बिलासपुर। बिलासपुर के गोकुल नगर और आसपास के क्षेत्रों में पशुओं में फैल रही फुट एंड माउथ डिसीज (FMD) यानी खुरपका-मुंहपका बीमारी ने डेयरी संचालकों की चिंता बढ़ा दी है। जिला दुग्ध उत्पादक संघ ने इस संक्रमण को रोकने के लिए कलेक्टर को पत्र सौंपकर अन्य राज्यों से होने वाले पशु परिवहन पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है।
महामारी की चपेट में डेयरी उद्योग जिला दुग्ध उत्पादक संघ के अध्यक्ष मुकेश मिश्रा ने बताया कि शासन की महत्वाकांक्षी योजना के तहत ग्राम घुरू के गोकुल नगर में शहर की करीब 70 डेयरियां संचालित हैं, जहां 3000 से अधिक पशु हैं। पिछले एक महीने से कुछ व्यापारियों द्वारा अन्य राज्यों से संक्रमित पशु लाकर स्थानीय डेयरी संचालकों को बेचे गए हैं। इसके कारण गोकुल नगर सहित पूरे बिलासपुर में FMD संक्रमण तेजी से फैल रहा है, जिससे कई पशुओं की जान खतरे में है और डेयरी व्यवसाय पूरी तरह ठप होने की कगार पर है।
कलेक्टर से सख्त कदम उठाने की अपील दुग्ध उत्पादक संघ ने प्रशासन से आग्रह किया है कि बाहरी राज्यों और जिलों से बिलासपुर में पशुओं के प्रवेश पर तुरंत रोक लगाई जाए। साथ ही, शहर के भीतर पशुओं के क्रय-विक्रय और हाट बाजारों पर भी अस्थायी प्रतिबंध लगाया जाए ताकि संक्रमण की चेन को तोड़ा जा सके। संघ का कहना है कि यदि समय रहते पशुओं के आवागमन को नहीं रोका गया, तो यह बीमारी जिले के ग्रामीण इलाकों में भी फैल सकती है, जिससे भारी आर्थिक नुकसान होगा।
पशु चिकित्सा विभाग को भी दी गई सूचना इस मामले की गंभीरता को देखते हुए संघ ने संयुक्त संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं को भी प्रतिलिपि भेजकर प्रभावित क्षेत्रों में क्वारंटाइन और टीकाकरण की प्रक्रिया तेज करने का अनुरोध किया है। पशुपालकों को डर है कि यदि संक्रमण पर लगाम नहीं लगी, तो शहर में दूध की आपूर्ति और पशुधन दोनों पर बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।
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के दूसरे दिन कथावाचिका ईश्वरी देवी ने उक्त बातें कहीं। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को सांसरिक मोह माया से ऊपर है। भगवान शिव का ना आरंभ है और ना ही अंत। शिव पुराण के अनुसार एक बार ब्रह्माजी और भगवान विष्णु में सबसे श्रेष्ठ कौन है इसे लेकर विवाद हो गया। ब्रह्माजी ने कहा कि उन्होंने संसार की रचना की इसलिए वह सबसे श्रेष्ठ हैं, जबकि भगवान विष्णु ने कहा कि वह संसार के पालनहार हैं इसलिए वे सबसे श्रेष्ठ हैं। विवाद बढ़ने पर ब्रह्मा और विष्णु के बीच भयंकर युद्ध हुआ, तब भगवान शिव ने अग्नि स्तंभ के रूप में प्रकट होकर उसे रोकने का प्रयास किया। इसी दौरान भगवान शिव ने ब्रह्मा जी और विष्णु भगवान से कहा कि जो शिवलिंग का छोर सबसे पहले ढूंढ लेगा वह सर्वश्रेष्ठ होगा। भगवान विष्णु वाराह अवतार धारण कर धरती और पाताल में जाकर ज्योतिर्लिंग का अंत ढूंढ़ने लगे। ब्रह्माजी हंस बनकर रहस्य जानने आकाश की तरफ बढ़ते गए। दोनों देवताओं ने बहुत कोशिश की, लेकिन ज्योतिर्लिंग का आदि और अंत नहीं मिला। अंत में विष्णु जी ने हार मान ली। उन्होंने शिव जी के सामने स्वीकार किया कि वह ज्योतिर्लिंग का अंत नहीं खोज पाए। जबकि ब्रह्मा जी को जीतने का एक उपाय सूझा और वे अपने साथ केतकी के फूल को साक्षी बनाकर लाए कि उन्होंने ज्योतिर्लिंग का अंत खोज लिया है। भगवान शिव तो प्रकृति के हर सत्य को जानने वाले हैं, तो भला उनसे ब्रह्मा जी का झूठ कैसे छुप पाता। उन्होंने केतकी के फूल से सत्य कहने को कहा लेकिन केतकी के फूल ने भी झूठ बोल दिया। इस पर भगवान शिव ने क्रोधित होकर ब्रह्मा जी से कहा-“एक झूठ बोलने वाला देवता सम्मानीय नहीं हो सकता इसलिए आप परमपिता बनकर भी श्रेष्ठ नहीं हैं।” यह कहकर शिव ने ‘भैरव’ नामक अपने एक अवतार को प्रकट किया। भैरव ने शिव की आज्ञा पाकर ब्रह्मा जी का पांचवा सिर काट दिया। शिव ने विष्णु जी को सत्य बोलने के कारण हर यज्ञ, हवन में भगवान सत्यनारायण के रूप में पूजे जाने का वरदान दिया। वहीं, ब्रह्मा जी को किसी भी यज्ञ में न पूजे जाने का शाप दिया। इस शाप के प्रभाव से ही ब्रह्मा जी के केवल एक ही मंदिर पुष्कर में हैं। वहीं, झूठ बोलने के कारण केतकी का फूल भी भगवान शिव की पूजा में नहीं चढ़ाया जाता है