बिलासपुर । रितेश शर्मा । सौर मंडल के चक्र से 21 जून को सबसे बड़ा दिन व 21 दिसम्बर को रात सबसे बड़ी होती है। विश्व ध्यान दिवस की तिथि 5127/10/01/01/01 भी अंकीय दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। कलयुग के 5127 वे वर्ष के दशवें माह पौष शुक्ल पक्ष प्रतिपदा रविवार के पावन अवसर पर 1111 दिव्य चेतन आत्माओं ने एक साथ एकाग्रचित होकर शाम ठीक 18.01 बजे साक्षात दुर्गा अवतार श्री राणी सती दादी का ध्यान कर वैश्विक शांति व बिलासपुर की खुशहाली की कामना की। ग्यारह एक के दुर्लभ संयोग से किया गया ध्यान निश्चित ही लाभकारी होगा। भव्य महामंगल पाठ में सूरत निवासी सुरभि बिजुरका की सुमधुर वाणी में आज दोपहर 3.30 बजे से रात 8 बजे तक गोविंदम पैलेस में दादी भक्त झूमते नजर आए। बीच मे श्री दादी की हल्दी, मेंहदी व चुनरी संस्कार के साथ उनकी जीवनी जीवंत झांकी द्वारा प्रस्तुत की गई। मृदंग और ढोल नगाड़ों के बीच प्रगट हुई श्री दादी की श्री गंगा आरती* बनारस के पांडित्य जनों द्वारा हजारों भक्तों की उपस्थिति में की गई । पाठ की समाप्ति पश्चात लगभग तीन हजार भक्तों ने छप्पन भोग एवं दादी जी की रसोई से स्वादिष्ट *भोजन प्रसाद* का आनंद उठाया। आज के आयोजन को सफल बनाने में सर्वश्री नवलकिशोर तुलस्यान, सी ए आनंद कुमार अग्रवाल, एडवोकेट प्रवीण तुलस्यान, अजय अग्रवाल, आशीष सिंह, ललित अग्रवाल, आयुष अग्रवाल, पवन अग्रवाल, श्रीकांत केडिया, पुरुषोंत्तम अग्रवाल, ऋषि अग्रवाल, वेंकट अग्रवाल, नरेश अग्रवाल, शारदा अग्रवाल, सुनीता अग्रवाल, मीतू अग्रवाल, स्मिता अग्रवाल, शिवानी अग्रवाल, उषा अग्रवाल, पूर्व विधायक रश्मि सिंह सहित हजारों की सँख्या में दादी भक्त शामिल हुए।
कोलकाता के कलाकारों की नृत्य नाटिका से दादी का सचित्र प्रदर्शन व बनारस के पंडितों की गंगा आरती की तर्ज में दादीजी की भव्य आरती ने आयोजन में चार चांद लगा दिया। सीए आनंद अग्रवाल एवं सुनीता अग्रवाल ने समस्त आगंतुक कलाकार, अतिथियों का स्वागत करते हुए कार्यकर्ताओं, रिश्तेदारों, जनसामान्य का आभार व्यक्त किया। अतः में हजारों भक्तों ने दादीजी की रसोई से भोजन प्रसाद ग्रहण किया। श्री राणी सती दादीजी के तनधन जी सहित ज्योति विलीन होने का झांकी रूप पहली बार होने से बिल्हा, कोटा, कोरबा, तखतपुर, अकलतरा, नैला, भाटापारा सहित दूर दूर से आये लोगो ने सांस रोक कर संपूर्ण मंगलपाठ का दर्शन व श्रवण किया। इस भक्तिमय आयोजन बिलासपुर की पावन धरा धन्य हुई। ज्ञात हो कि पांडवों की पुत्रवधू, अभिमन्यु की पत्नी व महाराज परीक्षित की माताजी उत्तरा ही कलयुग में नारायणी बनकर तनधनदास जी के धोखे से हत्या कर दिए जाने पर समस्त विधर्मियों का नाश कर झुंझुनू में ज्योति में विलीन हो गई थी।




