समाजसेवी, रामायण के प्रख्यात टीकाकार एवं देहदान संकल्पी गणेश दास मानिकपुरी का निधन

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रायपुर । प्रख्यात समाजसेविका स्वर्गीय अम्बा देवी के पति तथा जनसंपर्क अधिकारी विजय मानिकपुरी के पूज्य पिताजी, दोन्दे खुर्द (रायपुर) निवासी 80 वर्षीय श्री गणेश दास मानिकपुरी का बुधवार प्रातः आकस्मिक निधन हो गया। उनके निधन से परिवार, शुभचिंतकों तथा सामाजिक, साहित्यिक और सांस्कृतिक क्षेत्रों में रुचि रखने वालों ने शोक व्याप्त की है।

गणेश दास मानिकपुरी रामायण के प्रख्यात टीकाकार, गहन अध्येता एवं चिंतक थे। वे छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मण्डल के सेवानिवृत्त कर्मचारी थे, अविभाजित मध्यप्रदेश में कर्मचारी नेता के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान रखते थे तथा इंटक के महामंत्री के रूप में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके थे। स्पष्टवादिता, निर्भीक व्यक्तित्व और सामाजिक सरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता के कारण वे समाज में अत्यंत सम्मानित थे।

धार्मिक ग्रंथों, समाचार-पत्रों और साहित्यिक पुस्तकों के अध्ययन में उनकी विशेष रुचि थी। ग्रामीण विकास, सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण उनके चिंतन के प्रमुख विषय रहे। वे आजीवन सादा एवं शाकाहारी जीवन के पक्षधर रहे तथा सभी प्रकार के नशे के कट्टर विरोधी थे।

उन्होंने समाज में नशामुक्ति के लिए अनेक जनजागरूकता अभियान चलाए। इसके साथ ही वे जातिवाद, अंधविश्वास और सामाजिक आडंबर के मुखर विरोधी रहे तथा सामाजिक समरसता और वैज्ञानिक सोच के समर्थक थे।

मानव सेवा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता जीवन के अंतिम चरण तक बनी रही। उन्होंने जीते-जी अपना पार्थिव शरीर मेडिकल कॉलेज, रायपुर को देहदान करने का संकल्प लिया था और इसके लिए विधिवत सहमति-पत्र भी भर दिया था। उनका यह प्रेरणादायी निर्णय परिवार, समाज और नई पीढ़ी के लिए सेवा, विज्ञान और मानवता का अनुकरणीय संदेश छोड़ गया है।

श् गणेश दास मानिकपुरी अपने पीछे भरा-पूरा परिवार, अनेक शुभचिंतक और समृद्ध सामाजिक- सांस्कृतिक विरासत छोड़ गए हैं। उनके निधन से समाज ने एक विद्वान, कर्मठ, सिद्धांतनिष्ठ और स्पष्टवादी व्यक्तित्व को खो दिया है। उनकी सादगी, सामाजिक प्रतिबद्धता और मानवीय मूल्यों के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।

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