन किया।
मार्च 2025 तक वित्तविहीन लोगों को वित्त प्रदान करने की पहल के तहत बैंकों ने सूक्ष्म एवं छोटे व्यवसायों को कुल 32.6 लाख करोड़ रुपये के 52 करोड़ ऋण स्वीकृत किए।
पीएमजेडीवाई: वित्तीय लचीलापन और ऋण तक पहुंच को बढ़ावा देना

औपचारिक बचत:

पीएमजेडीवाई ने बैंकिंग सुविधाओं से वंचित आबादी के वित्तीय लचीलेपन को बढ़ाने के लिए एक मजबूत आधारशिला रखी। एमएससी के शोध से पता चलता है कि 67% महिलाओं और 64% पुरुषों ने मुख्य रूप से भविष्य के लिए बचत करने के लिए बैंक खाते खोले। बचत व्यवहार में यह बदलाव लोगों के लिए उन वित्तीय झटकों का प्रबंधन करने के लिए महत्वपूर्ण है जो एलएमआई परिवारों को गरीबी में धकेल देते हैं। औसत बैंक जमा में चार गुना वृद्धि इस व्यवहार परिवर्तन को प्रमाणित करती है। दिलचस्प बात यह है कि पीएमजेडीवाई खातों में 12% वार्षिक जमा वृद्धि पिछले पांच वर्षों में 9% की समग्र बुनियादी बचत बैंक खाते की जमा राशि से अधिक रही।

औपचारिक ऋण:

पीएमजेडीवाई ने बचत को सक्षम किया, जबकि औपचारिक वित्तीय इतिहास के बिना लोगों को ऋण तक पहुंच प्रदान की। खाताधारक अब बचत पैटर्न दिखा सकते हैं, जो उन्हें वित्तीय संस्थानों से ऋण के लिए पात्र बनाता है। सबसे करीबी प्रॉक्सी मुद्रा ऋणों के तहत स्वीकृतियां हैं, जो वित्तीय वर्ष 2020 से वित्तीय वर्ष 2025 तक पांच वर्षों में 11.48% की चक्रवृद्धि वार्षिक दर से बढ़ीं। ऋण तक यह पहुंच परिवर्तनकारी है क्योंकि यह व्यक्तियों को अपनी आय बढ़ाने के लिए सशक्त बनाती है।

अब जन धन से जन समृद्धि?

जन धन ने जन समृद्धि के लिए मंच तैयार किया है, जहाँ उपयोगकर्ता उपयुक्त और किफायती सेवाओं के साथ अपने वित्तीय स्वास्थ्य को बढ़ा सकते हैं। एमएससी का शोध यह दर्शाता है कि लोग अपने खातों का उपयोग एक या दो सेवाओं के लिए करते हैं। इस प्रकार, हमें प्रासंगिक समाधानों को संशोधित और/या विकसित करके जुड़ाव में सुधार करने के तरीके खोजने होंगे जो अनुरूप समाधान, स्पष्ट संचार, विश्वसनीय शिकायत प्रक्रियाओं और लचीले अंतिम ढांचे के साथ एलएमआई समूह की आकांक्षाओं संबोधित करते हैं।
प्रदर्शन की निगरानी के जरिए आकलन महत्वपूर्ण है जैसे कि आईबीआई का वित्तीय समावेशन इंडेक्स। सूचकांक के उप-पैरामीटरों के बारे में विवरण साझा करना और विभिन्न राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के माध्यम से उन्हें मजबूत करना अधिक समावेशी होगा।
भारत के फास्ट पेमेंट्स में एक वैश्विक लीडर के रूप में उभरने के कारण, हमें डिजिटल अर्थव्यवस्था में अपार अवसरों को अनलॉक करने के लिए अधिक पीएमजेडीवाई खाताधारकों को डिजिटल वित्तीय सेवाओं को अपनाने के लिए प्रयास करना चाहिए। अन्य संबंधित कार्यक्रमों के साथ तालमेल और स्थानीय एजेंसियों के साथ समन्वय, वंचित और हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए डिजिटल अंतर को पाटने में मदद कर सकता है।
सच्चा वित्तीय समावेशन सिर्फ पहुंच से परे है; यह सही उत्पादों और सेवाओं, उच्च सेवा गुणवत्ता सुनिश्चित करने और औपचारिक वित्तीय प्रणाली के साथ सार्थक जुड़ाव को बढ़ावा देने के बारे में है। भारत जैसे विविधता से भरे देश के लिए वित्तीय समावेशन की यात्रा कठिन है। पीएमजेडीवाई ने लाखों लोगों को, विशेष रूप से हाशिए पर रहने वाले समुदायों को, बैंकिंग सेवाओं तक पहुंचने और राजेश्वरी देवी जैसे लोगों के लिए अपनी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों में सुधार करने के लिए सशक्त बनाया है, जो कतार में सबसे आखिर में हैं।

Shail Vastralaya: अब महिलाओं के साथ पुरुषों के लिए भी फैशन का सबसे भरोसेमंद नाम

Shail Vastralaya: छत्तीसगढ़ में महिलाओं के परिधानों के क्षेत्र में एक नया आयाम जोड़ते हुए शैल वस्त्रालय ने खुद को राज्य के सबसे बड़े रिटेल स्टोर के रूप में स्थापित कर लिया है। यहां 15,000+ एक्सक्लूसिव डिजाइनों का विशाल संग्रह उपलब्ध है जिसमें साड़ियाँ, कुर्ती, पार्टीवियर परिधान, लहंगा और इंडो-वेस्टर्न जैसे आकर्षक विकल्प शामिल हैं।

शैल वस्त्रालय की खासियत इसका व्यापक कलेक्शन और ट्रेंड के अनुसार फैशन उपलब्ध कराना है, जो हर उम्र की महिलाओं की पसंद को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है।

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इतना ही नहीं, अब शैल वस्त्रालय ने पुरुषों के लिए भी एक खास ब्रांड ‘पौरुषम’ की शुरुआत की है, जो पूरी तरह से मेंस एथनिक वियर को समर्पित है। पौरुषम में नवविवाहित दूल्हों के लिए शेरवानी, कुर्ता-पायजामा से लेकर इंडो-वेस्टर्न तक की संपूर्ण रेंज उपलब्ध है।

शैल वस्त्रालय अब केवल एक फैशन स्टोर नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिकता का संगम बन चुका है।

Pora festival: छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति का पर्व है पोरा: डॉ पाठक

राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर द्वारा पोरा पर विमर्श व काव्य गोष्ठी आयोजित

Pora festival: बिलासपुर । राष्ट्रीय कवि संगम बिलासपुर द्वारा पोरा पर्व के अवसर पर विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । यह आयोजन डॉ विनय कुमार पाठक पूर्व अध्यक्ष छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति थावे विद्यापीठ गोपालगंज बिहार के मुख्य आतिथ्य में वरिष्ठ कवि सनत तिवारी की अध्यक्षता एवं अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर, शत्रुघन जैसवानी की विशिष्ट आतिथ्य में किया गया ।
इस अवसर पर डॉ विनय कुमार पाठक ने कहा कि पोरा पर्व छत्तीसगढ़ की कृषि संस्कृति का पर्व है । उन्होंने इस पर्व की महत्ता बताते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में भगवान श्रीकृष्ण जहाँ गोपाल के रूप में पूजित हैं वहीं हलधर बलराम कृषि संस्कृति पालक के रूप में पूजित होकर गो पालन एवं कृषि को जीवन आजिविका के रुप में स्वीकार करने का संदेश देते हैं । अध्यक्षीय उदबोधन में सनत तिवारी जी ने छत्तीसगढ़ में पोरा पर्व मनाने की परंपरा एवं महत्ता को विस्तार से बताते हुए कहा कि इस दिन खेतों में धान की बाली में दाना का गर्भाधान होता है वहीं महिलाएं इस दिन गाँव के बाहर बने पोरा पटान में मिट्टी से बने खाली पोरे के साथ मिष्ठान्न शेष को जमीन में पटक कर घर परिवार और गाँव को दुकाल आदि से बचाने की प्रार्थना करते हैं और इस अवसर पर बने व्यंजन ठेठरी खुरमी को आपस में बाँट कर खाते हैं । विशिष्ट अतिथि अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर जी ने पोरा पर्व को भगवान कृष्ण द्वारा पोलासुर राक्षस का वध करने वाली कथा से जुड़ा हुआ बताया वहीं पोरा के रुप में पूजनीय कृषि सहयोगी पशुधन बैल की महत्ता में निरंतर कमी आने का प्रमुख कारण कृषि यंत्रीकरण को बताते हुए बैल की उपेक्षा के प्रति चिंता व्यक्त किया तथा इसे संरक्षित करने के लिए गांव के कृषि परिवहन में संलग्नता जैसे विकल्पों सहित विशेष योजना निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर पोरा के सांस्कृतिक व आध्यात्मिकता महत्व को लेकर काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसमें राम निहोरा राजपूत, डा बजरंगबली शर्मा, डॉ अंकुर शुक्ला, शत्रुघन जैसवानी, आशीष श्रीवास, डॉ राघवेन्द्र दुबे , सनत तिवारी, विष्णु कुमार तिवारी, रमेश चन्द्र श्रीवास्तव व अंजनी कुमार तिवारी सुधाकर, बालमुकुंद श्रीवास ने काव्य पाठ किया । कार्यक्रम का संचालन डॉ राघवेन्द्र दुबे ने किया एवं आभार प्रदर्शन डॉ विवेक तिवारी ने किया ।

Schools are being run without recognition: बिना मान्यता के संचालित नारायणा स्कूल पर तुरंत एफआईआर दर्ज हो : लोकेश

Schools are being run without recognition: नेहरू नगर, अमेरी रोड स्थित बिना मान्यता के संचालित नारायण स्कूल पर बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। इस संबंध में नारायणा स्कूल के खिलाफ एफआईआर की मांग करते हुए एनएसयूआई प्रदेश सचिव लोकेश नायक के नेतृत्व में एनएसयूआई छात्र प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर संजय अग्रवाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
बता दें कि इस वर्ष (शैक्षणिक सत्र 2025-26) ही प्रारंभ हुए इस नारायणा स्कूल ने बिना सीबीएसई अथवा सीजीबीएसई बोर्ड की मान्यता प्राप्त किए धड़ल्ले से कक्षाओं का संचालन शुरू कर दिया और कुछ ही महीनों में 243 विद्यार्थियों का प्रवेश लेकर लगभग 2 करोड़ रुपये से अधिक की फीस वसूली कर डाली।

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प्रदेश सचिव लोकेश नायक ने बताया कि नारायणा विद्यालय प्रबंधन ने अभिभावकों को भ्रमित करने के लिए CBSE बोर्ड का नाम और बोर्ड लगाकर भ्रामक प्रचार किया। इस गंभीर प्रकरण पर एनएसयूआई ने जिला शिक्षा अधिकारी को शिकायत व ज्ञापन दिया था। जिस पर जांच समिति गठित हुई और उसकी रिपोर्ट में यह प्रमाणित हुआ कि विद्यालय बिना मान्यता के संचालित हो रहा है। बावजूद इसके, भ्रामक प्रचार के ठोस साक्ष्यों को जांच समिति द्वारा अप्रमाणित बताकर मामले को हल्का करने और जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही 243 विद्यार्थियों के प्रवेश पर केवल 3 अभिभावकों से फीस सम्बंधित अभिमत लेकर जांच समिति और स्कूल प्रबंधन की मिलीभगत उजागर हो रही है।

लोकश नायक ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा 

“यह केवल शिक्षा नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह सीधा-सीधा धोखाधड़ी और आर्थिक अपराध है। बाहर से आई तथाकथित फ्रेंचाइज़ी के नाम पर यह संस्था छत्तीसगढ़ के विद्यार्थियों और अभिभावकों को ठग रही है। बच्चों के भविष्य से इस तरह खिलवाड़ किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन यदि तुरंत कार्रवाई नहीं करता तो एनएसयूआई सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी।”

एनएसयूआई की प्रमुख मांगें 

  1.  नारायणा स्कूल प्रबंधन पर तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए।
  2.  मामले को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) को सौंपा जाए और फीस वसूली की गहन जांच हो।
  3.  अब तक वसूली गई लगभग 2 करोड़ रुपये की राशि अभिभावकों को लौटाई जाए।
  4.  नारायणा विद्यालय प्रबंधन को तत्काल प्रभाव से विद्यालय संचालन से रोका जाए और जिम्मेदारों को जेल भेजा जाए।
  5. जिले में बिना मान्यता के संचालित सभी संस्थानों की सूची तैयार कर उन पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
  6. एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि दोषी विद्यालय प्रबंधन पर तत्काल कठोर कार्रवाई नहीं हुई तो एनएसयूआई पूरे बिलासपुर जिले में बड़ा आंदोलन छेड़ेगी।
  7. सौंपने में प्रदेश सचिव लोकेश नायक के साथ प्रदेश महासचिव विकास सिंह ठाकुर,बेलतरा विधानसभा अध्यक्ष विक्की यादव,जिला महासचिव शुभम जायसवाल,जिला
  8. महासचिव प्रवीण साहू,महासचिव सुबोध नायक,विपिन साहू,कामेश पटेल, क्रिश बाजपेई,तरुण यादव,आयुष यादव आदि एनएसयूआई के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।

Teeja-Pora Tihar : बेलतरा में तीजा-पोरा तिहार का भव्य आयोजन, 3 हजार महिलाएं हुईं शामिल

Teeja-Pora Tihar :  जिले के बेलतरा विधानसभा में तीजा-पोरा तिहार की धूम रही। विधायक सुशांत शुक्ला की पहल पर तीजा तिहार का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 3 हजार महिलाओं ने शिरकत की। तिहार में विधायक सुशांत ने तीजहारिन महिलाओं के लिए पारंपरिक करू भात के साथ ही झूला सजा कर गीत-गायन और नृत्य का आयोजन किया। बहतराई स्थित स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं ने जमकर थिरकती नजर आईं। इस कार्यक्रम में जांजगीर सांसद कमलेश जांगड़े, पंडरिया विधायक भावना बोहरा, पथलगांव विधायक गोमती साय, बिलासपुर महापौर पूजा विधानी, डिप्टी सीएम अरुण साव की पत्नी मीना साव और भाजपा मंत्री हर्षिता पाण्डेय भी शामिल रहीं।
इस अवसर पर जांजगीर सांसद कमलेश जांगड़े ने कहा की यह आयोजन अत्यंत सराहनीय और उत्साहित कर देने वाला आयोजन है,विशेषकर महिलाओं के लिए समर्पित इस कार्यक्रम से महिलाओं का सम्मान और भी बढ़ा है। पंडरिया विधायक भावना बोहरा ने कहा कि माताओं और बहनों के लिए तीजा तिहार का आयोजन उनके लिए सबसे बड़ा उपहार है और इसे देने के लिए विधायक सुशांत शुक्ला का यह पहल अनुकरणीय एवं सराहनीय है,आज इतनी बड़ी संख्या में नारी शक्ति का समागम हुआ है यह दृश्य उमंगित कर देने वाला है। विधायक गोमती साय ने कहा कि इस कार्यक्रम से महिलाओं में एक नई ऊर्जा का संचार हुआ है,ऐसे आयोजन होते रहना चाहिए यह हमारे छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अटूट हिस्सा है। महापौर पूजा विधानी,हर्षिता पाण्डेय और मीना साव ने भी अपने उद्बोधन में तीजा तिहार कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताया और कहा की छत्तीसगढ़ की संस्कृति में तीजा-पोरा तिहार का अपना एक विशेष महत्व है,यह तिहार पति की लंबी आयु के लिए है पर इसमें महिलाओं का सम्मान और भी बढ़ जाता है। तीजा तिहार के ज़रिए जो खुशी,सम्मान और मनोरंजन का उपहार आज बेलतरा विधानसभा की पावन भूमि में विधायक सुशांत शुक्ला के द्वारा महिलाओं को दिया गया है यह काबिले तारीफ है।बता दें कि, तीजा-पोरा तिहार छत्तीसगढ़ की संस्कृति और परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें महिलाएं अपने परिवार और समाज के साथ मिलकर इस त्योहार को मनाती हैं। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं ने अपनी खुशी और उत्साह का इजहार किया।

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माताओं-बहनों का स्थान सबसे ऊंचा-सुशांत

इस अवसर पर विधायक सुशांत ने उपस्थित तिजाहरिनों को संबोधित करते हुए कहा कि समाज और परिवार के प्रति आपकी निष्ठा,समर्पण,त्याग और मेहनत का कोई मोल नहीं है वह अनमोल है,माताओं और बहनों का स्थान सबसे ऊंचा है।
तीजा पोरा का तिहार हमारी संस्कृति का अटूट हिस्सा है,जो मातृ शक्ति के सम्मान और गौरव के लिए समर्पित है और हमारा प्रयास रहेगा की छत्तीसगढ़ की ऐसी सभी संस्कृति और परंपरा को हम और भी आगे बढ़ाएंगे।

महिलाओं की भागीदारी

बड़ी संख्या में महिलाओं ने इस कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर भाग लिया। लोक गायिका अलका चंद्राकर और उनकी टीम ने छत्तीसगढ़ी गीतों की प्रस्तुति देकर समा बांधा। महिलाओं ने पारंपरिक और लोक गीतों पर जमकर थिरकीं।

विधायक सुशांत शुक्ला की पहल

विधायक सुशांत शुक्ला ने महिलाओं को तीजा-पोरा तिहार की बधाई दी। उनके साथ मिलकर इस त्योहार का आनंद लिया। इस अवसर पर विशेष रूप से झूले लगाए गए थे, विधायक शुक्ला ने महिलाओं को साड़ी और सुहाग का सामान भी भेंट किया।

Meritorious Actress Honored : झलफा हाई स्कूल की पांच मेधावी छात्राओं को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

Meritorious Actress Honored :  शासकीय हाई स्कूल झलफा जिला बिलासपुर के पांच मेधावी बच्चे को प्राचार्य नीलिमा अधिकारी के निर्देशानुसार रिचा , सोमिका , जानवी ,मुस्कान, आकांक्षा को माननीय मुख्यमंत्री द्वारा गुरु घसीदास विश्वविद्यालय बिलासपुर परिसर में शहीद विनोद कौशिक मेडल प्रशस्ति पत्र और पुरस्कार से सम्मानित किया गया ।

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सभी स्टाफ का योगदान सराहनीय रहा। बच्चों का नेतृत्व विशेष रूप से अकलेश कुमार नवलाकर द्वारा किया गया जो सराहनीय है ।