तीरथगढ़ जलप्रपात: प्राकृतिक सौंदर्य और शांति का संगम

पर्यटन डेस्क । छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित तीरथगढ़ जलप्रपात कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान के अंदर स्थित है। लगभग 300 फीट की ऊँचाई से गिरता यह जलप्रपात अपनी प्राकृतिक सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। पत्थरों पर गिरता सफेद झरना पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

किसलिए प्रसिद्ध है

तीरथगढ़ जलप्रपात अपने बहु-स्तरीय झरनों और चारों ओर फैली हरियाली के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थल पिकनिक, फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श स्थान है।

प्रमुख आकर्षण

  • बहु-स्तरीय जलप्रपात का दृश्य: जलप्रपात का गिरता पानी प्राकृतिक सीढ़ियों जैसा दिखता है।
  • महादेव मंदिर: जलप्रपात के पास स्थित यह प्राचीन मंदिर धार्मिक महत्व रखता है।
  • जंगल सफारी: कांगेर घाटी के जंगल में वन्यजीवों को देखने का अवसर मिलता है।
  • प्राकृतिक ट्रेकिंग पथ: रोमांच प्रेमियों के लिए ट्रेकिंग के बेहतरीन रास्ते उपलब्ध हैं।

घूमने लायक स्थान

  • कांगेर घाटी राष्ट्रीय उद्यान
  • कुटुमसर और कैलाश गुफाएँ
  • चित्रकोट जलप्रपात (नजदीकी आकर्षण)

कैसे पहुँचें

  • सड़क मार्ग: जगदलपुर से लगभग 35 किमी दूर। टैक्सी और बस की सुविधा उपलब्ध है।
  • रेल मार्ग: जगदलपुर रेलवे स्टेशन निकटतम है।
  • वायु मार्ग: रायपुर से जगदलपुर के लिए नियमित उड़ानें हैं।

ठहरने की सुविधा


जगदलपुर और तीरथगढ़ के आसपास होमस्टे, गेस्ट हाउस और पर्यटन विभाग के रिसॉर्ट्स में ठहरने की उत्तम सुविधा है।

स्थानीय संस्कृति और व्यंजन


बस्तर की पारंपरिक हस्तशिल्प और स्थानीय व्यंजन जैसे चापड़ा चटनी, फरा और बोड़ा यहाँ का मुख्य आकर्षण हैं।

पर्यटन के लिए उपयुक्त समय


सितंबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।

पर्यटकों के लिए सुझाव

  • पानी के पास फिसलन से बचें।
  • अपने साथ ट्रेकिंग के लिए उचित जूते और कपड़े लेकर जाएं।
  • पर्यावरण की सफाई बनाए रखें।

चित्रकोट जलप्रपात: भारत का नियाग्रा जलप्रपात

पर्यटन डेस्क । छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में स्थित चित्रकोट जलप्रपात भारत के सबसे खूबसूरत जलप्रपातों में से एक है। यह जलप्रपात इंद्रावती नदी पर स्थित है और इसकी ऊँचाई लगभग 29 मीटर है। अपनी विशालता और सुंदरता के कारण इसे “भारत का नियाग्रा फॉल्स” भी कहा जाता है। बरसात के मौसम में जब जलप्रपात पूरी तरह से बहता है, तो इसका दृश्य अत्यंत भव्य और मनमोहक होता है।

किसलिए प्रसिद्ध है

चित्रकोट जलप्रपात अपनी चौड़ाई, घने जंगलों से घिरे प्राकृतिक सौंदर्य और प्राचीन धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है। यह स्थान रोमांचक गतिविधियों और प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

प्रमुख आकर्षण

जलप्रपात का भव्य दृश्य: मानसून के दौरान जलप्रपात का दृश्य देखने लायक होता है।

धार्मिक महत्व: पास में स्थित शिव मंदिर और श्रावण माह के दौरान आयोजित धार्मिक अनुष्ठान।

सूर्योदय और सूर्यास्त का नज़ारा: जलप्रपात पर सूरज की किरणें पड़ने से उत्पन्न इंद्रधनुष पर्यटकों को आकर्षित करता है।

नाव की सवारी: शुष्क मौसम में इंद्रावती नदी में नाव की सवारी का आनंद लिया जा सकता है।

घूमने लायक स्थान

तामड़ा घाटी: प्राकृतिक सौंदर्य और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध।

बारसूर: प्राचीन मंदिरों और ऐतिहासिक धरोहरों के लिए जाना जाता है।

कुटुमसर गुफाएँ: चित्रकोट से कुछ ही दूरी पर स्थित, यह गुफाएँ प्रकृति प्रेमियों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं।

कैसे पहुँचें

सड़क मार्ग: जगदलपुर से चित्रकोट की दूरी लगभग 38 किमी है, जहाँ से सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुँचा जा सकता है।

रेल मार्ग: निकटतम रेलवे स्टेशन जगदलपुर है।

वायु मार्ग: स्वामी विवेकानंद एयरपोर्ट, रायपुर से जगदलपुर के लिए नियमित उड़ानें उपलब्ध हैं।

ठहरने की सुविधा

चित्रकोट और जगदलपुर में कई होटल, गेस्ट हाउस और रिसॉर्ट्स उपलब्ध हैं। छत्तीसगढ़ पर्यटन विभाग द्वारा संचालित रिसॉर्ट्स में भी ठहरने की उत्तम व्यवस्था है।

स्थानीय संस्कृति और व्यंजन

बस्तर की लोक संस्कृति, नृत्य और हस्तशिल्प चित्रकोट यात्रा को और भी यादगार बनाते हैं। स्थानीय व्यंजनों में चावल, चापड़ा चटनी और बस्तरिया स्वादिष्ट व्यंजन प्रमुख हैं।

पर्यटन के लिए उपयुक्त समय

चित्रकोट जलप्रपात घूमने का सबसे अच्छा समय जुलाई से अक्टूबर है, जब मानसून के कारण जलप्रपात अपने पूर्ण स्वरूप में होता है।

पर्यटकों के लिए सुझाव

मानसून के दौरान जलप्रपात के पास सावधानी बरतें।

कैमरा साथ लें, ताकि इस खूबसूरत स्थल की यादगार तस्वीरें ले सकें।

स्थानीय गाइड की सहायता से आसपास के अन्य पर्यटन स्थलों की यात्रा करें।

छत्तीसगढ़ बनेगा विज्ञान और नवाचार की राजधानी : मुख्यमंत्री साय

उप-मुख्यमंत्री शर्मा की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित

रायपुर। छत्तीसगढ़ अब शिक्षा, विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में राष्ट्रीय पहचान बनाने की ओर अग्रसर है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में साइंस सिटी की स्थापना की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाए जा रहे हैं। नवा रायपुर के सेक्टर-13 में 30 एकड़ भूमि पर बनने वाली इस साइंस सिटी को आधुनिकतम तकनीकों से युक्त किया जाएगा, जो छत्तीसगढ़ को विज्ञान और तकनीक का नया केंद्र बनाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर आज उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विजन के अनुरूप इस परियोजना को तेजी से और समयबद्ध रूप से पूरा करने की रणनीति पर चर्चा हुई।

बैठक में अपर मुख्य सचिव, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग रेणु पिल्ले, छत्तीसगढ़ रीजनल साइंस सेंटर के महानिदेशक डॉ. एस. कर्मकार सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक और विशेषज्ञ मौजूद रहे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का विजन: छत्तीसगढ़ बनेगा विज्ञान और नवाचार का अग्रणी राज्य

बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को केवल प्राकृतिक संसाधनों का राज्य नहीं, बल्कि वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचारों के केंद्र के रूप में भी विकसित किया जाना है। उपमुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने बैठक में निर्देशित किया कि साइंस सिटी को “एडुटेनमेंट” (शिक्षा + मनोरंजन) की अवधारणा पर विकसित किया जाए, जिससे छात्रों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर मिले।

बैठक में बताया गया कि साइंस सिटी में कई अत्याधुनिक सुविधाएं होंगी, जो इसे देश के अग्रणी विज्ञान केंद्रों में शामिल करेंगी। इसमें अंतरिक्ष एवं खगोल विज्ञान केंद्र, स्मार्ट सिटी एवं ग्रीन टेक्नोलॉजी सेक्शन, जलवायु परिवर्तन केंद्र, रोबोटिक्स एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लैब, एयरोस्पेस रिसर्च सेक्शन, वर्चुअल एक्सपेरिमेंट लैब, थ्रीडी थिएटर और इमर्सिव डिस्प्ले जैसी अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल होंगी। इन नवाचारों के माध्यम से छात्रों, शोधकर्ताओं और आम नागरिकों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के प्रति रुचि विकसित करने का अवसर मिलेगा।

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि साइंस सिटी सिर्फ एक शैक्षिक संस्थान नहीं, बल्कि यह प्रदेश के युवाओं के लिए एक प्रेरणादायक केंद्र बनेगा। उन्होंने निर्देश दिया कि इसमें छात्रों के लिए एक्सपेरिमेंटल लर्निंग ज़ोन बनाए जाएं, जहां वे वैज्ञानिक अवधारणाओं को व्यावहारिक रूप से समझ सकें।

बैठक में चर्चा हुई कि साइंस सिटी छत्तीसगढ़ के आर्थिक और सामाजिक विकास में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी। यह न केवल छत्तीसगढ़ में विज्ञान पर्यटन को बढ़ावा देगी, बल्कि यहां के युवाओं और वैज्ञानिकों को वैश्विक स्तर के अनुसंधान और नवाचार के अवसर उपलब्ध कराएगी।

साइंस सिटी का राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय महत्व

साइंस सिटी न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि पूरे देश के लिए विज्ञान शिक्षा और नवाचार को नई दिशा देने वाली परियोजना होगी। बैठक में निर्णय लिया गया कि इस केंद्र में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के विज्ञान सम्मेलन और शोध कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा, जिससे यहां के विद्यार्थी और शोधकर्ता दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों के साथ काम करने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे।

समयबद्ध क्रियान्वयन और तकनीकी नवाचारों पर विशेष जोर

बैठक के दौरान उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस परियोजना को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए और इसे भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया जाए। उन्होंने कहा कि साइंस सिटी को नवाचार और अनुसंधान का वैश्विक स्तर का केंद्र बनाने के लिए अत्याधुनिक तकनीकी सुविधाओं को शामिल किया जाए। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की यह साइंस सिटी देश की प्रमुख विज्ञान परियोजनाओं में से एक होगी और यह प्रदेश के वैज्ञानिक और तकनीकी विकास में अभूतपूर्व योगदान देगी। बैठक में बताया गया कि साइंस सिटी के विभिन्न सेक्शनों को इस तरह डिज़ाइन किया जाए कि वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की विज्ञान प्रदर्शनियों, नवाचार प्रतियोगिताओं और शोध परियोजनाओं की मेजबानी कर सकें। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को जल्द से जल्द मूर्त रूप देने के लिए राज्य सरकार, वैज्ञानिक समुदाय और शिक्षाविदों के सहयोग से एक कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिससे छत्तीसगढ़ विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सके।

छत्तीसगढ़ का भविष्य विज्ञान और नवाचार में – मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को केवल पारंपरिक संसाधनों और कृषि राज्य तक सीमित नहीं रखा जाएगा। अब हमें आगे बढ़कर विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में देश और दुनिया के अग्रणी राज्यों में शामिल होना है। साइंस सिटी इस दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए नए अवसर खोलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि यह परियोजना सिर्फ एक शैक्षिक केंद्र नहीं होगी, बल्कि यह प्रदेश के युवाओं और वैज्ञानिकों को वैश्विक मंच प्रदान करने का एक सशक्त प्रयास है। अब छत्तीसगढ़ सिर्फ धान का कटोरा नहीं, बल्कि विज्ञान और नवाचार की राजधानी बनने की ओर अग्रसर हो रहा है।

छत्तीसगढ़ की आस्था का केंद्र शिवरीनारायण महोत्सव प्रारंभ, उप मुख्यमंत्री साव ने किया अटल परिसर का लोकार्पण

रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज माता शबरी की नगरी शिवरीनारायण में शिवरीनारायण महोत्सव का शुभारंभ किया। जांजगीर-चांपा जिले के शिवरीनारायण में महंत लाल दास महाविद्यालय मैदान में 23 फरवरी से 26 फरवरी तक इसका आयोजन किया गया है। चार दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में प्रतिदिन विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन होंगे। सांसद कमलेश जांगड़े और विधायक शेषराज हरबंश भी शुभारंभ कार्यक्रम में शामिल हुईं। उप मुख्यमंत्री साव ने शिवरीनारायण नगर पंचायत में प्रतीक्षा बस स्टैंड में नवनिर्मित अटल परिसर में भारतरत्न स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी की प्रतिमा का अनावरण कर अटल परिसर का लोकार्पण भी किया।

उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने शिवरीनारायण महोत्सव का मुख्य अतिथि के रूप में शुभारंभ करते हुए कहा कि त्रिवेणी संगम पर बसा शिवरीनारायण का प्रसिद्ध मेला हमारी संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक है। शिवरीनारायण की प्रसिद्धि प्राचीन काल से चली आ रही है। यहां के मेले की ख्याति पूरे छत्तीसगढ़ सहित अन्य प्रदेशों में भी हैं। हमारा शिवरीनारायण आस्था और श्रद्धा का केंद्र हैं, यह पवित्र धाम है।

उप मुख्यमंत्री साव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और सभ्यता बहुत ही गौरवशाली रही है। छत्तीसगढ़ की धरती धार्मिक, आध्यात्मिक एवं पौराणिक रूप से समृद्ध है। इसमें शिवरीनारायण का महत्वपूर्ण स्थान है। शिवरीनारायण छत्तीसगढ़ का प्रसिद्ध तीर्थस्थल है। यहाँ लगने वाला माघ पूर्णिमा का मेला अपनी विशेषताओं के लिए जाना जाता है। छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष नारायण चंदेल, पूर्व विधायक अंबेश जांगड़े और चुन्नीलाल साहू, कलेक्टर आकाश छिकारा और पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला सहित अनेक जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक शिवरीनारायण महोत्सव के शुभारंभ कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मौजूद थे।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने गोल्ड कप फुटबॉल प्रतियोगिता के समापन पर किया रणजीता स्टेडियम के जीर्णोद्धार का ऐलान

रायपुर। मुख्यमंत्री  विष्णुदेव साय आज जशपुर में स्व. दिलीप सिंह जूदेव स्मृति अखिल भारतीय गोल्ड कप फुटबॉल प्रतियोगिता के समापन समारोह में शामिल हुए। इस प्रतियोगिता का आयोजन 8 फरवरी से 23 फरवरी 2025 तक जशपुर के रणजीता स्टेडियम में किया गया।

मुख्यमंत्री  विष्णु देव साय ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि प्रदेश के खिलाड़ियों को खेल के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीतने पर खिलाड़ियों को 3 करोड़, रजत पदक पर 2 करोड़ और कांस्य पदक पर 1 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि खेलों के प्रति खिलाड़ियों के बढ़ते उत्साह और सरकार के समर्थन से छत्तीसगढ़ खेल हब बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने रणजीता स्टेडियम के जीर्णोद्धार की घोषणा करते हुए कहा कि रणजीता स्टेडियम को अंतरराष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।

प्रतियोगिता में देशभर के 16 राज्यों से आई राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल टीमों ने भाग लिया।प्रतियोगिता के फाइनल मैच में रेलवे नागपुर और एमईजी बैंगलूरू की टीमें आमने-सामने रहीं। मुख्यमंत्री श्री साय ने फाइनल मुकाबले का आनंद लिया और विजेता टीम को बधाई दी। उन्होंने आयोजन समिति को सफल आयोजन के लिए सराहा और भविष्य में ऐसे आयोजनों को और अधिक भव्य बनाने का आश्वासन दिया। अनेक वर्षों के लंबे अंतराल के बाद रणजीता स्टेडियम में राष्ट्रीय स्तर की टीमों को खेलते हुए देखना खेल प्रेमियों के लिए रोमांचक अनुभव रहा।शहरवासियों के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण अंचलों से भी बड़ी संख्या में दर्शक इस ऐतिहासिक मुकाबले का आनंद लेने पहुंचे।

इस अवसर पर जशपुर विधायक रायमुनि भगत, सरगुजा क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष एवं पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, नगर पालिका अध्यक्ष श्री अरविंद भगत, नव निर्वाचित पार्षद,  यश प्रताप सिंह जूदेव, शौर्य प्रताप सिंह जूदेव, शांति भगत, पार्षद फैजान सरवर, ओम प्रकाश, नरेश नंदे सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, खिलाड़ी, कोच और खेल प्रेमी उपस्थित रहे।

सीएम उमर अब्दुल्ला ने सिंध नदी पर बने अखल पुल का उद्घाटन किया, 2008 में हुआ था शिलान्यास

श्रीनगर । जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कंगन में सिंध नदी पर बने 82 मीटर लंबे अखल पुल का उद्घाटन किया। यह पुल करीब आठ करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुआ है और इसने क्षेत्र में परिवहन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का आश्वासन दिया है।

अखल पुल, जो कुनमुल-अखल और आसपास के कई गांवों को जोड़ता है, स्थानीय जनजीवन में महत्वपूर्ण बदलाव लाएगा। उद्घाटन के मौके पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि यह पुल क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों और विकास को बढ़ावा देगा, जिससे हजारों लोगों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होगा। स्थानीय निवासियों ने इस पुल के उद्घाटन को लेकर मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

इस पुल का शिलान्यास 2008 में किया गया था, लेकिन निर्माण में कई रुकावटों के कारण इसका कार्य धीमी गति से चलता रहा। इसके अलावा, सिंध नदी पर एक और पुल था जिसे असुरक्षित घोषित कर दिया गया था, जिससे कई समस्याएं उत्पन्न हो रही थीं, जैसे कि अग्निशमन वाहनों का पहुंचने में दिक्कतें आना। अब अखल पुल के उद्घाटन से इन समस्याओं का समाधान होने की उम्मीद है।

इस अवसर पर कंगन के विधायक मियां मेहर अली, डीडीसी सदस्य, गांदरबल के उपायुक्त, लोक निर्माण विभाग (आरएंडबी) के मुख्य अभियंता और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

महाकुंभ 2025: रेलवे ने बढ़ाई ट्रेनों की संख्या, शनिवार शाम को चलाईं 5 अनारक्षित ट्रेनें

नई दिल्ली । भारतीय रेलवे ने महाकुंभ 2025 के मद्देनजर शनिवार शाम को नई दिल्ली से प्रयाग के लिए 5 अनारक्षित ट्रेनें चलाईं, जिससे तीर्थयात्रियों की भीड़ को बेहतर तरीके से समायोजित किया जा सके। रेलवे मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संबंधित अधिकारियों को टिकट बिक्री और यात्रियों की भीड़ की निगरानी करने के निर्देश दिए थे।

रेलवे बोर्ड के चेयरमैन और उत्तर रेलवे, उत्तर मध्य रेलवे तथा उत्तर पूर्व रेलवे के महाप्रबंधकों ने समय-समय पर भीड़ और टिकट बिक्री का डेटा लिया, जिससे विशेष ट्रेनों की योजना बनाई गई। शनिवार की शाम, प्रयागराज के लिए टिकट बिक्री में भारी वृद्धि देखी गई।

शाम 6 बजे से 7 बजे तक, प्रयागराज के लिए 2375 टिकट बेचे गए, जबकि 7 बजे से 8 बजे के बीच 2950 टिकट बिके। इसके बाद, 8 बजे से 9 बजे तक 3429 टिकट बिके। 9 बजे से 10 बजे के दौरान 2662 टिकट और 10 बजे से 11 बजे तक 1689 टिकट बेचे गए।

महाकुंभ में बड़ी संख्या में तीर्थयात्रियों की यात्रा को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने अतिरिक्त ट्रेन सेवाएं संचालित कीं। भारतीय रेलवे लगातार यात्रियों के लिए सुविधाजनक यात्रा विकल्प प्रदान करने के लिए प्रयासरत है।

सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: भ्रष्टाचार निवारण कानून में हर केस की प्रारंभिक जांच अनिवार्य नहीं

नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने भ्रष्टाचार निवारण कानून (Prevention of Corruption Act) के तहत कार्रवाई को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। शीर्ष अदालत ने यह स्पष्ट किया कि हर मामले में प्रारंभिक जांच (preliminary inquiry) अनिवार्य नहीं है और आरोपी का यह निहित अधिकार नहीं है। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह टिप्पणी दी।

अदालत ने कहा कि कुछ मामलों में प्रारंभिक जांच की आवश्यकता हो सकती है, लेकिन यह किसी आपराधिक मामले की शुरुआत के लिए अनिवार्य नहीं है। कोर्ट ने यह भी बताया कि प्रारंभिक जांच का उद्देश्य केवल यह पता लगाना है कि क्या सूचनाओं के आधार पर किसी संज्ञेय अपराध की पुष्टि होती है, न कि सूचना की सत्यता की पुष्टि करना।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत मामले दर्ज करने और प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया को लेकर नई दिशा स्पष्ट हो गई है।

प्रधानमंत्री मोदी महिला दिवस पर करेंगे खास पहल, प्रेरणादायक महिलाओं को सौंपेंगे अपना सोशल मीडिया अकाउंट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 119वें संस्करण में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। पीएम मोदी ने कहा कि 8 मार्च को महिला दिवस के अवसर पर वह अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स—एक्स (पूर्व ट्विटर) और इंस्टाग्राम—देश की प्रेरणादायक महिलाओं को एक दिन के लिए सौंपेंगे।

पीएम मोदी ने कहा कि भारत में सभी विद्याओं को देवी के विभिन्न स्वरूपों की अभिव्यक्ति माना जाता है और बेटियों का सम्मान सर्वोपरि रहा है। उन्होंने संविधान सभा में हंसा मेहता के संबोधन का उल्लेख करते हुए महिलाओं के महत्व और योगदान पर बल दिया।

प्रधानमंत्री ने बताया कि जिन महिलाओं को यह अवसर मिलेगा, उन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल की हैं। उन्होंने कहा, “मंच भले ही मेरा होगा, लेकिन वहां उनके अनुभव, चुनौतियां और उपलब्धियों की बातें होंगी।”

प्रधानमंत्री मोदी ने देश की महिलाओं से आग्रह किया कि जो भी इस पहल का हिस्सा बनना चाहती हैं, वे नमो एप पर बनाए गए विशेष फोरम के माध्यम से आवेदन करें और अपने कार्यों और अनुभवों को पूरी दुनिया तक पहुंचाएं। पीएम मोदी ने सभी से मिलकर इस महिला दिवस पर अद्वितीय नारी-शक्ति का सम्मान और उत्सव मनाने की अपील की।

पीएम मोदी का तीन राज्यों का दौरा: बागेश्वर धाम में 200 करोड़ की लागत से बनेगा चिकित्सा संस्थान, किसानों को मिलेगी सहायता राशि

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार से मध्यप्रदेश, बिहार और असम के तीन दिवसीय दौरे पर रहेंगे। दौरे की शुरुआत मध्यप्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम से होगी, जहां वह बालाजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना करेंगे और 200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बागेश्वर धाम चिकित्सा एवं विज्ञान अनुसंधान संस्थान की आधारशिला रखेंगे। इस कैंसर संस्थान के निर्माण से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को नई दिशा मिलेगी। प्रधानमंत्री के दौरे को देखते हुए बागेश्वर धाम में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।

वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन में होंगे शामिल


पीएम मोदी सोमवार को भोपाल में दो दिवसीय वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। यह सम्मेलन मध्यप्रदेश को वैश्विक निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करेगा। इसमें फार्मा, चिकित्सा उपकरण, परिवहन, उद्योग, कौशल विकास, पर्यटन और एमएसएमई पर विशेष सत्र आयोजित होंगे। सम्मेलन में 60 से अधिक देशों के प्रतिनिधि, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारी और 300 से अधिक भारतीय कारोबारी भाग लेंगे।

किसानों को देंगे सहायता राशि और असम में होंगे सांस्कृतिक कार्यक्रम में शामिल


प्रधानमंत्री सोमवार को ही बिहार के भागलपुर में पीएम किसान योजना की 19वीं किस्त जारी करेंगे, जिससे किसानों को नकद सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा वह बिहार के लिए विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन भी करेंगे। सोमवार शाम पीएम मोदी असम के सांस्कृतिक कार्यक्रम ‘झुमोर बिनंदिनी’ में शामिल होंगे, जो असम के चाय जनजातियों और अनुसूचित जनजातियों की सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। मंगलवार को प्रधानमंत्री गुवाहाटी में एडवांटेज असम निवेश और बुनियादी ढांचा शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे, जिससे असम के औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।