अंजनी कुमार तिवारी’सुधाकर, उत्कल बिलास साहित्य सेवा रत्न’ से सम्मानित

बिलासपुर । रथयात्रा के पावन पावस काल में गुंडचा जगन्नाथ मंदिर, रेलवे कालोनी बिलासपुर में विगत वर्षों की भांति दिनांक ०१-०७-२०२५ को आयोजित उत्कल बिलास साहित्य सेवा का डा वामन चंद्र दीक्षित द्वारा संपादित बहुभाषी साहित्यिक पत्रिका उत्कल बिलास का विमोचन डा विनय कुमार पाठक-कुलपति थावे विद्या पीठ के मुख्य आतिथ्य, करुणाकर बेहरा की अध्यक्षता, न्यायमूर्ति चंद्र भूषण वाजपेई, पूर्व कुलपति हिदायतुल्लाह विधि विश्वविद्यालय, रायपुर के आसंदी प्रमुख के रुप में,डा राघवेन्द्र दुबे,डा बृजेश सिंह,डा एके यदू के विशिष्ट आतिथ्य में संपन्न हुआ।

विशिष्ट वक्ता के रुप में साकेत रंजन-वरिष्ठ रेल संरक्षा अधिकारी की उपस्थिति रही।

इस अवसर पर राष्ट्रीय साहित्य सेवा सम्मान के अंतर्गत छत्तीसगढ़ी,वंगीय तथा उत्कल साहित्यकारों के साथ ही अंजनी कुमार तिवारी’सुधाकर’, अध्यक्ष-राष्ट्रीय कवि संगम इकाई बिलासपुर को उनके छत्तीसगढ़ी,हिंदी व भोजपुरी भाषा के विकास व साहित्य सेवा के लिए उत्कल बिलास साहित्य सेवा सम्मान से सम्मानित किया गया।

काव्य,नृत्य व भजन संध्या के मनोहारी आयोजन ने कार्यक्रम को अद्वितीय बना दिया।  सृष्टि गर्ग व सुश्री शौर्या भारत की गणेश व कृष्ण अनुनय नृत्य दर्शक दीर्घा का मन मोह लिया।

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इस अवसर पर छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार यथा सनत कुमार तिवारी,अमृत लाल पाठक,राजेश सोनार,एम डी मानिकपुरी, बालमुकुंद श्रीवास,शीतल पाटनवार, शत्रुघ्न जशवानी’शाद’, आशीष श्रीवास,डा शुभेंदु मेहेर,डा निरंजन पण्डा,धनुर्जय हंतल,डा सुनीता मिश्रा,डा संगीता बनाफर,डा यादव, श्रीमती शोभा त्रिपाठी, रेणु वाजपेई, सीमा भट्टाचार्य, डा तन्मयी अगस्ती, यशोमति बारीक की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।कार्यक्रम में स्वागत संबोधन निर्मल राउत,संचालन डा बामन चंद्र दीक्षित तथा आभार प्रदर्शन डा विवेक तिवारी ने किया।

श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्र उत्सव पर विभिन्न धार्मिक आयोजन

बिलासपुर।  सरकण्डा स्थित श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्र उत्सव हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया जा रहा है। पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि त्रिदेव मंदिर में नवरात्र के छठवे दिन प्रातःकालीन श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन श्रृंगार छिन्नमस्ता देवी के रूप में किया जाएगा।

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श्री शारदेश्वर पारदेश्वर महादेव का महारुद्राभिषेक, महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती देवी का षोडश मंत्र द्वारा दूधधारिया पूर्वक अभिषेक किया गया।परमब्रह्म मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम जी का पूजन एवं श्रृंगार किया गया।प्रतिदिन मध्यान्ह कालीन पीताम्बरा हवनात्मक महायज्ञ मे श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी मंत्र के द्वारा आहुतियाँ दी जा रही है।

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि छिन्नमस्ता दस महाविद्या देवियों में से छठी देवी हैं। इनके एक हाथ में स्वयं का ही कटा हुआ सिर रखा होता है।माता छिन्नमस्ता काली का एक बहुत ही विकराल स्वरूप हैं। हालांकि, इन्हें जीवनदायिनी माना जाता है।छिन्नमस्ता देवी अपने मस्तक को अपने ही हाथों से काट कर, अपने हाथों में धारण करती हैं। मार्कण्डेय पुराण और शिव पुराण के अनुसार, जब देवी ने चण्डी का रूप धरकर राक्षसों का संहार किया था, तो चारों ओर उनका जय घोष होने लगा। परन्तु देवी की सहायक योगिनियाँ जया और विजया की खून की प्यास शान्त नहीं हो पाई थी। इस पर उनकी रक्त पिपासा को शान्त करने के लिए माँ ने अपना मस्तक काटकर अपने रक्त से उनकी रक्त प्यास बुझाई। इस कारण माता को छिन्नमस्तिका नाम से पुकारा जाने लगा। छिन्नमस्तिका देवी को तन्त्र शास्त्र में प्रचण्ड चण्डिका और चिन्तापूर्णी माता जी भी कहा जाता है।एक बार मां पार्वती अपनी दो सहचरियों के साथ भ्रमण पर निकलीं,इस दौरान माता पार्वती की रास्ते में मंदाकिनी नदी में स्नान करने की इच्छा हुई, मां पार्वती ने अपनी सहचारियों से भी स्नान करने को कहा, परंतु दोनों ने स्नान करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनको भूख लग रही है,इस पर माता पार्वती ने उनको कुछ देर आराम करने को कहा और स्नान करने चली गईं।मां काफी देर तक स्नान करती रहीं, इसी बीच दोनों सहचरी कहती रही कि उनको भूख लग रही है. लेकिन माता ने दोनों की बात को अनसुना कर दिया,इस पर दोनों सहचरियों ने माता से कहा कि मां तो अपने शिशु का पेट भरने के लिए अपना रक्त तक पिला देती है,परंतु आप हमारी भूख के लिए कुछ भी नहीं कर रही हैं. यह बात सुनकर मां पार्वती को क्रोध आ जाता है और नदी से बाहर आकर खड्ग का आह्वान करके अपने सिर को काट देती हैं, जिससे उनके धड़ से रक्त की तीन धाराएं निकलती हैं दो धाराएं दोनों सहचरियों के मुंह में गिरती हैं,तीसरी धारा मां के स्वयं के मुख में गिरती है, इससे सभी देवताओं के बीच कोहराम मच जाता है।जिसके बाद भगवान शिव कबंध का रूप धारण कर देवी के प्रचंड रूप को शांत करते हैं। तब से मां पार्वती के इस रूप को छिन्नमस्ता माता कहा जाने लगा।

परासी धान मंडी में बाउंड्री वॉल निर्माण में घोटाला: अधिकारी बने मूकदर्शक

गौरेला पेंड्रा मरवाही । लवकेश सिंह दीक्षित। ग्राम पंचायत परासी की धान मंडी में 20 लाख रुपये की लागत से बन रही बाउंड्री वॉल का निर्माण कार्य अनियमितताओं और गुणवत्ताहीनता की भेंट चढ़ गया है। इस वॉल का उद्देश्य धान को चोरी और मवेशियों से होने वाले नुकसान से बचाना था, लेकिन निर्माण में हो रही मनमानी और घटिया गुणवत्ता  यह साफ है बाउंड्री वॉल ज्यादा दिन नहीं रहेगी और सरकार और किसान को नुकसान होगा परंतु विभाग  को इससे कोई मतलब ही नहीं है ग्राम पंचायत निवासी एवं सरपंच ने कहा है कि ठेकेदार कार्य में पारदर्शिता नहीं बरत रहा। जब उनसे शेड्यूल या एस्टीमेट मांगा जाता है, तो वे कहते हैं, “अधिकारी देंगे एस्टीमेट,” और जवाब देने से कतराते हैं। विभागीय अधिकारी भी इस मामले में चुप्पी साधे हुए हैं और फोन उठाने से बच रहे हैं।

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यहाँ तक कि उच्च अधिकारी भी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। ठेकेदार का तर्क है, एस्टीमेट जानकर क्या करोगे? ठेकेदार यह बोलकर  सूचना के अधिकार का भी उल्लंघन कर रहे हैं ऐसी स्थिति को देखते हुए साफ दिख रहा है ठेकेदार और अधिकारियों की मिली भगत है। नहीं तो इतनी शिकायतों के बाद भी उन पर कार्यवाही क्यों नहीं हो रही है किसानो का कहना है कि शासन की योजनाएं उनकी मेहनत को संरक्षित करने और आर्थिक उन्नति के लिए बनाई जाती हैं, लेकिन गुणवत्ताहीन निर्माण और लापरवाही के कारण वे लाभ से वंचित रह जाते हैं। परासी धान मंडी में बन रही यह बाउंड्री वॉल, जो धान को चोरी और मवेशियों से बचाने के लिए थी, अब घटिया सामग्री और मनमाने ढंग से हो रहे काम की वजह से बेकार साबित हो रही है। ग्रामीण स्तर में है इसलिए पता नहीं चल पाता है परंतु शासन-प्रशासन की नाक के नीचे चल रहा लाखों का खेल है।

राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन तहत मेंढुका, दर्री और सपनी के किसानों ने शुरू की मुंगफली की खेती

गौरेला पेंड्रा मरवाही। राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन (एनएमईओ) के तहत ग्राम मेंढुका, दर्री और सपनी के किसानों ने मौसम खुलते ही मुंगफली की बोनी शुरू कर दी है। देश में तिलहन फसलों का रकबा दिनों दिन कम होने के कारण भारत सरकार ने नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल योजना प्रारंभ किया है। इस योजना के तहत जिले में लगभग 200 हैक्टेयर में मुंगफली की खेती किया जाना है।

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इसके लिए कृषि विभाग के अधिकारियों द्वारा किसानों के साथ बैठक कर ग्राम एवं कलस्टर का चयन तथा उन्हें प्रशिक्षण देकर मुंगफली बीज का वितरण किया जा चुका है। उप संचालक कृषि सत्यजीत कंवर और ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी राकेश राठौर एवं रामायण सिंह मरपच्ची ने किसानों के खेत पहुंचकर उनके द्वारा किए जा रहे मुंगफली की बोनी का अवलोकन किया तथा आवश्यक मार्गदर्शन दिया।

लेमन ग्रास की खेती से महिलाएं लखपति दीदी बनने की ओर अग्रसर

गौरेला पेण्ड्रा मरवाही । प्राकृतिक सौंदर्य के साथ साथ अपने औषधियों गुणों के लिए विख्यात जीपीएम जिला एक नई खुशबू फैल रही है यह खुशबू है आत्मनिर्भरता की, समृद्धि की, और महिला सशक्तिकरण की। बिहान योजना के तहत जीपीएम जिले के ग्राम अमारू में महिला स्वसहायता समूहों द्वारा शुरू की गई लेमन ग्रास की खेती अब लखपति दीदी बनने की राह को प्रशस्त कर रही है। जनपद पंचायत पेण्ड्रा अंतर्गत गठित 10 महिला स्वसहायता समूहों ने लगभग 20 एकड़ भूमि पर लेमन ग्रास की खेती शुरू की है। इन समूहों में ज्योति महिला समूह, महामाया समूह, जय संतोषी माता समूह, हनी समूह प्रमुख हैं। यह सामूहिक प्रयास न केवल आर्थिक स्वतंत्रता की ओर एक बड़ा कदम है, बल्कि औषधीय पौधों के क्षेत्र में एक स्थायी ग्रामीण मॉडल भी बनता जा रहा है। ज्योति समूह की सदस्य  गायत्री काशीपुरी ने बताया कि उनके समूह के 11 सदस्यों द्वारा पादप औषधि बोर्ड के सहयोग से यह खेती की जा रही है।

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लेमन ग्रास से तेल निकालकर इसे खुले बाजार और औषधीय संस्थानों में बेचा जाएगा, जो चाय, इत्र एवं औषधीय बनाने में उपयोग होता है। “हमने इस खेती को और विस्तार देने का संकल्प लिया है,” गायत्री ने कहा। महामाया समूह की सुशीला भानू, जय संतोषी माता समूह की पाबरिया भानू, और हनी समूह की श्रीमती पूजा ध्रुव ने सीईओ जिला पंचायत को बताया कि बिहान योजना के तहत उनके समूहों को 15 हजार रूपये की चक्रीय राशि, 60 हजार रूपये की सामुदायिक निवेश निधि (सीईएफ) और बैंक लिंकेज प्राप्त हुआ है। इससे महिलाएं सेंटरिंग प्लेट व्यवसाय, टेंट हाउस, सब्जी बाड़ी, किराना, बकरी व मुर्गी पालन जैसी अनेक आजीविकाएं चला रही हैं। सीईओ जिला पंचायत सुरेन्द्र प्रसाद बैद्य ने निरीक्षण के दौरान एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक दुर्गाशंकर सोनी को निर्देशित किया कि उद्यानिकी विभाग और मनरेगा के सहयोग से गांव की खाली पड़ी जमीनों को चिन्हित कर लेमन ग्रास खेती को और अधिक बढ़ावा दिया जाए। साथ ही उद्यानिकी अधिकारी मदन झां, सरपंच कमलीबाई, और सचिव को भी आवश्यक समन्वय हेतु निर्देशित किया गया। यह पहल से महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बना रही है, इस मॉडल को अन्य ग्राम पंचायतों में भी लागू करने के लिए निर्देशित किए इस दौरान एनआरएलएम समूह पीआरपी और ग्रामीण जन उपस्थित थे।

92 नग अवैध गोवा व्हिस्की जप्त, आरोपी जेल भेजा गया

गौरेला पेंड्रा मरवाही । आबकारी वृत्त मरवाही की टीम द्वारा रविवार को गस्त के दौरान मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर ग्राम धोबहर में प्रेमा सोनी के आधिपत्य से मध्य प्रदेश राज्य की अवैध शराब 92 नग पाव कुल मात्रा 16.560 बल्क लीटर गोवा व्हिस्की विदेशी मदिरा बरामद किया गया। आरोपी के विरुद्ध छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर न्यायिक रिमांड लेकर जेल दाखिल किया गया है। जप्ती की कार्रवाई आबकारी उप निरीक्षक तुलेश कुमार देशलहरे, मुख्य आरक्षक सुधीर मिश्रा, आबकारी आरक्षक प्रकाश सिंह ठाकुर द्वारा की गई।

दैवी सम्पदा से सुख, समृद्धि और मोक्ष संभव : डॉ. दिनेश

बिलासपुर। पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि त्रिदेव मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्र के चौथे दिन प्रातःकालीन श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन श्रृंगार कूष्माण्डा एवं त्रिपुरभैरवी देवी के रूप में किया जाएगा। एवं श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ मध्यान्हकालीन निरंतर चल रहा है।

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश जी महाराज ने बताया कि गुप्त नवरात्र में माँ के नौ रूपों के साथ साथ दस महाविद्याओं की पूजा भी की जाती है।देवी के समस्त रूपों में से एक जगत प्रसिद्ध देवी त्रिपुर भैरवी भी हैं।माँ त्रिपुर भैरवी तीनों लोकों में सबसे सौंदर्यवान और सभी कर्मो का शीघ्र फलदेने वाली देवी हैं।माँ त्रिपुरभैरवी का सौंदर्य सोलह कलाओं से युक्त सोलह वर्ष की कन्या के समान है। इनके मुख से हजारों सूर्य का तेज निकलता रहता है,माँ त्रिपुरभैरवी की अराधना से समस्त प्रकार के ऐश्वर्य एवं भोग प्राप्त होते है।माँ त्रिपुरभैरवी को यौवन और आकर्षण की देवी माना जाता है।इनकी पूजा करने से आकर्षण व सौंदर्यता की प्राप्ति होती है।अगर आपके वैवाहिक जीवन हमेशा कलह बनी रहती है, आपका कोई प्रिय आपसे रूठ गया है, सम्मान और पद प्राप्त करने के लिए, किसी को भी सम्मोहित करने के लिए भी माँ त्रिपुर भैरवी की साधना बहुत फलदायी होती है. इनकी साधना करने मनुष्य की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।माँ त्रिपुर भैरवी की उपासना भोग और मोक्ष प्रदान करती है।

माँ त्रिपुर भैरवी की चार भुजाएं हैं।ये अपने हाथों में पाश, अंकुश, धनुष और बाण धारण करती हैं।जो भी मनुष्य मां त्रिपुर भैरवी की साधना करता है माँ उसे कभी भी निराश नही करती हैं।माँ त्रिपुर भैरवी के हृदय में सौम्यता और दया वास करते हैं।मां त्रिपुर भैरवी की महिमा का वर्णन करना शब्दों में सम्भव नही है। संसार की सभी तन्त्र-मंत्र व तांत्रिक और सिद्ध गण बिना माँ के आशीर्वाद के पूरे नहीं हो सकते।

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ दिनेश महाराज ने कहा कि दैवी सम्पदा और असुरी सम्पदा दोनों संसार को चलाती है। दैवी सम्पदा अर्थात देवी की उपासना से प्राप्त कर्म,भक्ति, ज्ञान, श्री सम्पदा संसार में सुख, समृद्धि के साथ-साथ अंत में मोक्ष में सहयोगी होती है, परंतु असुरी सम्पदा दुख और दरिद्र बनाती है। और अंत में चौरासी गुना बंधन बनाती है।जैसे माँ अपने बालक के कल्याण के लिए आतुर रहती है,वैसे ही भगवती अपने भक्तों के लौकिक ,पारलौकिक और परमार्थिक कल्याण के लिए तत्पर रहती है।

श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में माँ श्री ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का राजराजेश्वरी देवी के रूप में पूजन अर्चन किया जाएगा

बिलासपुर । श्री पीताम्बरा पीठ त्रिदेव मंदिर में आषाढ़ गुप्त नवरात्र उत्सव हर्षोल्लास के साथ धूमधाम से मनाया जा रहा है, साथ ही साथ मध्यान काल मे श्री पीतांबरा हवनात्मक महायज्ञ भी किया जा रहा है ।

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने बताया कि त्रिदेव मंदिर में नवरात्र के तीसरे दिन प्रातःकालीन ब्रह्मशक्ति बगलामुखी देवी का विशेष पूजन श्रृंगार षोडशी देवी के रूप में किया जाएगा।

पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने बताया कि माँ के अंदर 16 कलाएं विद्यमान हैं, जिसके कारण इन्हें षोडशी के नाम से जाना जाता है। और उनके अत्यंत सुंदर और अद्भुत स्वरूप, जोकि तीनों लोकों में अतुलनीय है, इसी कारण उन्हें त्रिपुर सुंदरी कहकर बुलाया जाता है।जिस आसान पर माँ विराजमान हैं, उस आसान को भगवान शिव, विष्णु, ब्रह्मा, शिव के ही दो अन्य स्वरूपों ने अपने सिर पर उठाए हुए हैं। उस आसान पर भगवान शिव आरामदायक मुद्रा में लेटे हुए हैं, जिनकी नाभि से एक कमल का पुष्प निकला हुआ है, जिसपर माँ त्रिपुर सुंदरी विराजमान हैं।माँ का वर्ण स्वर्णिम है और उनके शरीर पर लाल रंग का वस्त्र शोभायमान है। उन्होंने कई अद्भुत आभूषण धारण किए हुए हैं, जिससे उनके चेहरे पर एक अद्भुत तेज उभर कर आ रहा है। माँ के केश खुले हुए हैं जिसके ऊपर माँ ने मुकुट धारण किया हुआ है। महादेव के समान ही उनके माथे पर तीसरा नेत्र है। माँ अपने चतुर्भुजी स्वरूप में विराजमान हैं, जिनके एक हाथ में पुष्प रुपी पांच बाण, दूसरे में धनुष, तीसरे में अंकुश व चौथे में फंदा सुशोभित हो रहा है।

माँ की अनन्य भक्ति से भक्त को सुखी वैवाहिक जीवन प्राप्त होता है। इनके भक्त धैर्यवान, मन को अपने वश में रखने वाले होते हैं। महादेव का षोडशी देवी से संबंधित अवतार रुद्रावतार षोडेश्वर महादेव हैं।तृतीय महाविद्या माता षोडशी के बारे में। त्रिपुर सुंदरी के नाम से भी जाने जाने वाली यह देवी अत्यंत सौम्य कोटी की देवी मानी गई हैं। माँ के ललिता, राजराजेश्वरी, लीलावती, कामाक्षी, कामेश्वरी, ललिताम्बिका, ललितागौरी इत्यादि नाम भी है।

रविंद्र ने भगवान जगन्नाथ जी के रथ यात्रा में शामिल होकर लिया आशीर्वाद

बिलासपुर। भगवान जगन्नाथ जी के रथ यात्रा आज बिलासपुर के रेल्वे क्षेत्र से होकर शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गो में निकाली गई। जिसका स्वागत कर भगवान कृष्ण बलराम व सुभद्रा देवी की रथ की रस्सी खींच भगवान जगन्नाथ की जयकारा के साथ आरती कर आशीर्वाद लिया गया। वहीं इस अवसर पर श्रद्धालुओं को फल व मिष्ठान प्रसाद के रूप में वितरण किया गया । शोभायात्रा में छत्तीसगढ़ योग आयोग के पूर्व सदस्य रविंद्र सिंह व अरपा विकास प्राधिकरण के पूर्व सदस्य महेश दुबे व वरिष्ठ कांग्रेसी नेता शिवा मुदलियार रामप्रकाश केशरवानी बब्लू नंदू गुलहरे रंजीत खनूजा चंद्रहास केसरवानी विजय दुबे चंद्रहास शर्मा उत्तम चटर्जी राघवेंद्र सिंह प्रशांत पांडे अनिल चौहान दिलीप साहू अनिल शुक्ला संजय दवे संगीत मोईता संतोष चौहान संदीप मिश्रा गुड्डू चंदेल विजय तिवारी ओम प्रकाश शर्मा राजेंद्र बिष्ट प्रवीण बर्डे हनु शर्मा संजय यादव नरेंद्र सिंह योगेश पिल्ले केशव गोरख अशोक केशवानी पीयूष अग्रवाल मुकेश दुबे रितिक सिंह हरीश शेलकर राकेश केसरी सनी चौहान उदय गंगवानी विक्रम धुर्वे पिंटू आडिल यश सिंह संजय शुक्ला आदि प्रमुख रूप से शामिल थे।

राज्यपाल डेका एवं मुख्यमंत्री साय ने भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना कर ‘छेरा-पहरा‘ की रस्म निभाई

रायपुर । राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज गायत्री नगर रायपुर स्थित जगन्नाथ मंदिर में आयोजित महाप्रभु जगन्नाथ की रथ यात्रा महोत्सव में शामिल हुए। राज्यपाल डेका एवं मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना कर ‘छेरा-पहरा‘ की रस्म निभाई। राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी ने जगन्नाथ जी की विधि-विधान से पूजा अर्चना की। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय आज राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में आयोजित रथ यात्रा में शामिल हुए। रायपुर के गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में विशेष विधि-विधान के साथ महाप्रभु जगन्नाथ जी की रथ यात्रा निकाली गई। रथ यात्रा प्रारंभ करने से पूर्व भगवान की प्रतिमाओं को मंदिर से रथ तक लाया गया और मार्ग को सोने की झाड़ू से स्वच्छ किया गया। इस परंपरा को छेरापहरा कहा जाता है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सभी प्रदेशवासियों को रथ यात्रा की बधाई देते हुए कहा कि यह पर्व ओडिशा के लिए जितना बड़ा उत्सव है, उतना ही बड़ा उत्सव छत्तीसगढ़ के लिए भी है। साय ने कहा कि भगवान जगन्नाथ किसानों के रक्षक हैं। उन्हीं की कृपा से वर्षा होती है, धान की बालियों में दूध भरता है और किसानों के घरों में समृद्धि आती है। मैं भगवान जगन्नाथ से प्रार्थना करता हूं कि इस वर्ष भी छत्तीसगढ़ में भरपूर फसल हो। उन्होंने कहा कि भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा से मेरी विनती है कि वे हम सभी पर अपनी कृपा बनाए रखें और हमें शांति, समृद्धि एवं खुशहाली की ओर अग्रसर करें।

मुख्यमंत्री ने सोने की झाड़ू से छेरापहरा की रस्म निभाई

राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित जगन्नाथ मंदिर में पुरी की रथ यात्रा की तर्ज पर यह पुरानी परंपरा निभाई जाती है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छेरापहरा की रस्म पूरी करते हुए सोने की झाड़ू से मार्ग बुहारकर रथ यात्रा का शुभारंभ किया। इसके उपरांत उन्होंने भगवान जगन्नाथ की प्रतिमा को रथ तक ले जाकर विराजित किया।

ओडिशा की तर्ज पर छत्तीसगढ़ में होती है रथ यात्रा

रथ यात्रा के लिए भारत में ओडिशा राज्य प्रसिद्ध है। ओडिशा का पड़ोसी राज्य होने के कारण छत्तीसगढ़ में भी इस उत्सव का व्यापक प्रभाव है। आज निकाली गई रथ यात्रा में भगवान जगन्नाथ, उनके भ्राता बलभद्र और बहन सुभद्रा की विशेष विधि-विधान से पूजा-अर्चना की गई। मंदिर के पुजारी के अनुसार उत्कल संस्कृति और दक्षिण कोसल की संस्कृति के बीच यह एक अटूट साझेदारी का प्रतीक है। ऐसी मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ का मूल स्थान छत्तीसगढ़ का शिवरीनारायण तीर्थ है, जहां से वे जगन्नाथ पुरी में स्थापित हुए। शिवरीनारायण में ही त्रेता युग में प्रभु श्रीराम ने माता शबरी के प्रेमपूर्वक अर्पित मीठे बेर ग्रहण किए थे। यहां वर्तमान में नर-नारायण का भव्य मंदिर स्थापित है। इस अवसर पर राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, विधायक पुरंदर मिश्रा, धर्मलाल कौशिक सहित अन्य गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।