केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन ने एकता नगर में आयोजित Sardar@150 यूनिटी मार्च – राष्ट्रीय पदयात्रा के समापन समारोह में की सहभागिता

दिल्ली । केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री सह बिलासपुर लोकसभा सांसद तोखन साहू आज एकता नगर में आयोजित Sardar@150 यूनिटी मार्च – राष्ट्रीय पदयात्रा के भव्य समापन समारोह में सहभागिता हेतु माननीय उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन के साथ दिल्ली से गुजरात पहुंचे तथा कार्यक्रम उपरांत उपराष्ट्रपति महोदय के साथ ही वापस लौटे।

यह राष्ट्रीय समारोह लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती वर्ष पर आयोजित पदयात्रा के ऐतिहासिक समापन का अवसर था। कार्यक्रम में सरदार पटेल द्वारा 560 से अधिक रियासतों के एकीकरण के माध्यम से अखंड भारत की मजबूत नींव रखने के अतुलनीय योगदान को स्मरण किया गया।

समारोह के दौरान यह भी रेखांकित किया गया कि सरदार पटेल का एकता, राष्ट्रनिर्माण, आत्मविश्वास और सशक्त भारत का स्वप्न आज प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में नई ऊर्जा और संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है।
प्रधानमंत्री जी के आत्मनिर्भर भारत अभियान, विकसित भारत @2047 तथा युवा-शक्ति के सशक्तिकरण पर केंद्रित विज़न ने सरदार साहब के विचारों को आधुनिक भारत में गति प्रदान की है।

कार्यक्रम में इस बात पर भी जोर दिया गया कि सरदार पटेल की विचारधारा से प्रेरित होकर देश का युवा आत्मनिर्भर, नवाचार-आधारित तथा विकसित भारत के निर्माण में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

इस अवसर पर माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन, गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेंद्र पटेल, केंद्रीय मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह, केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय राज्य मंत्री श्रीमती राक्षा खड़से सहित अनेक विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे।

केन्द्रीय मंत्री  तोखन ने बिलासपुर विमान सेवाओं के विस्तार हेतु नागरिक उड्डयन मंत्री से सौजन्य भेंट

आज भारत सरकार के नागरिक उड्डयन मंत्री एवं देश के सबसे युवा कैबिनेट सदस्य श्री किंजरापु राममोहन नायडू जी से केन्द्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री श्री तोखन साहू ने नई दिल्ली में मुलाकात हुई

भेंट के दौरान बिलासपुर हवाई अड्डे से संचालित उड़ान सेवाओं के विस्तार और सुचारू संचालन से संबंधित विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई। वर्तमान में बिलासपुर से उड़ान सेवाएं सप्ताह में 5 दिन संचालित की जा रही हैं, जबकि पूर्व में यह सेवा सप्ताह के सातों दिन उपलब्ध थी।

श्री साहू ने नागरिक उड्डयन मंत्री महोदय से आग्रह किया कि बिलासपुर क्षेत्र की बढ़ती यात्री मांग, औद्योगिक गतिविधियों, छात्रों और व्यापारिक समुदाय की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उड़ान सेवाओं को पुनः दैनिक संचालन (Daily Operations) के रूप में बहाल किया जाए।

नायडू  ने श्री साहू द्वारा प्रस्तुत सुझावों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त किया

बिहार रेलवे लाइन डबल ट्रैकिंग और CSIR क्षमता निर्माण योजना मंजूर

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने बिहार में बख्तियारपुर-राजगीर-तिलैया एकल रेलवे लाइन खंड (104 किमी) के दोहरीकरण को मंजूरी प्रदान की, जिसकी कुल लागत लगभग 2,192 करोड़ रुपये है।

यह परियोजना बिहार राज्य के चार जिलों को कवर करेगी और भारतीय रेल के मौजूदा नेटवर्क में लगभग 104 किलोमीटर की वृद्धि रहेगी।

यह रेल मार्ग राजगीर (शांति स्तूप), नालंदा, पावापुरी जैसे प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्‍थलों को जोड़ता है, जो देश भर से तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करती हैं।

इस मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं से लगभग 1,434 गांवों और लगभग 13.46 लाख आबादी, जिसमें दो आकांक्षी जिलें (गया और नवादा) शामिल हैं, की कनेक्टिविटी बढ़ेगी।

ये मार्ग कोयला, सीमेंट, क्लिंकर, फ्लाई ऐश आदि वस्तुओं के परिवहन के लिए आवश्‍यक है। क्षमता वृद्धि कार्यों के परिणामस्वरूप 26 मिलियन टन प्रति वर्ष की अतिरिक्त माल ढुलाई होगी। रेलवे पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल परिवहन साधन होने के नाते देश के जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करने और रसद लागत को कम करने में मदद करेगा, साथ ही तेल आयात (5 करोड़ लीटर) को घटाएगा और सीओ2 उत्सर्जन (24 करोड़ किलोग्राम) को कम करेगा, जो एक करोड़ पेड़ लगाने के बराबर है।

बढ़ी हुई लाइन क्षमता से गतिशीलता में सुधार होगा तथा भारतीय रेल की कार्यकुशलता और सेवा विश्वसनीयता बढ़ेगी। मल्टी-ट्रैकिंग का यह प्रस्ताव परिचालन को सुगम बनाएगा और भीड़ को कम करेगा, जिससे भारतीय रेलवे की सबसे व्यस्त खंडों पर आवश्यक बुनियादी ढांचागत विकास होगा। ये परियोजनाएं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘नए भारत’ के विज़न के अनुरूप हैं, जो इस क्षेत्र के लोगों को व्यापक विकास के माध्यम से “आत्मनिर्भर” बनाएंगी, जिससे  उनके रोज़गार/स्वरोज़गार के अवसर बढ़ेंगे।

ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने पंद्रहवें वित्त आयोग 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए 2277.397 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास” पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग/वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (डीएसआईआर/सीएसआईआर) योजना को मंजूरी दे दी है।

इस योजना में सीएसआईआर द्वारा कार्यान्वित की जा रही है और देश भर के सभी अनुसंधान एवं विकास संस्थान, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, प्रतिष्ठित संस्थान और विश्वविद्यालय शामिल किए जाएंगे। यह पहल विश्वविद्यालयों, उद्योग, राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों में करियर बनाने के इच्छुक युवा, उत्साही शोधकर्ताओं के लिए एक व्यापक मंच प्रदान करती है। प्रख्यात वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों के मार्गदर्शन में, यह योजना विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग, चिकित्सा और गणितीय विज्ञान (एसटीईएमएम) के विकास को बढ़ावा देगी।

क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास योजना, प्रति दस लाख जनसंख्या पर शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ाकर, भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के स्‍थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस योजना ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में क्षमता निर्माण और उच्च-गुणवत्ता वाले मानव संसाधनों के भंडार का विस्तार करके अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है।

पिछले दशक के दौरान भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) के लिए किए गए समन्वित प्रयासों से, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) की रैंकिंग के अनुसार, भारत ने 2024 में वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) में अपनी स्थिति सुधारकर 39वीं रैंक प्राप्त कर ली है, जो भारत के प्रधानमंत्री के दूरदर्शी मार्गदर्शन में निकट भविष्य में और भी बेहतर होगी। सरकार द्वारा अनुसंधान एवं विकास को दिए गए सहयोग के परिणामस्वरूप, एनएसएफ, यूएसए के आंकड़ों के अनुसार, भारत अब वैज्ञानिक शोधपत्र प्रकाशनों के मामले में शीर्ष तीन में शामिल है। डीएसआईआर की योजना हजारों शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान कर रही है, जिनके परिणामों ने भारत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस अनुमोदन ने सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना कार्यान्वयन के माध्यम से सीएसआईआर की भारतीय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान को दी गई 84 वर्षों की सेवा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्रदान की है जो वर्तमान और भावी पीढ़ियों में देश की अनुसंधान एवं विकास प्रगति को गति प्रदान करती है। सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास (सीबीएचआरडी)” की चार उप-योजनाएँ हैं, जैसे (i) डॉक्टरेट और पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप (ii) एक्स्ट्राम्‍यूरल रिसर्च स्कीम, एमेरेटस साइंटिस्ट स्कीम और भटनागर फेलोशिप कार्यक्रम; (iii) पुरस्कार योजना के माध्यम से उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और मान्यता प्रदान करना; और (iv) यात्रा और संगोष्ठी अनुदान योजना के माध्यम से ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना।

यह पहल एक मजबूत अनुसंधान एवं विकास संचालित नवाचार इकोसिस्‍टम के निर्माण और 21वीं सदी में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय विज्ञान को तैयार करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत एकीकृत योजना और हितधारक परामर्श के माध्यम से मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता को बढ़ाने पर केन्‍द्रीत है। ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं की आवाजाही के लिए निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।

कैबिनेट ने 2277.397 करोड़ रुपये की डीएसआईआर योजना ‘क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास’ को मंजूरी दी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में मंत्रिमंडल ने पंद्रहवें वित्त आयोग 2021-22 से 2025-26 की अवधि के लिए 2277.397 करोड़ रुपये के कुल परिव्यय के साथ “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास” पर वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग/वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (डीएसआईआर/सीएसआईआर) योजना को मंजूरी दे दी है।

इस योजना में सीएसआईआर द्वारा कार्यान्वित की जा रही है और देश भर के सभी अनुसंधान एवं विकास संस्थान, राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं, राष्ट्रीय महत्व के संस्थान, प्रतिष्ठित संस्थान और विश्वविद्यालय शामिल किए जाएंगे। यह पहल विश्वविद्यालयों, उद्योग, राष्ट्रीय अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों में करियर बनाने के इच्छुक युवा, उत्साही शोधकर्ताओं के लिए एक व्यापक मंच प्रदान करती है। प्रख्यात वैज्ञानिकों और प्रोफेसरों के मार्गदर्शन में, यह योजना विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं इंजीनियरिंग, चिकित्सा और गणितीय विज्ञान (एसटीईएमएम) के विकास को बढ़ावा देगी।

क्षमता निर्माण एवं मानव संसाधन विकास योजना, प्रति दस लाख जनसंख्या पर शोधकर्ताओं की संख्या बढ़ाकर, भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र के स्‍थायी विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस योजना ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में क्षमता निर्माण और उच्च-गुणवत्ता वाले मानव संसाधनों के भंडार का विस्तार करके अपनी प्रासंगिकता सिद्ध की है।

पिछले दशक के दौरान भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (एस एंड टी) में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) के लिए किए गए समन्वित प्रयासों से, विश्व बौद्धिक संपदा संगठन (डब्ल्यूआईपीओ) की रैंकिंग के अनुसार, भारत ने 2024 में वैश्विक नवाचार सूचकांक (जीआईआई) में अपनी स्थिति सुधारकर 39वीं रैंक प्राप्त कर ली है, जो भारत के प्रधानमंत्री के दूरदर्शी मार्गदर्शन में निकट भविष्य में और भी बेहतर होगी। सरकार द्वारा अनुसंधान एवं विकास को दिए गए सहयोग के परिणामस्वरूप, एनएसएफ, यूएसए के आंकड़ों के अनुसार, भारत अब वैज्ञानिक शोधपत्र प्रकाशनों के मामले में शीर्ष तीन में शामिल है। डीएसआईआर की योजना हजारों शोधार्थियों और वैज्ञानिकों को सहायता प्रदान कर रही है, जिनके परिणामों ने भारत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उपलब्धियों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

इस अनुमोदन ने सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना कार्यान्वयन के माध्यम से सीएसआईआर की भारतीय वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान को दी गई 84 वर्षों की सेवा के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि प्रदान की है जो वर्तमान और भावी पीढ़ियों में देश की अनुसंधान एवं विकास प्रगति को गति प्रदान करती है। सीएसआईआर की अम्ब्रेला योजना “क्षमता निर्माण और मानव संसाधन विकास (सीबीएचआरडी)” की चार उप-योजनाएँ हैं, जैसे (i) डॉक्टरेट और पोस्टडॉक्टरल फेलोशिप (ii) एक्स्ट्राम्‍यूरल रिसर्च स्कीम, एमेरेटस साइंटिस्ट स्कीम और भटनागर फेलोशिप कार्यक्रम; (iii) पुरस्कार योजना के माध्यम से उत्कृष्टता को बढ़ावा देना और मान्यता प्रदान करना; और (iv) यात्रा और संगोष्ठी अनुदान योजना के माध्यम से ज्ञान साझाकरण को बढ़ावा देना।

यह पहल एक मजबूत अनुसंधान एवं विकास संचालित नवाचार इकोसिस्‍टम के निर्माण और 21वीं सदी में वैश्विक नेतृत्व के लिए भारतीय विज्ञान को तैयार करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

एशियाई खेल 2026: खिलाड़ियों की भागीदारी के लिए नए चयन मानदंड जारी

नई दिल्ली। युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने एशियाई खेल 2026(asian-games) और अन्य बहु-खेल आयोजनों में खिलाड़ियों और टीमों की भागीदारी के लिए चयन मानदंड जारी किए हैं। इसका उद्देश्य एक पारदर्शी और न्यायसंगत ढांचा तैयार कर यह सुनिश्चित करना है कि केवल उन एथलीटों को ही बहु-विषयक खेल आयोजनों में भागीदारी के लिए विचार किया जाए जिनके पास पदक जीतने का वास्तविक मौका है।

चयन मानदंडों में मापनीय और गैर-मापनीय दोनों प्रकार की प्रतियोगिताओं के लिए मानक निर्धारित किए गए हैं जो एशियाई खेलों, पैरा एशियाई खेलों, राष्ट्रमंडल खेलों, एशियाई इनडोर खेलों, एशियाई समुद्र तट खेलों, युवा ओलंपिक, एशियाई युवा खेलों, राष्ट्रमंडल युवा खेलों जैसे बहु-खेल प्रतियोगिताओं में भागीदारी के बारे में निर्णय लेने के लिए मार्गदर्शक सिद्धांत होंगे। हालांकि ओलंपिक और ऐसी अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताएं इसके दायरें में नहीं आएंगे जहां एथलीट या टीम की भागीदारी, संबंधित अंतरराष्ट्रीय महासंघों द्वारा निर्धारित योग्यता मानकों द्वारा निर्धारित की जाती है।

मापनीय व्यक्तिगत खेल और स्पर्धाओं के लिए, कोई भी खिलाड़ी भारतीय दल में तभी जगह पा सकेगा जब उसने आगामी एशियाई खेलों से पहले 12 महीनों के भीतर आयोजित किसी अंतरराष्ट्रीय खेल महासंघ द्वारा मान्यता प्राप्त प्रतियोगिता में पिछले एशियाई खेलों के छठे स्थान के प्रदर्शन की बराबरी की हो या उससे बेहतर प्रदर्शन किया हो। यदि वह खेल या स्पर्धा पिछले एशियाई खेलों में शामिल नहीं थी, तो चयन मानदंड आगामी एशियाई खेलों से पहले 12 महीनों के भीतर उस खेल या स्पर्धा के लिए आयोजित सीनियर एशियाई चैंपियनशिप के समान मानदंडों के आधार पर होंगे।

गैर-मापनीय व्यक्तिगत खेल और स्पर्धाओं के लिए, जहां आगामी एशियाई खेलों से पूर्व 12 महीनों के भीतर सीनियर एशियाई चैम्पियनशिप आयोजित की गई हो या विश्व रैंकिंग नियमित रूप से जारी की जाती हो, ऐसे खिलाड़ी को दल में शामिल करने पर विचार किया जाएगा जिसने पिछले 12 महीनों के भीतर आयोजित अंतिम सीनियर एशियाई चैम्पियनशिप में अपने भार या स्पर्धा में छठा या उससे बेहतर स्थान प्राप्त किया हो या उसकी विश्व रैंकिंग अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में एशियाई देशों में शीर्ष 6 में शामिल हो।

यदि आगामी एशियाई खेलों से पहले पिछले 12 महीनों में कोई सीनियर एशियाई चैंपियनशिप आयोजित नहीं की गई है और कोई अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग नियमित रूप से प्रकाशित नहीं की गई हो तो उस स्थिति में एथलीट को समकक्ष अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में एशियाई देशों के बीच शीर्ष 6 में स्थान प्राप्त करना होगा।

टीम खेलों (जैसे फुटबॉल, हॉकी आदि) और टीम स्पर्धाओं (जैसे रिले, युगल, मिश्रित युगल आदि) के लिए, 12 महीनों के भीतर आयोजित अंतिम सीनियर एशियाई चैंपियनशिप में शीर्ष 8 में स्थान प्राप्त करने वाली टीम या अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग में एशियाई देशों में शीर्ष 8 में स्थान प्राप्त करने वाली टीम को एशियाई खेलों में भाग लेने के लिए विचार किया जाएगा।

अगर अंतर्राष्ट्रीय रैंकिंग प्रकाशित नहीं की गई है या आगामी एशियाई खेलों से पहले 12 महीनों के भीतर सीनियर एशियाई चैम्पियनशिप आयोजित नहीं की गई है, तो उस स्थिति में टीम को समकक्ष अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में एशियाई देशों के बीच शीर्ष 8 में स्थान प्राप्त करना होगा।

इस मानदंड में छूट का एक प्रावधान है जो मंत्रालय को यह अधिकृत करता है कि यदि विशिष्ट खेल अथवा भारतीय खेल प्राधिकरण (एसएआई) के विशेषज्ञों की राय के आधार पर उचित कारणों से निर्धारित मानदंडों में छूट में व्यक्तियों और टीमों की भागीदारी की सिफारिश की जाती है तो वह उचित निर्णय ले सकता है।

इसमें प्रावधान है कि यदि राष्ट्रीय खेल महासंघों का उद्देश्य केवल भागीदारी हो तथा उत्कृष्टता प्राप्त करना न हो तो मंत्रालय उनके द्वारा अनुशंसित नामों को मंजूरी नहीं दे सकता।

इसके अलावा, यदि विशिष्ट खेल विधाओं के विशेषज्ञ और भारतीय खेल प्राधिकरण को लगता है कि किसी खेल के लिए एशियाई चैंपियनशिप नियमों को दरकिनार करने और खिलाड़ियों को पात्रता मानदंडों को पूरा करने में मदद करने के लिए अनियमित अंतराल पर आयोजित की जा रही है, तो मंत्रालय भागीदारी को मंजूरी नहीं दे सकता है, खासकर यदि प्रतियोगिता का स्तर कम है या यदि आगामी एशियाई खेलों में भाग लेने वाले शीर्ष राष्ट्र उक्त प्रतियोगिता में अनुपस्थित हैं।

चयन मानदंडों में आगे यह प्रावधान है कि केवल वे खिलाड़ी, कोच और सहायक कर्मचारी ही भारतीय दल का हिस्सा होंगे, जिन्हें सरकार की लागत पर मंजूरी दी गई है। इनके अलावा कोई भी अतिरिक्त खिलाड़ी, कोच और सहायक कर्मचारी शामिल नहीं किए जाएंगे, भले ही इसमें सरकार का कुछ भी खर्च न हो।

चयन मानदंडों के लिए नीचे दिए गए लिंक पर जाएं:

https://yas.gov.in/sites/default/files/Letter%2024.09.2025%20Selection%20Criteria%20for%20Participa

convocation : रसद जितनी मज़बूत होगी, सीमाएँ भी उतनी ही मज़बूत होंगी : राजनाथ

नईदिल्ली। convocation : गति शक्ति विश्वविद्यालय का तीसरा दीक्षांत समारोह आज वडोदरा में आयोजित किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के रूप में वर्चुअल माध्यम से इस समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत अपने बुनियादी ढाँचे और रसद क्षेत्रों में अभूतपूर्व परिवर्तन देख रहा है, जो देश के आर्थिक विकास की मज़बूत नींव रख रहा है।
लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को 21वीं सदी के भारत के लिए एक महत्वपूर्ण बदलावकारी कदम बताते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि इसमें युवाओं के लिए अपार अवसर हैं और यह एक विकसित भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने युवाओं से एक विकसित भारत के निर्माण में जि़म्मेदारी लेने का आह्वान किया।
लॉजिस्टिक्स के महत्व को समझाते हुए, उन्होंने कहा कि लॉजिस्टिक्स सेवाएँ जितनी मज़बूत होंगी, हमारी सीमाएँ उतनी ही मज़बूत रहेंगी। जब हम देश के किसी एक हिस्से में निर्मित रक्षा उत्पाद या सैनिकों के लिए खाद्य आपूर्ति समय पर सीमा पर पहुँचाते हैं, तो सीमा प्रहरियों का मनोबल मज़बूत होता है।
सरकार की पहलों पर प्रकाश डालते हुए, राजनाथ सिंह ने कहा कि मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब बनाने और मिशन मोड योजनाओं को लागू करने जैसी पहलों ने लॉजिस्टिक्स लागत को काफी कम कर दिया है और डेटा-आधारित निर्णय लेने को प्रोत्साहित किया है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, केंद्रीय रेल मंत्री और गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अश्विनी वैष्णव ने पिछले 11 वर्षों में भारतीय रेलवे में हुए परिवर्तनकारी बदलावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में ही रेल नेटवर्क का विस्तार 5,300 किलोमीटर तक हुआ है, जिसमें सुरंग निर्माण का कुल विस्तार 368 किलोमीटर तक पहुँच गया है।
भारत इतिहास में ढाई शताब्दियों के कालखंड को छोडक़र, हमेशा से दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में से एक रहा है। उन्होंने गति शक्ति विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों के माध्यम से हर क्षेत्र पर केंद्रित मानव संसाधन का निर्माण करके भारत को एक बार फिर शीर्ष अर्थव्यवस्था बनाने पर ज़ोर दिया। गति शक्ति विश्वविद्यालय ने लगभग 40 विभिन्न औद्योगिक और शैक्षणिक संस्थानों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने भविष्य में समुद्री इंजीनियरिंग पर केंद्रित शोध पत्र तैयार करने और समुद्री उद्योगों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर करने का भी सुझाव दिया। अश्विनी वैष्णव ने स्नातक छात्रों को भारत की विकास यात्रा में योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया और इस क्षेत्र में नवाचार के महत्व पर बल दिया। उन्होंने गति शक्ति विश्वविद्यालय को “विकास का इंजन” बताया और छात्रों से 2047 तक विकसित भारत के विजन का समर्थन करने का आग्रह किया।
दीक्षांत समारोह में कुल 194 छात्रों ने विभिन्न विषयों में उपाधियाँ प्राप्त कीं। प्रत्येक पाठ्यक्रम से एक छात्र को शैक्षणिक उत्कृष्टता पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जबकि उत्कृष्ट परियोजना और सर्वश्रेष्ठ छात्र पुरस्कार भी प्रदान किए गए। गति शक्ति विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज चौधरी ने स्वागत भाषण दिया और संस्थान के पिछले तीन वर्षों के प्रदर्शन की जानकारी दी।
कार्यक्रम में वडोदरा के सांसद डॉ. हेमांग जोशी, राजमाता शुभांगिनी राजे गायकवाड़, भारतीय सेना और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी, छात्र और उनके अभिभावक उपस्थित थे।
गति शक्ति विश्वविद्यालय, माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन का एक उदाहरण है, जो परिवहन संबंधी शिक्षा, बहु-विषयक अनुसंधान और प्रशिक्षण पर केंद्रित भारत का पहला विश्वविद्यालय है। गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) के लिए प्रधानमंत्री का विजन, प्रधानमंत्री गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के व्यापक उद्देश्यों से गहराई से जुड़ा हुआ है
यह एक ऐसी योजना है जिसका उद्देश्य भारत के बुनियादी ढांचे और रसद क्षेत्र में क्रांति लाना है। प्रधानमंत्री गति शक्ति के लिए प्रधानमंत्री का दृष्टिकोण भारत के लिए एक समग्र, एकीकृत और कुशल बुनियादी ढाँचा पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है
जो पिछली कमियों को दूर करे और राष्ट्र को आर्थिक विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा की ओर अग्रसर करे। पीएम गति शक्ति का मूल सिद्धांत एकीकृत योजना और समन्वित कार्यान्वयन है, जो रेलवे, सडक़ मार्ग, बंदरगाहों और जलमार्ग जैसे क्षेत्रों में बुनियादी ढाँचा परियोजनाओं की एकीकृत योजना और समन्वित कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए 16 मंत्रालयों को एक ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर एक साथ लाता है।

railway link project : PM मोदी ने उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक परियोजना का किया उद्घाटन

नईदिल्ली। railway link project : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 06 जून 2025 को चिनाब और अंजी पुलों के साथ उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेलवे लिंक परियोजना का उद्घाटन किया। यह कश्मीर घाटी और जम्मू के बीच संपर्क स्थापित करने में एक ऐतिहासिक औ प्रमुख उपलब्धि है।
कटरा और श्रीनगर के बीच वंदे भारत एक्सप्रेस रेलगाड़ी इस मार्ग पर परिवहन का एक महत्वपूर्ण साधन बन गई है।
रेल लाइन का रखरखाव: नई रेलगाड़ी सेवाओं के अलावा, इस लाइन के शुरू होने से कश्मीर घाटी में रेल पटरियों के रख-रखाव की क्षमता में बुनियादी बदलाव आया है। रेलवे लिंक ने कश्मीर घाटी में रेल लाइन के रखरखाव वाली मशीनों की आवाजाही को सक्षम बनाया है। पहले रेल लाइनों का मानवीय रखरखाव के विपरीत, अब रखरखाव आधुनिक मशीनों से किया जा रहा है। इससे रेल लाइन की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
ट्रैक मशीनों की तैनाती में वृद्धि: कश्मीर घाटी में रेलवे लाइनों की रखरखाव गतिविधियों को मजबूत करने के लिए, मशीनों की तैनाती को निम्नानुसार बढ़ाया गया है :
1. जून 2025 की शुरुआत से एक टैम्पिंग मशीन तैनात की गई है। यह मशीन रेल पटरियों के उचित प्रकार से एक सीध में रखने और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए पटरियों के नीचे पत्थर के टुकड़े भरती है। इसने अब तक घाटी में लगभग 88 किलोमीटर रेलवे पटरियों के नीचे पत्थर के टुकड़े भरे हैं। इससे गिट्टी की गद्दी में सुधार हुआ है और इससे रेल यात्रा सुगम होगी।
2. इस मार्ग पर दो गिट्टी सफाई मशीनें (बीसीएम) भी तैनात की गई हैं। गिट्टी पटरियों पर जमा होने वाले पत्थर के टुकड़े हैं। यह रेलवे पटरियों को सहारा प्रदान करती है। ये मशीनें मिलकर काम कर रही हैं और लगभग 11.5 किलोमीटर पटरियों की गहराई से स्क्रीनिंग कर चुकी हैं। स्वच्छ गिट्टी से परिचालन सुरक्षित होता है।
3. जुलाई 2025 में घाटी में दो अतिरिक्त बीसीएम भेजी गईं। इन मशीनों ने गहराई से स्क्रीनिंग की है और लगभग 2.5 किलोमीटर पटरियों की सफाई की है।

4. गिट्टी की पुन: प्राप्ति द्वारा टैम्पिंग और डीप स्क्रीनिंग कार्य को पूरा करने के लिए, कठुआ, काजीगुंड, माधोपुर और जींद स्थित गिट्टी डिपो से कश्मीर घाटी के रेल्वे मार्ग पर 17 गिट्टी रेक भेजे गए और उतारे गए। परिणामस्वरूप, 19,000 घन मीटर गिट्टी भरी गई।

5. ट्रैक रिकॉर्डिंग कार (टीआरसी) और ऑसिलेशन मॉनिटरिंग सिस्टम (ओएमएस) रन भी क्रमश: जून, 2025 और जुलाई, 2025 में किए गए। रेलवे पटरी की गुणवत्ता का आकलन किया गया है और ध्यान देने योग्य रेलवे पटरी खंडों की पहचान की गई है।

इन सभी कार्यों से कश्मीर घाटी में रेलवे पटरियों की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

पूरे देश में रेलवे लाइन का उन्नयन: देश भर में रेलवे पटरियों को उन्नत किया जा रहा है। बेहतर ट्रैक सुरक्षा से यात्रा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। वर्ष 2025 की शुरुआत तक, भारत के 78 प्रतिशत ट्रैक 110 किलोमीटर प्रति घंटे या उससे अधिक की गति तक अपग्रेड हो चुके होंगे। वर्ष 2014 में यह संख्या सिर्फ 39 प्रतिशत थी। पिछले दशक में पटरियों की कुल लंबाई में वृद्धि के आलोक में इस उच्च अनुपात को देखा जाना चाहिए। वर्ष 2014 में पटरियों की कुल लंबाई 79,342 किलोमीटर से बढक़र 2025 में 1 लाख किलोमीटर से अधिक हो गई है।

ट्रैक रखरखाव कर्मचारियों के लिए कार्य स्थितियों में सुधार केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, “हम ट्रैक प्रौद्योगिकी और रखरखाव प्रथाओं को उन्नत करके ट्रैक की गुणवत्ता में सुधार करेंगे। आधुनिक ट्रैक फिटिंग, ट्रैक मशीनों का उपयोग, अल्ट्रा साउंड फ्रैक्चर डिटेक्शन मशीन, सडक़ सह रेल वाहन और एकीकृत ट्रैक माप मशीनें हमारे ट्रैक रखरखाव को वैज्ञानिक बना देंगी। एआई का उपयोग दोषों का पता लगाने में बड़े पैमाने पर किया जाएगा। इन तकनीकी परिवर्तनों से ट्रैक रखरखाव कर्मचारियों के लिए काम करने की स्थिति में काफी सुधार होगा।”

जम्मू-कश्मीर में यात्री कोच अपग्रेडेशन का नया दौर

ट्रैक अपग्रेडेशन के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर में यात्री डिब्बों के रखरखाव और उन्नयन में एक आदर्श बदलाव आया है।

जम्मू-श्रीनगर रेल लिंक के शुरू होने तक, कश्मीर घाटी का शेष भारतीय रेलवे नेटवर्क के साथ कोई रेल संपर्क नहीं था। कश्मीर घाटी में डीईएमयू/एमईएमयू रेकों को आवधिक अनुरक्षण और उन्नयन के लिए कार्यशाला में नहीं लाया जा सका।

सडक़ ट्रेलरों पर बडगाम से लखनऊ तक बोगियों को लाकर आवधिक मरम्मत (पीओएच) की जा रही थी। यह स्थिति सामान्य से कमज़ोर थी। पहली बार घाटी से रेक पीओएच के लिए रेल के माध्यम से लखनऊ लाए गए हैं।

बडगाम के सभी रेकों की स्थिति में समयबद्ध तरीके से सुधार किया जा रहा है। निम्नलिखित रेकों का अनुरक्षण और उन्नयन किया जा रहा है

1. एक मेमू रेक का पीओएच पूरा हो गया है। उन्नत मेमू रेक अब घाटी में चालू है। एक अन्य मेमू रेक का पीओएच जुलाई, 2025 के अंत तक पूरा होने की संभावना है।

2. चारबाग कारखाने में एक डेमू रेक का पीओएच पूरा हो गया है। चारबाग कारखाने में एक और डेमू रेक का पीओएच कार्य जारी है। इसके अगस्त, 2025 के मध्य तक पूरा होने की संभावना है।

3. जालंधर शेड में एक और डेमू रेक का नवीकरण किया जा रहा है। इसके जुलाई, 2025 के अंत तक चालू होने की संभावना है।

4. चारबाग कारखाने और जालंधर शेड में चार और डीईएमयू रेकों के उन्नयन की योजना बनाई गई है।

किए जा रहे उन्नयन कार्यों का विवरण निम्नानुसार है:

* एक नए जीवंत रंग के साथ पूरे रेक के विरोधी भित्तिचित्रों के साथ बाहरी पीयू पेंटिंग

* शौचालयों में बायो टैंक लगाना

* शौचालयों के समुचित कार्य के लिए नए पानी चढ़ाने वाले पंपों की फिटिंग

* सीटों की मरम्मत और पॉली कार्बोनेट सीटों के साथ प्रतिस्थापन

* नए स्टैंडिंग हैंडल का प्रावधान

* पीवीसी फर्श का नवीनीकरण

* सभी स्टेनलेस स्टील की वस्तुओं की बफिंग

* सभी खिड़कियों की मरम्मत और हॉपर प्रकार की खिड़कियां सुनिश्चित करना

* सार्वजनिक पता और यात्री सूचना प्रणाली का समुचित कार्य सुनिश्चित करना

* पानी चढ़ाने वाले उपकरणों की आपूर्ति के लिए पर्याप्त विद्युत और स्विच पैनल पर स्वचालित परिवर्तन का प्रावधान। इससे गर्मी के मौसम में जनरेटर की आपूर्ति न होने पर भी पानी चढ़ाने वाले उपकरणों का निर्बाध संचालन सुनिश्चित होगा।

* ए और सी प्रकार के मोबाइल चार्जिंग सॉकेट (इनबिल्ट शॉर्ट सर्किट और अधिभार संरक्षण के साथ) और पंखों के लिए मॉड्यूलर स्विच का प्रावधान

* सभी पंखों और ट्यूब लाइट्स की मरम्मत और नवीनीकरण

कश्मीर घाटी में यात्री सवारी डिब्बों के उन्नयन का कार्य 31 अगस्त, 2025 तक पूरा कर लिया जाएगा। सेवा में सभी रेकों को इस समय सीमा के भीतर पुनर्निर्मित और उन्नत किया जाएगा।

भारतीय रेलवे को अक्सर ‘राष्ट्र की जीवन रेखा’ कहा जाता है। जम्मू-श्रीनगर रेल लाइन के शुरू होने और चल रहे उन्नयन कार्यों के साथ, यह जम्मू-कश्मीर को एक नई जीवन रेखा प्रदान करेगा।

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tokhan’s two-day visit : केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन का चेन्नई, रामेश्वरम और मदुरै का दो दिवसीय दौरा

नई दिल्ली। tokhan’s two-day visit : भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य राज्यमंत्री तोखन साहू 19 व 20 जुलाई, 2025 को तमिलनाडु के चेन्नई, रामेश्वरम और मदुरै जिलों का दौरा करेंगे। इस दो दिवसीय दौरे के दौरान वे मंत्रालय की शहरी विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करेंगे, प्रमुख धार्मिक स्थलों के दर्शन करेंगे तथा भारतीय जनता पार्टी के स्थानीय पदाधिकारियों से संगठनात्मक चर्चा करेंगे।

चेन्नई में उनके कार्यक्रमों में कपालीश्वरर मंदिर में पूजा-अर्चना, राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में भागीदारी तथा CPWD, HUDCO एवं NBCC से संबंधित कार्यों की विभागीय समीक्षा शामिल है। इसके अतिरिक्त, वे तमिलनाडु भाजपा के वरिष्ठ पदाधिकारियों से मुलाकात कर संगठनात्मक विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

रामेश्वरम में साहू रामनाथस्वामी मंदिर में दर्शन करेंगे एवं पवित्र तीर्थ स्नान के पश्चात स्थानीय स्तर पर चल रही योजनाओं की प्रगति पर भी जानकारी प्राप्त करेंगे।

tokhan’s two-day visit : केंद्रीय राज्यमंत्री तोखन का चेन्नई, रामेश्वरम और मदुरै का दो दिवसीय दौरा

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मदुरै प्रवास के दौरान वे प्रसिद्ध मीनाक्षी अम्मन मंदिर में पूजा-अर्चना करेंगे और मदुरै एवं रामनाथपुरम जिलों के भाजपा पदाधिकारियों के साथ संगठन एवं विकास कार्यों की समीक्षा बैठक में भाग लेंगे।

public hearing and dialogue : केंद्रीय मंत्री तोखन ने 55 व्यक्तियों एवं समूहों से भेंट कर उनकी समस्याएं, सुझाव और अभ्यावेदन सुने

नई दिल्ली। public hearing and dialogue :  केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य राज्य मंत्री तोखन साहू आज दिनांक 18 जुलाई 2025 को भारतीय जनता पार्टी के केंद्रीय कार्यालय, नई दिल्ली में प्रातः 10:30 बजे से सायं 5:00 बजे तक आम जनता एवं भाजपा कार्यकर्ताओं से संवाद हेतु उपस्थित रहे।

निर्धारित कार्यक्रम के अंतर्गत श्री साहू ने कुल 55 व्यक्तियों (कुछ समूहों सहित) से भेंट कर उनकी समस्याएं, सुझाव और अभ्यावेदन सुने। प्राप्त आवेदनों में से कई को त्वरित कार्रवाई हेतु संबंधित विभागों/मंत्रालयों को अग्रेषित किए जाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।

public hearing and dialogue : केंद्रीय मंत्री तोखन ने 55 व्यक्तियों एवं समूहों से भेंट कर उनकी समस्याएं, सुझाव और अभ्यावेदन सुने

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कुछ समस्याओं का समाधान मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से दूरभाष या संदेश के माध्यम से संपर्क स्थापित कर किया गया।

इस जनसंवाद कार्यक्रम की विस्तृत रिपोर्ट पार्टी संगठन को प्रेषित की जा रही है।