भूतपूर्व सैनिकों और वीर नारियों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर और सैनिक सम्मेलन संपन्न

बिलासपुर ।  जिला सैनिक कल्याण कार्यालय, बिलासपुर परिसर में भूतपूर्व सैनिकों, वीर नारियों एवं उनके आश्रित जनों के लिए निःशुल्क चिकित्सा शिविर और सैनिक सम्मेलन का आयोजन सफलतापूर्वक किया गया। यह शिविर  नारायणा हॉस्पिटल, रायपुर और ASG Eye हॉस्पिटल, रायपुर द्वारा राज्य सैनिक बोर्ड, रायपुर के सौजन्य से आयोजित किया गया।

सुबह 10:30 बजे से दोपहर 02:30 बजे तक चले इस शिविर में कार्डियोलॉजी, गैस्ट्रोलॉजी, यूरोलॉजी, ऑर्थोपेडिक्स, गायनेकोलॉजी, नेत्र परीक्षण, रैंडम ब्लड शुगर, बीपी, ईसीजी और इको जैसी स्वास्थ्य जांच सेवाएं विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा प्रदान की गईं। साथ ही, सैनिकों की पेंशन संबंधी SPARSH समस्याओं का समाधान भी किया गया और विभिन्न वित्तीय योजनाओं की जानकारी दी गई। भूतपूर्व सैनिकों और उनके परिवारजनों ने भारी संख्या में उपस्थित होकर इन सेवाओं का लाभ उठाया।

सैनिक सम्मेलन में सेवानिवृत्त जीवन को बेहतर बनाने पर जोर

इस अवसर पर ब्रिगेडियर विवेक शर्मा, विशिष्ट सेवा मेडल (से. नि.), संचालक, सैनिक कल्याण छत्तीसगढ़ ने सैनिक सम्मेलन को संबोधित किया। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं नीतियों की जानकारी प्रदान की और सैनिकों से इन योजनाओं का लाभ उठाकर अपने सेवानिवृत्त जीवन को खुशहाल और कर्त्तव्यनिष्ठ बनाने की अपील की।

ब्रिगेडियर शर्मा ने चिकित्सा शिविर की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए समय-समय पर स्वास्थ्य परीक्षण और जागरूकता की आवश्यकता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि सैनिकों का देश की रक्षा में योगदान सदैव अनमोल है और उनके सम्मान में आयोजित यह चिकित्सा शिविर बिलासपुर में एक यादगार अवसर के रूप में याद रखा जाएगा।

महाशिवरात्रि पर महाकुंभ के लिए रेलवे की विशेष तैयारियां: 350 से अधिक विशेष ट्रेनें, कड़ी सुरक्षा व्यवस्था

नईदिल्ली। महाकुंभ 2025 का अंतिम अमृत स्नान 26 फरवरी को होना है । गंगा यमुना और सरस्वती के मिलन स्थल संगम पर स्नान करने के लिए उत्तर प्रदेश,बिहार, मध्य प्रदेश, झारखंड और बंगाल सहित देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रयागराज आए हुए हैं । रविवार और सोमवार को भी बिहार के पटना, दानापुर, मुजफ्फरपुर, गया, सासाराम, कटिहार, खगड़िया, सहरसा, जयनगर, दरभंगा आदि स्टेशनों पर यात्रियों की संख्या अधिक रही । उत्तर प्रदेश के गोरखपुर लखनऊ अयोध्या वाराणसी कानपुर गोंडा दीनदयाल उपाध्याय झांसी आदि जिलों के रेलवे स्टेशनों पर प्रयागराज जाने वाले यात्रियों की संख्या औसत से काफी ज्यादा रही । मध्य प्रदेश के चित्रकूट, जबलपुर,सतना, खजुराहो जैसे स्टेशनों पर भी भीड़ रही जबकि झारखंड के धनबाद बोकारो,रांची, गढ़वा और मेदनी नगर स्टेशन से बड़ी संख्या में लोग प्रयागराज के लिए रवाना हुए। अमृत स्नान के बाद अपने-अपने शहर वापस जाने वाले लोगों और श्रद्धालुओं का भारी हुजूम रेलवे स्टेशनों पर उमड़ना संभावित है।

इसे ध्यान में रखते हुए उत्तर मध्य रेल, पूर्वोत्तर रेल और उत्तर रेलवे ने व्यापक तैयारी की है और सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने कार्य स्थल पर मुस्तैदी के साथ टिके रहने का निर्देश दिया है। रेलवे ने मौनी अमावस्या के दिन 360 से अधिक गाड़ियों का परिचालन करके 20 लाख से अधिक लोगों को उनके गंतव्य स्थान पर भेजने में सफलता पाई थी। महाशिवरात्रि स्नान के बाद भी श्रद्धालुओं की सेवा के लिए अधिक संख्या में ट्रेनों को चलाने की योजना बनाई गई है और प्रयागराज के समीप वाले स्टेशनों पर अतिरिक्त रेक रखे गए हैं जिनका उपयोग आवश्यकतानुसार किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार रेलवे ने प्रारंभ में महाकुंभ के दौरान लगभग 13500 गाड़ियों के चलने की योजना बनाई थी। महाकुंभ के 42वें दिन तक 15000 से अधिक ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं जिनमें बड़ी संख्या में स्पेशल ट्रेनें भी शामिल हैं।

रेलवे की पूरी व्यवस्था की निगरानी का नेतृत्व रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने स्वयं किया है। रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार भी लगातार रेलवे बोर्ड से ट्रेनों की मॉनिटरिंग में लग रहे हैं। तीन जोनल रेलवे के महाप्रबंधक भी अपनी टीम के साथ रेलवे व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में लगे हुए हैं। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सभी जोन के महाप्रबंधकों को निर्देश दिया है कि महाकुंभ के यात्रियों की सुविधा का पूरा ख्याल रखा जाए। जरूरत पड़ने पर अधिक संख्या में स्पेशल ट्रेनें चलाई जाए।

महाशिवरात्रि की भीड़ के मद्देनजर रेल प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए, सुरक्षा, आश्रय, आसान टिकट वितरण एवं बड़ी संख्या में गाड़ियों की व्यवस्था की गयी है। प्रयागराज के सभी स्टेशनों पर रेलवे वाणिज्य विभाग के 1500 से अधिक तथा रेल सुरक्षा बल के 3000 से जवानों की तैनाती की गई है। रेलवे सुरक्षा विशेष बल की 29 टुकड़ियाँ, महिला रेलवे सुरक्षा विशेष बल की 02 टुकड़ियाँ, 22 डॉग स्क्वाड एवं और 02 बॉम्ब डिस्पोजल स्क्वाड को भी प्रयागराज में ड्यूटी पर लगाया गया है। स्काउट्स एवं गाइड्स, सिविल डिफेंस सहित सभी विभागों की टीमें महाकुंभ में आए श्रद्धालुओं को बेहतर यात्रा सुविधा उपलब्ध कराने हेतु प्रयत्नशील हैं |

श्रद्धालुओं को सुलभता के साथ उनके गंतव्य तक पहुंचाने के लिए प्रयागराज क्षेत्र के सभी स्टेशनों पर आंतरिक मूवमेंट प्लान के अनुरूप कार्य किया गया और श्रद्धालुओं को विशेष गाड़ियों के माध्यम से उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया| इसी क्रम में प्रयागराज जंक्शन पर भी श्रद्धालुओं को उनके गंतव्य के अनुरूप यात्री आश्रयों में भेजा गया । निर्धारित यात्री आश्रय से उन्हें विशेष गाड़ी में बैठा कर उनके गंतव्य तक भेजा गया। यात्रियों की संख्या बढ़ने पर रेलवे ने अपने आपातकालीन प्लान को तुरन्त लागू करते हुए खुसरो बाग में लोगों को होल्ड करके उन्हें सुरक्षित और नियन्त्रित तरीके से यात्री आश्रय शेड के माध्यम से स्टेशन में प्रवेश कराकर ट्रेन में बोर्ड कराया । इस दौरान सभी गतिविधियों की मॉनिटरिंग प्रयागराज जंक्शन पर स्थित कंट्रोल टावर में प्रयागराज मंडल के वरिष्ठ अधिकारीगण द्वारा की जा रही थी एवं स्थिति आकलन कर तत्काल आवश्यक निर्णय लिये जा रहे थे जिससे ट्रेनों से संचालन में किसी प्रकार की बाधा न हो और श्रद्धालुओं को विशेष गाड़ियों के माध्यम से उनके गंतव्य के लिए रवाना किया जा सके| इस दौरान विभिन्न स्टेशनो पर बनाए गए आबाजर्वेशन रूम में भी गंभीर स्थित में लाये गए श्रद्धालुओं का इलाज किया गया।

महाकुंभ -2025 में आए श्रद्धालुओं ने रेलवे की डिजिटल सेवाओं को भी हाथों हाथ लिया। लाखों यात्रियों ने वेबपेज और कुम्भ app को हिट किया।
रेलवे की टीम ने महाकुंभ के अंतिम सप्ताहांत में भी रेगुलर और विशेष गाड़ियों का प्रबंधन जारी रखा। रविवार को रेलवे ने 335 गाड़ियां चलाकर 16 लाख से अधिक लोगों को उनके गंतव्य स्थान पर भेजने में सफलता पाई।
महाकुम्भ 2025 के अंतिम अमृत स्नान के लिए भारतीय रेल ने व्यापक तैयारी की हैं। सभी रेलवे जोन के अधिकारियों और कर्मचारियों को पूरी मुस्तैदी और सेवा भाव के साथ श्रद्धालुओं की सहायता हेतु जुटे रहने का निर्देश दिया गया है। यात्रियों के लिए अतिरिक्त विशेष ट्रेनों के संचालन की व्यवस्था भी की गई है। कुल मिलाकर प्रयागराज से 350 से अधिक ट्रेनों को चलाने की योजना है।

-अश्विनी वैष्णव, रेल मंत्री

कामकाजी महिलाओं के लिए राहत: रायपुर, बिलासपुर और नया रायपुर में बनेंगे छह आधुनिक छात्रावास

रायपुर । छत्तीसगढ़ के दो सबसे बड़े शहरों रायपुर और बिलासपुर में कामकाजी महिलाओं की सुरक्षित एवं सस्ते आवास की बड़ी जरूरत जल्द पूरी होगी। केन्द्रीय वित्त मंत्रालय ने राज्यों के लिए विशेष पूंजीगत सहायता योजना (Scheme for Special Assistance to States for Capital Investment 2024-25) के अंतर्गत रायपुर, बिलासपुर और नया रायपुर में छह कामकाजी महिला छात्रावासों (Working Women’s Hostel) के लिए 202 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। इस राशि से रायपुर नगर निगम द्वारा तेलीबांधा और टाटीबंध में 250-250 सीटर तथा भैंसथान में 223 सीटर महिला छात्रावास बनाए जाएंगे। वहीं बिलासपुर के तिफरा और सिरगिट्टी में सीएसआईडीसी द्वारा 224-224 सीटर छात्रावास का निर्माण किया जाएगा। नया रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण नया रायपुर में एक हजार सीटर छात्रावास बनाएगी।

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने शहरों में कामकाजी महिलाओं के सुरक्षित एवं सस्ते आवास के लिए राशि मुहैया कराने भारत सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया है। उपमुख्यमंत्री श्री अरुण साव ने कहा कि सुशासन के साथ-साथ महिला सशक्तीकरण तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को हासिल करने राज्य शासन ने वर्किंग वीमेन हॉस्टल बनाने के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव प्रेषित किया था।उन्होंने इसकी मंजूरी मिलने पर राज्य की महिलाओं की ओर से भारत सरकार को धन्यवाद ज्ञापित किया है।
उन्होंने कहा कि छात्रावासों के निर्माण से तीनों शहरों में कामकाजी महिलाओं को सुरक्षित आवास मिलेगा।

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा विशेष पूंजीगत सहायता के तहत नया रायपुर में एक हजार सीटर महिला छात्रावास के लिए 103 करोड़ 22 लाख रुपए, रायपुर के टाटीबंध और तेलीबांधा में 250-250 सीटर छात्रावास के लिए क्रमशः 15 करोड़ 10 लाख रुपए और 15 करोड़ पांच लाख रुपए मंजूर किए हैं। रायपुर के ही भैंसथान में 223 सीटर छात्रावास के लिए 17 करोड़ 23 लाख रुपए स्वीकृत किए गए हैं। भारत सरकार द्वारा बिलासपुर के तिफरा और सिरगिट्टी में 224-224 सीटर छात्रावास के लिए क्रमशः 26 करोड़ 15 लाख रुपए और 25 करोड़ 25 लाख रुपए मंजूर किए गए हैं।

सिरपुर: प्राचीन संस्कृति का खजाना

पर्यटन डेस्क ।  छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित एक प्राचीन और ऐतिहासिक स्थल है, जो बौद्ध धर्म, हिंदू धर्म और जैन धर्म के महत्त्वपूर्ण अवशेषों के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ स्थित प्राचीन मंदिर, गुंबद, और स्तूप, भारत की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक हैं।

किसलिए प्रसिद्ध है:
सिरपुर अपनी प्राचीन गुफाओं, मंदिरों और महलों के लिए जाना जाता है। यह स्थान बौद्ध धर्म के प्रमुख स्थलों में से एक माना जाता है और यहाँ की वास्तुकला और मूर्तिकला को देखने के लिए पर्यटक दूर-दूर से आते हैं।

प्रमुख आकर्षण:

  • बौद्ध स्तूप: यहाँ स्थित विशाल बौद्ध स्तूप, जिसे “सिरपुर स्तूप” कहा जाता है, बहुत प्रसिद्ध है।
  • विष्णु मंदिर: यह मंदिर अपनी स्थापत्य कला और शिल्पकला के लिए प्रसिद्ध है।
  • कच्छप गुंबद: एक और ऐतिहासिक स्थल जो सिरपुर में स्थित है और प्राचीन वास्तुकला का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
  • सिरपुर संग्रहालय: यहाँ

दिल्ली की राजनीति पर महिलाओं का कब्जा: सत्ता और विपक्ष दोनों की कमान महिला नेताओं के हाथों में

दिल्ली की राजनीति में इस बार महिलाओं का दबदबा साफ नजर आ रहा है। राजधानी के इतिहास में जहां कभी सुषमा स्वराज और शीला दीक्षित जैसी महिला नेताओं ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई थी, वहीं अब रेखा गुप्ता और आतिशी ने सत्ता और विपक्ष दोनों की कमान संभालकर दिल्ली की राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है।

रेखा गुप्ता की आक्रामक शुरुआत

भाजपा विधायक दल की बैठक के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने तेवर साफ कर दिए। उन्होंने एलान किया कि पिछली सरकार द्वारा रोकी गई सभी कैग रिपोर्ट्स को सदन के पटल पर रखा जाएगा, ताकि जनता जान सके कि किन मुद्दों पर उनके हितों से समझौता हुआ है। रेखा गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अंदाज में कहा कि पिछली सरकार को भ्रष्टाचार के जरिए ली गई जनता की गाढ़ी कमाई वापस करनी होगी।
रेखा गुप्ता पर न सिर्फ दिल्ली की सत्ता को मजबूत करने, बल्कि आरएसएस-भाजपा के वैचारिक मॉडल को पूरी मजबूती से स्थापित करने की जिम्मेदारी है। उनके लिए यह एक कठिन परीक्षा होगी, जिसमें दिल्ली की राजनीति की दिशा और दशा तय होगी।

आतिशी के सामने बड़ी चुनौती

आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी को कालकाजी सीट से जीत के बाद नेता प्रतिपक्ष बनाया गया है। आतिशी के पास न केवल अपनी पार्टी का खोया हुआ जनविश्वास लौटाने की जिम्मेदारी है, बल्कि उन्हें भाजपा सरकार की आक्रामक राजनीति का भी सामना करना होगा।
सदन में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और सौरभ भारद्वाज जैसे कद्दावर नेताओं की गैरमौजूदगी में आतिशी को आम आदमी पार्टी को एकजुट रखना और भाजपा के हमलों का प्रभावी जवाब देना एक बड़ी परीक्षा होगी। यदि आतिशी इसमें सफल रहती हैं, तो यह उनकी राजनीतिक कुशलता का बड़ा प्रमाण होगा।

दिल्ली की राजनीति में महिलाओं की ऐतिहासिक भूमिका

दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री सुषमा स्वराज को भले ही कम समय के लिए मुख्यमंत्री बनने का मौका मिला हो, लेकिन उन्होंने अपने छोटे कार्यकाल में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी। दूसरी ओर शीला दीक्षित ने अपने लंबे कार्यकाल में दिल्ली को विकास के नए पथ पर अग्रसर किया और राजधानी के कायाकल्प की मिसाल पेश की। आज भी दिल्ली की राजनीति में शीला दीक्षित का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है।

महिलाओं के हाथों नई राजनीतिक दिशा

दिल्ली की सत्ता पक्ष की कमान रेखा गुप्ता के पास है, जबकि विपक्ष की अगुवाई आतिशी करेंगी। यदि दोनों पक्ष अपनी जिम्मेदारियों को प्रभावी ढंग से निभाते हैं, तो यह न केवल दिल्ली बल्कि देश की राजनीति में भी एक बड़ा बदलाव साबित होगा। इससे उन राजनीतिक दलों के लिए भी एक मिसाल पेश होगी, जो अब तक महिला नेतृत्व को प्राथमिकता देने से कतराते रहे हैं।
इस नई राजनीतिक तस्वीर में यह देखना दिलचस्प होगा कि रेखा गुप्ता अपने आक्रामक तेवरों और विकास के एजेंडे के साथ कितनी दूर तक जाती हैं और आतिशी अपने राजनीतिक कौशल से भाजपा के प्रचंड बहुमत का मुकाबला करने में कितनी सफल होती हैं।

दिल्ली की राजनीति का यह नया अध्याय आने वाले समय में न केवल दिल्ली की दिशा तय करेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी दूरगामी प्रभाव डालेगा।

सागर जिले में भीषण सड़क हादसा: प्रयागराज से आ रही बस और कंटेनर की टक्कर, 35 यात्री घायल, 6 की हालत गंभीर

सागर। सागर जिले के गढ़ाकोटा थाना क्षेत्र में सोमवार सुबह सागर-दमोह मार्ग पर बरखेड़ा गौतम तिराहा के पास एक भीषण सड़क हादसा हुआ। इस हादसे में प्रयागराज से लौट रही स्लीपर बस और तेज रफ्तार कंटेनर के आमने-सामने टकरा जाने से बस में सवार 35 यात्री घायल हो गए, जिनमें 6 की हालत गंभीर बताई जा रही है।

तेज रफ्तार बनी हादसे की वजह


मिली जानकारी के अनुसार, बस में सवार सभी यात्री बैरसिया के निवासी थे और वे प्रयागराज से रीवा, कटनी, दमोह, सागर होते हुए विदिशा लौट रहे थे। हादसे का कारण दोनों वाहनों की तेज रफ्तार को बताया जा रहा है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कंटेनर चालक ने अचानक नियंत्रण खो दिया, जिससे बस और कंटेनर की आमने-सामने टक्कर हो गई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि बस में सवार यात्रियों में चीख-पुकार मच गई।

घायलों का उपचार और पुलिस की कार्रवाई

घटना की सूचना मिलते ही गढ़ाकोटा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। गंभीर रूप से घायल छह यात्रियों को सागर जिला अस्पताल रेफर किया गया है, जबकि अन्य घायलों का इलाज गढ़ाकोटा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में किया जा रहा है। पुलिस ने मामला दर्ज कर हादसे के कारणों की जांच शुरू कर दी है।

स्थानीय लोगों की तत्परता से बची कई जानें

हादसे के तुरंत बाद आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और घायलों को बस से निकालने और अस्पताल पहुंचाने में सहायता की। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने संयुक्त रूप से राहत और बचाव कार्य को अंजाम दिया। पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और लापरवाही को हादसे का मुख्य कारण माना जा रहा है।

जांच जारी

फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और कंटेनर चालक की भूमिका की भी जांच की जा रही है। हादसे के बाद सागर-दमोह मार्ग पर यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित रहा, जिसे बाद में सामान्य कर दिया गया।

भारत करेगा एशिया-प्रशांत क्षेत्र के 12वें रीजनल 3आर और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम की मेजबानी, जयपुर में होगा आयोजन

नई दिल्ली। भारत एशिया और प्रशांत क्षेत्र में 12वें रीजनल 3आर और सर्कुलर इकोनॉमी फोरम की मेजबानी के लिए पूरी तरह तैयार है। यह सम्मेलन 3 से 5 मार्च 2025 तक जयपुर स्थित राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में आयोजित होगा। कार्यक्रम की थीम “एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सतत विकास लक्ष्यों और कार्बन तटस्थता को प्राप्त करने की दिशा में सर्कुलर समाजों को साकार करना” पर केंद्रित होगी। केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने मंगलवार को नई दिल्ली के राष्ट्रीय मीडिया सेंटर में पत्रकारों को इस कार्यक्रम की जानकारी दी।

सम्मेलन में होगी वैश्विक भागीदारी और तकनीकी भ्रमण

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि तीन दिवसीय इस फोरम में 500 से अधिक अंतरराष्ट्रीय और घरेलू प्रतिभागियों के भाग लेने की उम्मीद है। सम्मेलन के दौरान पूर्ण सत्र, देश-विशिष्ट चर्चाएं और थीम-आधारित गोलमेज सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा प्रतिभागियों को ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबंधन सुविधाओं के तकनीकी क्षेत्र का भ्रमण और जयपुर के प्रमुख विरासत स्थलों को देखने का भी अवसर मिलेगा।

‘इंडिया पैवेलियन’ में दिखेगी भारत की उपलब्धियां

फोरम के दौरान एक समर्पित ‘इंडिया पैवेलियन’ स्थापित किया जाएगा, जिसमें भारत की 3आर और सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़ी प्रमुख पहलों और उपलब्धियों को प्रदर्शित किया जाएगा। इसमें विभिन्न मंत्रालयों और राष्ट्रीय मिशनों की प्रदर्शनियां शामिल होंगी, जो सतत विकास के लिए भारत के समग्र दृष्टिकोण को दर्शाएंगी। सम्मेलन में मंत्रियों और राजदूतों की राउंड टेबल डायलॉग, मेयर्स डायलॉग, पॉलिसी डायलॉग और CITIIS 2.0 कार्यक्रम के तहत समझौतों पर हस्ताक्षर जैसे सत्र भी होंगे।

अंतरराष्ट्रीय व्यापार और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी का आयोजन

फोरम के एक महत्वपूर्ण आकर्षण के रूप में एक अंतरराष्ट्रीय ‘3आर व्यापार और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी’ का आयोजन किया जाएगा। इसमें 40 से अधिक भारतीय और जापानी व्यवसायों और स्टार्ट-अप्स को अपने नवाचार, सर्वोत्तम प्रथाओं और समाधान प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा। यह पहल क्रॉस-लर्निंग को प्रोत्साहित करते हुए सर्कुलरिटी और 3आर सिद्धांतों को मजबूती प्रदान करेगी।

वेस्ट से वेल्थ तक: भारत की अनूठी पहलें

फोरम में भारत भर के गैर सरकारी संगठनों और स्वयं सहायता समूहों द्वारा ‘वेस्ट से वेल्थ’ बनाने की पहलों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। यह पहलें स्थिरता के साथ उद्यमिता और सामुदायिक जुड़ाव को बढ़ावा देंगी, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे।

जयपुर घोषणा के साथ होगा सम्मेलन का समापन

मंत्री मनोहर लाल ने बताया कि फोरम का समापन ‘जयपुर घोषणा (2025-34)’ के साथ किया जाएगा। यह घोषणा एशिया-प्रशांत देशों में संसाधन-कुशल और सर्कुलर अर्थव्यवस्था में परिवर्तन को सक्षम करने की दिशा में एक मार्गदर्शिका के रूप में कार्य करेगी। यह घोषणा वर्ष 2013 से 2023 तक लागू ‘हनोई घोषणा’ पर आधारित होगी और भाग लेने वाले देशों को 3आर और सर्कुलर इकोनॉमी नीतियों को विकसित करने के लिए एक ठोस रूपरेखा प्रदान करेगी।

महत्वपूर्ण साझेदार और पिछला इतिहास

इस फोरम का नेतृत्व भारत सरकार के आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय के स्वच्छ भारत मिशन-शहरी द्वारा किया जा रहा है, जिसमें जापान के पर्यावरण मंत्रालय, यूएन ईएससीएपी, यूएनसीआरडी, यूएनडीएसडीजी और यूएनडीईएसए के सहयोग के साथ राजस्थान सरकार का समर्थन भी शामिल है। गौरतलब है कि भारत ने इससे पहले वर्ष 2018 में इंदौर में आयोजित 8वें संस्करण की मेजबानी की थी, जबकि पिछला 11वां फोरम वर्ष 2023 में कंबोडिया ने आयोजित किया था।

फोरम का उद्देश्य और व्यापक भागीदारी

एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर केंद्रित इस फोरम का उद्देश्य 3आर और सर्कुलर इकोनॉमी पर नीतियों और कार्यों को आकार देने में सदस्य देशों का मार्गदर्शन करना है। सम्मेलन में 38 आमंत्रित सदस्य देशों, भारत सरकार के 15 केंद्रीय मंत्रालयों, लगभग सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों, 60 से अधिक शहरों, 40 से अधिक स्टार्ट-अप्स और व्यवसायों के साथ-साथ लगभग 120 वक्ताओं की भागीदारी होगी।

यह फोरम नीति चर्चाओं, सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावशाली मंच प्रदान करेगा और एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सर्कुलर इकोनॉमी और सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) की प्राप्ति की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति सुनिश्चित करेगा।

ईरान से तेल डील पर अमेरिका का बड़ा एक्शन, भारत की 4 कंपनियों पर लगाई पाबंदी

नई दिल्ली । अमेरिका ने भारत की 4 कंपनियों पर लगा दी पाबंदी, ईरान से तेल डील के चक्कर में बड़ा ऐक्शन ईरान के साथ कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों की डील करने पर अमेरिका ने भारत की 4 कंपनियों पर पाबंदियां लगाई हैं। ईरान के खिलाफ दबाव बढ़ाने की डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की नीति के तहत यह फैसला लिया गया है। अमेरिका के फॉरेन एसेट्स कंट्रोल डिपार्टमेंट ने यह फैसला लिया है। इसके तहत अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कई देशों के 30 लोगों और 4 भारतीय कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए हैं। अमेरिकी विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार जिन 4 भारतीय कंपनियों पर पाबंदियां लगाई गई हैं, उनमें से एक नवी मुंबई स्थित फ्लक्स मैरीटाइम एलएलपी है। इसके अलावा एनसीआर से चलने वाली बीएसएम मैरीन और ऑस्टिनशिप मैनेजमेंट प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। तंजावुर स्थित कॉसमोस लाइंस पर भी अमेरिका ने रोक लगा दी है।पहली तीन कंपनियों पर ईरान के तेल को ढोने वाले जहाजों का प्रबंधन संभालने के लिए प्रतिबंधित किया गया है। इसके अलावा कॉसमोस लाइंस को ईरानी तेल के ट्रांसपोर्ट में शामिल होने पर प्रतिबंधित किया गया है। अमेरिका की ओर से यूएई, हॉन्गकॉन्ग के ऑइल ब्रोकर्स पर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। इसके अलावा भारत और चीन के टैंकर ऑपरेटरों पर भी अमेरिका ने रोक लगाई है। अमेरिकी विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि ईरान को तेल से होने वाली कमाई का इस्तेमाल अतिवादी गतिविधियों में होता है। इसलिए उस पर ऐक्शन लेना जरूरी है। जिन जहाजों और उनसे जुड़ी कंपनियों पर पाबंदी लगाई गई है, उनके द्वारा कई मिलियन बैरल ईरानी तेल का ट्रांसपोर्टेशन किया गया था।
अमेरिका ने ईरान पर भी आरोपों की झड़ी लगाई है। अमेरिका ने कहा कि ईरान को जो कमाई होती है, उसका इस्तेमाल उसने वैश्विक सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए किया है। उसने इस कमाई से परमाणु खतरा पैदा किया है। इसके अलावा बलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम भी आगे बढ़ाया है। यही नहीं ईरान ने आतंकी समूहों को भी मजबूत किया है। अमेरिका ने कहा कि हम उन संस्थाओं पर पाबंदी लगाई है, जिन्होंने ईरान के तेल का ट्रांसपोर्टेशन किया था। अमेरिकी सरकार के अनुसार एशियाई बाजार में ईरान का तेल बिका है। बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने ईरान पर सख्ती बढ़ा दी है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ईरान की आर्थिक गतिविधियों पर रोक लगाने की जरूरत है ताकि वह फंड जुटाकर आतंकवाद पर खर्च न कर सके।

 

महाशिवरात्रि पर आस्था का केंद्र: यूपी की ‘छोटी काशी’ गोला गोकर्णनाथ का पौराणिक शिव मंदिर

लखीमपुर खीरी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ स्थित पौराणिक शिव मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। ‘छोटी काशी’ के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। यहां स्थापित अद्भुत शिवलिंग की मान्यता पुराणों और लोक कथाओं में वर्णित है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी 22 फरवरी को यहां पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक कर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। हरिद्वार और कछला घाट से गंगाजल लाकर भक्त यहां भगवान शिव को अर्पित करते हैं।

भगवान शिव की विचरण स्थली: पौराणिक कथा

गोला गोकर्णनाथ के इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि भगवान शिव ने वैराग्य धारण करने के बाद मृग रूप में यहां के वन क्षेत्र में भ्रमण किया था। वराह पुराण के अनुसार, जब ब्रह्मा, विष्णु और इंद्र ने शिव को खोजते हुए यहां आहट की, तो भगवान शिव मृग रूप में भागने लगे। देवताओं ने उनका पीछा कर उनके सींग पकड़ लिए, जिससे सींग तीन भागों में विभाजित हो गया।

  • पहला भाग भगवान विष्णु ने गोला गोकर्णनाथ में स्थापित किया, जिससे इसे ‘गोकर्णनाथ’ नाम मिला।
  • दूसरा भाग ब्रह्मा जी ने बिहार के श्रृंगेश्वर में स्थापित किया।
  • तीसरा भाग इंद्र ने अमरावती में स्थापित किया।

शिव पुराण, वामन पुराण, कूर्म पुराण, पद्म पुराण और स्कंद पुराण में भी इस स्थल का महात्म्य विस्तार से मिलता है।

रावण और गोला गोकर्णनाथ का पौराणिक संबंध

एक अन्य लोक मान्यता के अनुसार, त्रेतायुग में रावण ने भगवान शिव को लंका ले जाने के लिए तपस्या की। भगवान शिव ने शर्त रखी कि उन्हें रास्ते में कहीं भी रखा गया तो वे वहीं स्थापित हो जाएंगे। रावण जब गोला गोकर्णनाथ पहुंचा, तो उसने शिवलिंग एक चरवाहे को थमा दिया और लघुशंका के लिए चला गया।

काफी देर बाद भी रावण के न लौटने पर चरवाहे ने शिवलिंग भूमि पर रख दिया। लौटने पर रावण ने शिवलिंग को उठाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा। क्रोध में आकर रावण ने अपने अंगूठे से शिवलिंग को भूमि में दबा दिया। मान्यता है कि आज भी शिवलिंग पर रावण के अंगूठे का निशान मौजूद है।

शिव मंदिर का विकास और कॉरिडोर निर्माण

वर्ष 2014 में शिव सेवार्थ समिति ने भक्तों के सहयोग से तीर्थ स्थल के मध्य विशालकाय भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित कराई थी। वर्ष 2016 में आवास विकास योजना के तहत एक करोड़ 10 लाख रुपये की लागत से मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। वर्तमान में इस पौराणिक स्थल को शिव मंदिर कॉरिडोर के रूप में विकसित करने की योजना चल रही है, जिससे श्रद्धालुओं को और अधिक सुविधाएं मिल सकेंगी।

जूना अखाड़ा और मंदिर का इतिहास

करीब डेढ़ सदी पहले जूना अखाड़े के नागा साधु इस पौराणिक शिव मंदिर के सर्वराकार हुआ करते थे। वे छत्र लगे हाथियों पर सवार होकर यहां आते थे। बाद में जूना अखाड़ा ने गोस्वामी समाज को मंदिर की देखरेख का दायित्व सौंपा।

हालांकि, मंदिर निर्माण कब और किसने कराया, इसके कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। पहले यह मंदिर गोल मठिया के रूप में छोटा था। वर्तमान में जनार्दन गिरि पौराणिक शिव मंदिर कमेटी के अध्यक्ष हैं और मंदिर की देखरेख कर रहे हैं।

महाशिवरात्रि के अवसर पर गोला गोकर्णनाथ का यह पौराणिक शिव मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रतीक बना हुआ है।

एडवांटेज असम 2.0 का पीएम मोदी ने किया शुभारंभ; बोले- नॉर्थ ईस्ट से भारत के नए युग की शुरुआत

गुवाहाटी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुवाहाटी के खानापारा स्थित वेटरनरी कॉलेज फील्ड में आयोजित दो दिवसीय ‘एडवांटेज असम 2.0’ निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर शिखर सम्मेलन का भव्य उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में कई केंद्रीय मंत्री, वैश्विक उद्योग जगत के दिग्गज, 61 देशों के राजदूत, विदेशी व्यापार प्रतिनिधिमंडल और छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

पूर्वी भारत और नॉर्थ ईस्ट बनेगा विकास का केंद्र

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि पूर्वी भारत और नॉर्थ ईस्ट की भूमि आज एक नए भविष्य की शुरुआत कर रही है। “एडवांटेज असम पूरी दुनिया को असम की संभावनाओं और प्रगति से जोड़ने का एक महा अभियान है। इतिहास गवाह है कि भारत की समृद्धि में ईस्टर्न इंडिया का बड़ा योगदान रहा है और अब नॉर्थ ईस्ट एक बार फिर अपना सामर्थ्य दिखाने जा रहा है।” उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए असम सरकार और मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा की पूरी टीम को बधाई दी।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का बड़ा दावा

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि 2030 तक असम की अर्थव्यवस्था 143 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच जाएगी। उन्होंने निवेशकों से राज्य की विकास यात्रा में शामिल होने का आह्वान करते हुए कहा, “असम अब ‘सबसे अशांत’ से ‘सबसे शांत’ राज्य बन गया है। इस साल राज्य की जीडीपी वृद्धि दर 15.2 प्रतिशत होगी।” उन्होंने आश्वासन दिया कि असम उद्योगों की स्थापना के लिए सबसे अनुकूल माहौल प्रदान करेगा।

एडवांटेज असम 2.0 में इन क्षेत्रों पर रहेगी खास नजर


एडवांटेज असम 2.0 शिखर सम्मेलन में पर्यटन, नवीकरणीय ऊर्जा और हाइड्रोकार्बन, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस और रक्षा विनिर्माण, बांस और टिकाऊ फसल, खाद्य एवं पेय पदार्थ जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

विदेशी प्रतिनिधियों ने काजीरंगा का किया दौरा

सम्मेलन से पहले 61 देशों के राजदूत रविवार को असम पहुंचे और सोमवार को काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान का दौरा किया। इस दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने राजदूतों के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आयोजित यह शिखर सम्मेलन असम के आर्थिक विकास को वैश्विक निवेश के केंद्र में लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।