गौरेला पेण्ड्रा मरवाही । ग्राम जोहार अभियान के तहत जनचौपाल के बाद कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी और पुलिस अधीक्षक एस आर भगत ने पचास सीटर आदिवासी बालक आश्रम पंडरीपानी का अवलोकन किया। उन्होंने बच्चों के शयन कक्ष में जाकर उनके रहने एवं पढ़ाई-लिखाई की व्यवस्था का अवलोकन किया। कलेक्टर ने बच्चों को पुस्तक पढ़वाकर उनके ज्ञान की परख की तथा छात्रावास अधीक्षक को आश्रम व्यवस्था के साथ ही बच्चों को नियमित रूप से पढ़ाने के भी निर्देश दिए। कलेक्टर ने बच्चों के बिस्तर, चादर, तकिया, गर्म कपड़े, साफ-सफाई आदि व्यवस्थाओं की जानकारी ली। उन्होंने बच्चों को स्वेटर, कॉपी एवं पेंसिल देकर उनका मनोबल बढ़ाया और मन लगाकर पढ़ाई करने कहा। इस अवसर पर जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, एसडीएम पेण्ड्रारोड विक्रांत अंचल, जनपद सीईओ गौरेला शुभा मिश्रा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास गोपेश मनहर सहित अन्य जिला अधिकारी उपस्थित थे।
Month: December 2025
चारों ओर जंगलों एवं पहाड़ से घिरे बैगा बसाहट ठूठानार में जिला प्रशासन द्वारा चौपाल लगाकर ग्रामीणों को दी गई योजनाओं की जानकारी
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मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आवेदनों का निराकरण करने कलेक्टर ने अधिकारियों को दिए निर्देश
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नशा मुक्त जिला बनाने दिलाई गई शपथ
गौरेला पेण्ड्रा मरवाही । ग्राम जोहार अभियान के तहत बुधवार को गौरेला विकासखण्ड के ग्राम पंचायत पंडरीपानी के आश्रित गांव ठूठानार जो जंगलों एवं पहाड़ों से घिरा बैगा बसाहट गांव है, में जिला प्रशासन की टीम के साथ कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी और पुलिस अधीक्षक एस आर भगत ने भेलवा पेड़ के नीचे चौपाल लगाकर ग्रामीणों की मांगों एवं समस्याओं से रूबरू हुए। कलेक्टर ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि शासन की सभी योजनाओं को जान सकें और पात्रतानुसार उसका लाभ उठा सकें, इसके लिए जिला प्रशासन की टीम आप लोगों के बीच पहुंचकर विभागीय योजनाओं और उसके लाभ के बारे में बताए हैं। उन्होंने आजीविका गतिविधियों के लिए सहायता एवं अनुदान राशि, मुर्गी, बकरी, सुअर पालन के लिए शेड निर्माण, स्मार्ट कार्ड से इलाज की सुविधा सहित अनेक हितग्राहीमूलक योजनाओं का लाभ लेने ग्रामीणों को प्रेरित किया।
कलेक्टर ने महतारी वंदन की राशि से हर महीने ढाई सौ रूपये, सुकन्या समृद्धि योजना के तहत खाता खुलवाकर जमा करने और योजना का फायदा लेने कहा। साथ ही अपने बच्चों को प्रतिदिन स्कूल भेजने और आंगनबाड़ी केंद्रो में दी जाने वाली सुविधाओं का लाभ लेने कहा। साथ ही ग्रामीणों द्वारा दिए गए विभिन्न मांगों एवं समस्याओं से संबंधित आवेदनों का निराकरण करने अधिकारियों को निर्देश दिए। कलेक्टर ने 10 दिसम्बर को मनाये जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस की बधाई दी और अधिकारों के साथ कर्तव्यों का बोध भी कराया। उन्होंने जनचौपाल में उपस्थित सभी लोगों को नशा मुक्त जीपीएम जिला बनाने के लिए दाहिना हाथ आगे बढ़वाकर शपथ दिलाई। जनचौपाल की शुरूआत जनजातीय समाज के महान नेता शहीद वीरनारायण सिंह की जयंती पर उनके छायाचित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित कर किया गया। जनचौपाल में कृषि, उद्यानिकी, पशुधन, आदिम जाति कल्याण, समाज कल्याण, पीएमजीएसवाई, खाद्य, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, वन, राजस्व, पुलिस एवं लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं से अवगत कराया। उन्होंने कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए एग्रीस्टेक में पंजीयन कराने, रबी फसल, चना, मसूर, राहर, मूंग के समर्थन मूल्य, केसीसी कार्ड से लोन लेकर खाद-बीज खरीदने, 25 प्रतिशत अंशदान पर कृषि कार्य हेतु पंप एवं पाइप देने की योजना से अवगत कराया। इसी तरह उद्यानिकी फसलों से आय बढ़ाने, आजीविका गतिविधियों, पेंशन, सहायक उपकरण, उज्जवला गैस कनेक्शन, स्वास्थ्य परीक्षण एवं उपचार, मातृत्व वंदन, मुख्यमंत्री कन्या विवाह, पूरक पोषण, लघु वनोपज संग्रहण, फौती-नामांतरण, बटवारा, सीमांकन, आरबीसी 6-4, ऑनलाइन ठगी से सतर्क रहने आदि योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया गया। इस अवसर पर ठंड से बचने बच्चों को स्वेटर और वृद्धजनों को छड़ी वितरित किया गया। जनचौपाल में भारतीय वनसेवा के अधिकारी गौतम पड़िभार, जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल, एसडीएम पेण्ड्रारोड विक्रांत अंचल, सीईओ गौरेला शुभा मिश्रा, सीएमएचओ डॉ. रामेश्वर शर्मा, सहायक आयुक्त आदिवासी विकास गोपेश मनहर सहित विभिन्न विभागों के जिला, अनुविभाग एवं खण्ड स्तरीय अधिकारी उपस्थित थे।
अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस पर संगोष्ठि आयोजित
वक्ता के रूप में कलेक्टर, एसपी, जज एवं अधिवक्ता ने रखी अपनी बात
गौरेला पेण्ड्रा मरवाही । अंतर्राष्ट्रीय मानव अधिकार दिवस के अवसर पर बुधवार को मल्टीपरपस स्कूल पेण्ड्रा के असेम्बली हॉल में संगोष्ठि का आयोजन किया गया। पुलिस विभाग के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम में वक्ता के रूप में कलेक्टर, एसपी, जज एवं अधिवक्ता ने अपनी बातें रखीं। कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने कहा कि मानव अधिकार मानवता, समानता, गरिमा का प्रतीक है। भारतीय संविधान ने हर नागरिक को मौलिक अधिकार दिए गए हैं। अधिकार और कर्तव्य एक दूसरे के पहलू होते हैं। उन्होंने कहा कि सभी को अपने अधिकारों के प्रति सजग, सचेत रहना चाहिए। पुलिस अधीक्षक श्री एस आर भगत ने संगोष्ठि की आवश्यकता क्यों पड़ती है, कि सवाल के साथ ही मानव अधिकारों का उल्लंघन होने पर अपनी आवाज बुलंद करने कहा। उन्होंने संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों को जानने, समझने और अपने जिम्मेदारियों का निर्वहन सही ढंग से करने की बात कही।
कार्यक्रम में अपर जिला सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल ने कहा कि मानव अधिकार मनुष्य की गरिमा, कल्याण और विकास पर आधारित है। उन्होंने कहा कि अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहें, अधिकारों के साथ कर्तव्य भी निभाएं और देश के कानून का सम्मान करें। उन्होंने मानव अधिकार के उल्लंघन होने पर उसे संरक्षित करने के लिए गठित मानव अधिकार आयोग की भूमिका के बारे में प्रकाश डाला। उन्होंने मानव अधिकार आयोग की अनुशंसा पर जिन बच्चों का आंख कमजोर है, उन्हें कक्षा में सबसे सामने बैठाने एवं नर्सिंग एक्ट बनाए जाने की जानकारी दी। साथ ही गरीब एवं कमजोर वर्गों के लिए राष्ट्रीय, राज्य, उच्च न्यायालय, जिला एवं तालुका स्तर पर संचालित निःशुल्क विधिक सहायता सेवा के बारे में बताया।
इसी तरह मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी महेश बाबू साहू और जिला बार काउंसिल के सचिव अधिवक्ता पवन त्रिपाठी ने भी मानव अधिकार पर अपनी बातें रखी। कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद पेण्ड्रा के अध्यक्ष राकेश जालान, जिला पंचायत उपाध्यक्ष राजा उपेन्द्र बहादुर सिंह, जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे सहित अधिवक्तागण, एनसीसी एवं डाइट के विद्यार्थी, मीडिया तथा नागरिकगण उपस्थित थे। कार्यक्रम का शुभारंभ विद्या की देवी मां सरस्वती के छायाचित्र की पूजा-अर्चना एवं दीप प्रज्जवलन कर किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ओम चंदेल ने आभार व्यक्त किया।
लाइट वेट टेनिस बॉल की भारत देश की सबसे बड़ी टूर्नामेंट विनीत कप होगी 11 लाख रुपए इनामी,स्वर्गीय ऊषा देवी भंडारी की स्मृति में आयोजित होगा टूर्नामेंट
बिलासपुर। रमन दुबे । शहर की बहुप्रतीक्षित स्व.उषा देवी भंडारी जी की स्मृति में करवाए जाने वाले विनीत कप का आयोजन का आगाज 28 दिसंबर से होगा। इस आयोजन का इंतजार बिलासपुर के अलावा प्रदेश भर के क्रिकेट प्रेमियों को रहता है। भव्य आतिशबाजी और भव्य व्यवस्थाओं के साथ आईपीएल की तर्ज पर होने वाला यह आयोजन लाईट वेट बॉल में मध्य भारत की सबसे बड़ी क्रिकेट प्रतियोगिता थीं। जो इस वर्ष 11 लाख रुपए की इनामी राशि के साथ लाइट वेट बॉल में देश की सबसे बड़ी क्रिकेट प्रतियोगिता बन गई है। यह आयोजन 28 दिसंबर से शुरू होकर 11 जनवरी तक चलेगा। 11 जनवरी को फाइनल मैच खेला जाएगा।
प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के अलावा देश के अलग अलग राज्यों से टीमें भाग लेने आती है। इसके अलावा दुबई और ओमान जैसे देशों की इंटरनेशनल टीमें भी इस आयोजन में खेल चुकी हैं। विनीत कप आयोजन समिति के प्रमुख ईशान भंडारी निक्कू ने प्रेस वार्ता करते हुए आयोजन के संबंध में बताया कि अपनी स्वर्गीय माता उषा देवी भंडारी जी की स्मृति में मेरे द्वारा यह आयोजन करवाया जाता है। इससे पूर्व मेरे द्वारा अपनी माता जी की स्मृति में कबड्डी प्रतियोगिता का आयोजन करवाया जा चुका है। विनीत कप क्रिकेट मैच के आयोजन का यह शानदार 13 वां वर्ष हैं। इस बार इसमें 11 लाख 11 हजार 111 रुपए और चमचमाती ट्राफी पहला इनाम रखा गया है। जबकि मैन ऑफ द सीरीज में बुलेट रखा गया है। ईशान भंडारी ने बताया कि हमारे आयोजन की प्राथमिकता निष्पक्ष खेल है। जिसके लिए लाइव प्रसारण और थर्ड अंपायर की भी व्यवस्था रखी जाती है। महाराष्ट्र की टीम tenniscricket.in के द्वारा अपने वैनिटी वेन के साथ उपस्थित रहकर लाइव प्रसारण किया जाएगा। आयोजन में दर्शकों के मनोरंजन और खिलाड़ियों तथा अतिथियों के स्वागत के लिए भव्य आतिशबाजी की व्यवस्था प्रतिवर्ष की तरह होगी। खिलाड़ियों के उत्साहवर्धन तथा दर्शकों के मनोरंजन हेतु आईपीएल की तर्ज पर चियर लीडर्स की व्यवस्था रहेगी। ईशान भंडारी ने बताया कि देशभर से कुल 32 टीमों को टूर्नामेंट में प्रवेश दिया जाएगा। एंट्री फीस जिसके लिए 40 हजार रूपये रखी गई है। कुल 31 मैच आयोजन के दौरान होंगे, प्रत्येक मैच में मैन ऑफ द मैच भी दिया जाएगा। दस ओवरों का लीग मैच होगा जबकि सेमीफाइनल 12 और फाइनल 14 ओवरों का होगा। आयोजन के दौरान आयोजन समिति द्वारा समाज के विभिन्न वर्गों और पत्रकारों के लिए सद्भावना मैच कभी आयोजन किया जाएगा। जबकि दूसरा इनाम चार लाख चवालीस हजार चार सौ चवालीस रुपए रहेगा।
आयोजन समिति के प्रमुख ईशान भंडारी ने बताया कि हमारे आयोजन के लिए ही क्षेत्रीय विधायक सुशांत शुक्ला की मांग पर डिप्टी सीएम और वर्तमान खेल मंत्री अरुण साव जी ने इस मैदान में फ्लड लाइट की घोषणा की थी। उनकी घोषणा अमल में लाते हुए यहां फ्लड लाइट लग चुका है,जिसका लाभ हमें इस वर्ष के मैच में मिलेगा। बाहर से आने वाली टीमों की रुकने और अन्य व्यवस्थाएं समिति द्वारा की जाती है। प्रत्येक मैच में मैन ऑफ द मैच का इनाम सहित बेस्ट बॉलर,बेस्ट बैट्समैन,बेस्ट फील्डर जैसे अलग अलग इनाम रखे गए हैं। ईशान भंडारी ने बताया कि इस आयोजन को करवाने की जितनी खुशी हमें मिलती है उतना ही इंतजार शहर वासियों एवं खिलाड़ियों को इस प्रतियोगिता का रहता है। इस आयोजन का एकमात्र उद्देश्य है कि अधिक से अधिक खेल प्रतिभाएं इस आयोजन के माध्यम से सामने आए और साथ ही हमारे बिलासपुर और छत्तीसगढ़ का नाम पूरे देश में गूंजे।
परिवर्तन से गुजरती परंपरा: भारतीय हस्तशिल्प गढ़ रहे हैं आधुनिक डिजाइन की पहचान
परिवर्तन को दर्ज करने वाला क्षण
श्री पबित्रा मार्गेरिटा
(लेखक कपड़ा और विदेश राज्य मंत्री हैं)
ग्रामीण असम में शिल्पकारों की एक बस्ती की हाल की यात्रा के दौरान एक सामान्य से दृश्य में भारत के हस्तशिल्प तंत्र में आ रहे गहरे बदलाव की झलक दिखाई दी। अनेक शिल्पकार सूखी हुई जलकुंभी को बुन रहे थे। लेकिन ये शिल्पकार वे परंपरागत टोकरियां नहीं बना रहे थे जिन्हें उनका समुदाय सदियों से बुनता आ रहा है। इसके बजाय वे कॉरपोरेट बैठकों के लिए खूबसूरत ऑफिस फोल्डर बना रहे थे। उनके हाथ पीढ़ियों से जारी कला को आगे बढ़ाते हुए चिरपरिचित लय में चल रहे थे। लेकिन उनके उत्पाद और उद्देश्य, दोनों ही पूरी तरह से बदल चुके हैं।
हम 08 से 14 दिसंबर, 2025 तक राष्ट्रीय हस्तशिल्प दिवस मना रहे हैं। ऐसे में, यह दृश्य भारत के हस्तशिल्प परिदृश्य में एक मूक क्रांति का प्रतीक है। हमारी जीवंत हस्तशिल्प परंपराओं में एक महत्वपूर्ण बदलाव आ रहा है। उनका नई जगहों, नए बाजारों और नूतन भविष्य में विस्तार हो रहा है। मूल विशेषताओं की शुद्धता बरकरार रहने के बावजूद माध्यमों और स्वरूपों में जो विकास हो रहा है उसकी कल्पना एक दशक पहले शायद ही की जा सकती थी।
जीवंत ज्ञान प्रणाली के रूप में हस्तशिल्प
इस विकास को समझने के लिए यह स्वीकार करना महत्वपूर्ण है कि भारतीय हस्तशिल्प सिर्फ सुंदरता की वस्तु नहीं रहे हैं। वे सांस्कृतिक पहचान और सामुदायिक परंपराओं में गहराई से रची-बसी जीवंत ज्ञान प्रणालियां हैं। मधुबनी में महिलाएं परंपरागत तौर पर त्यौहारों, शादियों और जीवन संस्कारों के दौरान ताजा लेपी गई दीवारों पर चावल के पेस्ट से पेंटिंग बनाती थीं। इन चित्रों में मछली को जनन क्षमता और मोर को प्रेम का प्रतीक माना जाता था। चित्रण अपने मूल में व्यक्तिगत के बजाय सामूहिक हुआ करता था। गोंड समुदाय के लिए पेंटिंग उसके जीव संबंधी विश्वासों तथा जंगलवासी प्राकृतिक शक्तियों और रक्षा करने वाली आत्माओं से जुड़ी है। उनकी कला सिर्फ सुंदर ही नहीं, बल्कि वाचक परंपरा में जड़ों वाला अनुष्ठानिक ब्रह्मांड विज्ञान भी है।
स्वरूपों को हमेशा उपयोग ने गढ़ा है। असम में जलकुंभी को सुखाने के बाद बुन कर घर में काम आने वाली टोकरियां बनाई जाती हैं। कर्नाटक में लाख के लेप वाले चन्नपटना काष्ठ खिलौने बच्चों के खेलने के काम आते हैं। उन्हें पीढ़ियों से खराद पर बनाया जाता रहा है। माध्यम, स्वरूप और आकृति को एकदूसरे से अलग नहीं किया जा सकता। वे विशिष्ट अनुष्ठानिक और कार्यात्मक संदर्भों से आबद्ध हैं।
परंपरा का आधुनिक अभिव्यक्ति में विस्तार
आज जो हो रहा है, वह परंपरा से अलग नहीं, बल्कि उसका विस्तार है। मूलभाव, पैटर्न और तकनीकें अभी भी पहचानी जा सकती हैं, लेकिन उनके प्रयोग आश्चर्यजनक रूप से समकालीन हो गए हैं। यह बदलाव केवल एक आयामी नहीं, बल्कि बहु-आयामी है। मधुबनी की मछली, जो कभी एक बड़ी प्रजनन कथा का हिस्सा हुआ करती थी, अब तकिए, टोट बैग और फोन कवर पर दिखाई देती है, जिसे आज के समय के अनुसार इस्तेमाल के लिए नया रूप दिया गया है। गोंड के गहरे रंगों वाले जानवर और पौधे और ज्यामिति डिज़ाइन आज अपने पौराणिक संदर्भ से बाहर भी सराहे जाते हैं।
हालांकि, सबसे बड़ा परिवर्तन माध्यम में आया है। जलकुंभी आज कॉर्पोरेट फ़ोल्डर और डिज़ाइनर हैंडबैग का रूप ले रही है। मधुबनी कला मिट्टी की दीवारों से हटकर लकड़ी के फर्नीचर, वस्त्रों और चमड़े के सहायक उपकरणों पर की जाने लगी है। चन्नपटना शिल्प, जो कभी केवल खिलौनों में ही दिखता था, अब सजावटी नक्शों, झूमरों, गृह सज्जा और डिज़ाइनर फ़र्नीचर में दिखाई देता है। पारंपरिक लाख का अभी भी इस्तेमाल हो रहा है लेकिन उसका रूप पूरी तरह आधुनिक हो गया है। यह बदलाव आज के अनुकूल है, न कि उसका कमजोर पड़ना।
भारतीय शिल्प पर आधारित फैशन की वैश्विक स्तर पर एक प्रमुख पहचान बन गयी है, जिसमें पारंपरिक कढ़ाई को ‘पेरिस हौते कॉउचर वीक’ में प्रदर्शित किया गया था। नेशनल गैलरी ऑफ विक्टोरिया जैसे संग्रहालयों में अब “ट्रांसफ़ॉर्मिंग वर्ल्ड्स” जैसी प्रदर्शनियाँ गोंड और मधुबनी कला और उनके आधुनिक रूपों को उनकी संस्कृति या समाज के संदर्भों के बजाय समकालीन कला के तौर पर चित्रित कर रही हैं।
नेतृत्व और सरकारी हस्तक्षेप परिवर्तन को गति दे रहे हैं
इस परिवर्तन को राष्ट्रीय नेतृत्व और रणनीतिक सरकारी हस्तक्षेपों से महत्वपूर्ण समर्थन मिला है। माननीय प्रधानमंत्री के नेतृत्व ने इस आंदोलन को असाधारण गति दी है। उनका ‘वोकल फॉर लोकल’ और ‘लोकल टू ग्लोबल’ का बार-बार किया गया आह्वान कारीगरों के प्रति उनके गहरे लगाव को दर्शाता है। वह हमेशा नागरिकों से स्थानीय उत्पाद खरीदने का आग्रह करते हैं, जैसा कि उन्होंने स्वयं कहा है कि: “जब हम ऐसा करते हैं, तो हम केवल सामान नहीं खरीदते हैं; हम एक परिवार के लिए आशा लाते हैं, एक कारीगर की कड़ी मेहनत का सम्मान करते हैं, और एक युवा उद्यमी के सपनों को पंख देते हैं।” उन्होंने अपने नवीनतम “मन की बात” संबोधन में बताया कि वह विश्व के नेताओं के साथ मुलाकातों के दौरान जानबूझकर हाथ से बने भारतीय उत्पादों को ही उपहार के रूप में क्यों देते हैं। ऐसा करके वह यह सुनिश्चित करते हैं कि वह जहाँ भी जाएँ उनके साथ साथ भारत की समृद्ध शिल्प विरासत भी जाये। उन्होंने कहा की कि यह केवल प्रतीकात्मक नहीं है, बल्कि यह उनकी ओर से भारत की कलात्मक विरासत को प्रदर्शित करने का एक तरीका है ताकि हमारे कारीगरों की प्रतिभा को दुनिया भर के सामने लाया जा सके।
विभिन्न सरकारी पहलें इस परिवर्तन को गति दे रही हैं। वस्त्र मंत्रालय, विकास आयुक्त (हस्तशिल्प) के माध्यम से, राष्ट्रीय हस्तशिल्प विकास कार्यक्रम के तहत कारीगरों को कौशल विकास, क्लस्टर-आधारित प्रशिक्षण कार्यक्रम, विपणन सहायता, अवसंरचना और प्रौद्योगिकी सहायता और ऋण उपलब्ध कराकर सीधे सहायता प्रदान कर रहा है। राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान(निफ्ट) ने भारत भर में अपने 19 परिसरों के माध्यम से, शिल्पकारों और समकालीन डिजाइनरों के बीच सेतु का निर्माण किया है ताकि आधुनिक डिजाइनों में हमारी परम्परा की झलक भी मिल सके। भौगोलिक संकेत रजिस्ट्री ने 366 से अधिक हस्तशिल्पों को संरक्षित किया है। इससे सामुदायिक प्रतिभा की सुरक्षा सुनिश्चित होती है और उन्हें सही में मान्यता मिलती है।
मैं असम राज्य से हूँ, वहां के कई पारंपरिक हस्तशिल्पों जैसे कि सर्थेबारी मेटल क्राफ्ट, माजुली मास्क, बिहू ढोल, जापी, पानी मेतेका, आशारिकांदी टेराकोटा और बोडो समुदाय के कई अन्य हस्तशिल्पों को हाल ही में भौगोलिक संकेत (जीआई टैग) पंजीकरणों की मान्यता मिली है जो कि बहुत लंबे समय से अपेक्षित थी। प्रत्येक पंजीकरण यह दर्शाता है कि कैसे असम या पूरे भारत के हर कोने में विविधता की झलक मिलती है जो दशकों तक उपेक्षित रहने के बाद, आज राष्ट्रीय मंच पर एक नया स्थान पा रही है।
विकसित भारत के लिए एक गतिशील और विकसित होती विरासत
भारत के हस्तशिल्प विकास में सबसे बड़ा सबक यह है कि परंपरा स्थिर नहीं है बल्कि यह अनुकूलित होती है, अवशोषित होती है और आगे बढ़ती है। जलकुंभी की घरेलू टोकरियों से लेकर अन्य वैश्विक सामानों तक की यात्रा हमारे कारीगर समुदायों के व्यवहारिकता और रचनात्मकता का प्रतीक है। जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित भारत के अपने दृष्टिकोण को साकार करने की ओर बढ़ रहा है, वैसे ही हस्तशिल्प क्षेत्र विरासत और नवोन्मेष, ग्रामीण आजीविका और वैश्विक आकांक्षा, पहचान और आधुनिकता के एक शक्तिशाली चौराहे पर खड़ा है।
यह आंदोलन जैसे-जैसे मज़बूत होता जा रहा है, हम सबकी भी ज़िम्मेदारी बनती है कि हर कारीगर को सशक्त बनाया जाए और हमारी प्रत्येक परंपरा फलती-फूलती रहे। भारत की हस्तशिल्प विरासत सिर्फ़ एक याद बनकर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि हमारी पहचान एक जीवित अभिव्यक्ति के रूप में फलनी-फूलनी चाहिए। हर बार जब कोई परिवार स्थानीय चीज़ें चुनता है या हर बार जब कोई डिज़ाइनर किसी हस्तशिल्प समूह के साथ भागीदारी करता है, तो वह आत्मनिर्भर भारत की भावना को ही आगे बढ़ाता है। ये वही सधे हुए सृजनशील और सदियों की समझदारी से संजोये हुए हाथ है जो भारत की आने वाली पीढ़ियों का मार्ग दर्शन करेंगे।
बढ़े समर्थन मूल्य और सुविधाजनक खरीदी व्यवस्था ने किसानों की आय में बढ़ोतरी का दिया विश्वास
कोरबा । मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार किसानों की आय दोगुनी करने की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। सर्वाधिक समर्थन मूल्य, माइक्रो एटीएम, त्वरित भुगतान प्रणाली, ऑनलाइन टोकन, उपार्जन केंद्रों में सुव्यवस्थित व्यवस्था और बेहतर सुविधा की मजबूती जैसे प्रयासों ने किसानों के मन में सरकार के प्रति विश्वास को और सुदृढ़ किया है। सरकार का लक्ष्य है कि हर किसान बिना किसी कठिनाई के अपनी उपज बेच सके तथा उसे मेहनत का पूरा और पारदर्शी मूल्य मिल सके।
गाँव तालापार के किसान श्री बसंत सोनी उन अनेक किसानों में से एक हैं, जिन्होंने छत्तीसगढ़ सरकार की पारदर्शी और सुविधाजनक धान खरीदी व्यवस्था का लाभ उठाते हुए अपनी मेहनत की उपज को सम्मानजनक मूल्य पर बेचा है। 45 डिसमिल भूमि में खेती करने वाले श्री सोनी इस वर्ष कुल 8 क्विंटल 80 किलोग्राम धान लेकर बक्साही उपार्जन केंद्र पहुँचे।
श्री सोनी बताते हैं कि पिछले वर्ष भी उन्होंने लगभग इतनी ही उपज विक्रय की थी, उनका कहना है कि 3100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से उन्हें अपनी उपज का उचित मूल्य मिला जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति और बेहतर होगी, वे कहते हैं छत्तीसगढ़ सरकार ने किसानों के लिए जो व्यवस्थाएँ की हैं, वे वास्तव में सराहनीय हैं। उपार्जन केंद्र में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होती। तौल समय पर हो जाती है और भुगतान भी जल्दी मिल जाता है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने जो मूल्य बढ़ाया है, वह हम किसानों के लिए बड़ी राहत है। प्रक्रिया के दौरान उन्हें केंद्र में सुचारू तौल सुविधा, माप-तौल में शुद्धता, प्रतीक्षा के दौरान पेयजल एवं बैठने की व्यवस्था तथा टोकन प्रणाली के माध्यम से भीड़ रहित संचालन जैसी व्यवस्थाएँ मिलीं। इन सब सुविधाओं ने उपज विक्रय को सरल और पारदर्शी बना दिया।
उन्होंने आगे बताया कि इस बार की बेहतर कीमत से उनकी खेती में निवेश बढ़ेगा। वे आने वाले मौसम में अधिक उत्पादन हेतु आधुनिक कृषि तकनीक और गुणवत्तापूर्ण बीजों का उपयोग करने की योजना बना रहे हैं। इससे न केवल उनकी आय में वृद्धि होगी, बल्कि कृषि उत्पादकता भी मजबूत होगी।
कलेक्टर ने दीपका विस्तार परियोजना अंतर्गत अर्जित भूमि में खरीदी बिक्री व नामांतरण पर रोक लगाने के दिए निर्देश
हरदीबाजार, सरइसिंगार, रेंकी, कटकीडबरी व नवापारा में भूमि खरीदी, बिक्री, रजिस्ट्री, नामांतरण पर लगा रोक
कोरबा । कलेक्टर अजीत वसंत ने दीपका विस्तार परियोजना अंतर्गत कोयला धारक क्षेत्र के तहत स्वीकृत 40 मिलियन टन कोयला उत्पादन हेतु ग्राम हरदीबाजार (भाग), सरइसिंगार (भाग), रेंकी (भाग), कटकीडबरी (भाग), एवं नवापारा (भाग) का कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन एवं विकास) अधिनियम 1957 के तहत उक्त ग्रामों की भूमियों का खरीदी बिकी, रजिस्ट्री, नामांतरण पर रोक लगाने के निर्देश दिए है।
जारी निर्देशानुसार एसईसीएल दीपका क्षेत्र द्वारा दीपका विस्तार परियोजना अंतर्गत कोयला धारक क्षेत्र (अर्जन एवं विकास) अधिनियम 1957 के तहत स्वीकृत 40 मिलियन टन कोयला उत्पादन हेतु ग्राम हरदीबाजार (भाग), सरइसिंगार (भाग), रेंकी (भाग), कटकीडबरी (भाग), एवं नवापारा (भाग) की कुल भूमि रकबा 607.118 हेक्टेयर का अर्जन हेतु धारा सेक्शन 9 ( प ), एस.ओ.क्र. 5445 (अ) का प्रकाशन 26 नवम्बर 2025 को किया जा चुका है। कलेक्टर ने इस सम्बंध में छत्तसीगढ़ शासन राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग से प्राप्त निर्देश के तहत अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कटघोरा एवं पाली, जिला पंजीयक कोरबा, तहसीलदार दीपका व हरदीबाजार को वर्णित ग्रामों की अर्जित भूमियों का खरीदी/बिक्री, रजिस्ट्री, नामांतरण पर रोक लगाने हेतु निर्देशित किया है। साथ ही की गई कार्यवाही के सम्बंध में जानकारी उपलब्ध कराना सुनिश्चित करने निर्देश दिए है।
नल-जल योजना के संचालन हेतु सरपंचों, पंचों, सचिवों एवं पंप ऑपरेटरों के लिए कार्यशाला आयोजित
गौरेला पेंड्रा मरवाही । जल जीवन मिशन के अंतर्गत जनपद कार्यालय मरवाही के सभागार में सोमवार को नल-जल योजना के संचालन हेतु 9 ग्राम पंचायतों के सरपंचों, पंचों, सचिवों, पंप ऑपरेटरों एवं ग्राम जल स्वच्छता समिति के सदस्यों के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में जिला समन्वयक साहिल जायसवाल ने पाइप जलापूर्ति की आवश्यकता, सामाजिक एवं आर्थिक विकास, एफएचटीसी के लाभ, हर घर जल प्रमाणीकरण प्रक्रिया, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की भूमिका, ग्राम पंचायत की भूमिका, ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति का गठन एवं संचालन के बारे में विस्तार से बताया। इसी तरह जिला समन्वयक टेकेश्वर कन्नौजे ने जल जीवन मिशन के तहत योजना के प्रकार, जल स्रोतों के प्रकार, जल गुणवत्ता निगरानी में सामुदायिक भूमिका, जल सखियों की भूमिका एवं जल गुणवत्ता परीक्षण कर विभिन्न पैरामीटर पर परीक्षण करना सिखाया। कार्यशाला में प्रतिभागियों को अशुद्ध जल से होने वाले हानिकारक प्रभाव एवं बीमारियों तथा उसकी रोकथाम के बारे में समझाया गया। उन्हें जल शुद्धिकरण के लिए क्लोरीनेटर का महत्व, दैनिक, साप्ताहिक एवं मासिक रख रखाव, स्रोत स्थिरता में ग्राम पंचायत एवं ग्राम जल एवं स्वच्छता समिति की भूमिका, सहयोगी कर्मचारियो के कर्तव्य एवं जिम्मेदारियों के बारे में विस्तारपूर्वक बताया गया।
आकांक्षी विकासखण्ड गौरेला में शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति एवं योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कलेक्टर ने दिए निर्देश
गौरेला पेंड्रा मरवाही । नीति आयोग भारत सरकार द्वारा चयनित आकांक्षी ब्लॉक गौरेला के सभी थीम आधारित इंडिकेटरों की प्रगति की कलेक्टर लीना कमलेश मंडावी ने समीक्षा की। उल्लेखनीय है कि आकांक्षी ब्लॉक गौरेला को नीति आयोग द्वारा पीवीटीजी सुपर-60 ब्लॉक के रूप में चिह्नित किया गया है, जहां विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा के परिवार निवासरत हैं। कलेक्ट्रेट के अरपा सभा कक्ष में आयोजित बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों की थीमवार प्रगति, सितंबर माह की प्राप्त रिपोर्टिंग तथा इंडिकेटरों के गैप एनालिसिस की विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने निर्देशित किया कि आगामी समय में सभी विभाग शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति सुनिश्चित करें, जमीनी स्तर पर कार्यों का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे। बैठक में बताया गया कि विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय की मूलभूत आवश्यकताओं को प्राथमिकता देते हुए सभी 13 बैगा बहुल ग्राम पंचायतों में शिविर आयोजित किए जाए और बैगा जनजाति की विकास सुनिश्चित करें। इस अभियान के माध्यम से बैगा परिवारों को पहली बार सभी मूलभूत सुविधाओं एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से व्यापक रूप से जोड़ा जाना है।
कलेक्टर ने विभागों को निर्देशित किया कि सभी 38 इंडिकेटरों की पूर्ण संतृप्ति सुनिश्चित करने के लिए विभाग प्रभावी रणनीति अपनाएं। उन्होंने नवाचार आधारित कार्यों, डिजिटल ट्रैकिंग, अंतर-विभागीय समन्वय तथा समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर देते हुए कहा कि योजनाओं का लाभ पात्र लाभार्थियों तक समय पर पहुँचे, यह सुनिश्चित किया जाए। प्रत्येक अधिकारी अपने दायित्वों का पूर्ण पालन करें तथा कार्यों को सुचारु रूप से लागू करें। बैठक में आकांक्षी ब्लॉक फेलो मनीष कुमार श्रीवास द्वारा संपूर्णता अभियान के सभी 40 इंडिकेटरों, उनके वर्तमान उपलब्धि स्तर, सितंबर माह की प्रगति, गैप एनालिसिस तथा आगामी कार्ययोजना पर विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया। कलेक्टर ने उनके विश्लेषण एवं सुझाए गए कार्य-योजनाओं की सराहना करते हुए सभी विभागों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ मुकेश रावटे, सीएमएचओ डॉ. रामेश्वर शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी सहित लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, पशुधन, पंचायत, आजीविका मिशन आदि विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
जनदर्शन में कलेक्टर-सीईओ ने सुनी लोगों की समस्याएं
गौरेला पेंड्रा मरवाही । कलेक्ट्रेट के अरपा सभा कक्ष में आयोजित साप्ताहिक जनदर्शन में कलेक्टर श्रीमती लीना कमलेश मंडावी और जिला पंचायत सीईओ श्री मुकेश रावटे ने लोगों की समस्याएं सुनी। उन्होंने प्रत्येक आवेदकों से उनकी समस्याएं सुनी और उनके आवेदनों का अवलोकन किया तथा संबंधित विभाग के अधिकारियों को जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों को प्राथमिकता में लेकर निराकरण के निर्देश दिए। उन्होंने शिकायतों की जांच पड़ताल कर नियमानुसार कार्रवाई करने और मांगों का परीक्षण कर पात्रतानुसार लाभ दिलाने कहा। साथ ही आवेदनों पर की गई कार्रवाई से आवेदकों को सूचित करने भी कहा। जनदर्शन में विभिन्न मांगों, समस्याओं एवं शिकायतों से संबंधित 43 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें मुख्यतः भूमि का भौतिक सत्यापन एवं रकबा बढ़ाने, बकाया भुगतान, छात्रवृत्ति, आवास किश्त, गिरदावरी में सुधार करने, रकबा संशोधन, सीमांकन, मानदेय बढ़ाने, अनियमितता की जांच, बिजली मीटर बदलने, मुआवजा, मजदूरी भुगतान आदि से संबंधित आवेदन शामिल हैं।