परासी स्कूल के बच्चों का ‘भविष्य’ अधर में, ठेकेदार की मनमानी और प्रशासन की बेरुखी जारी

SHARE:

मरवाही। मरवाही जनपद के ग्राम परासी में एक ओर शिक्षा की गुणवत्ता के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, तो वहीं दूसरी ओर परासी मिडिल स्कूल के बच्चे एक साल से आसमान के नीचे या जर्जर अस्थायी शेड में पढ़ने को मजबूर हैं। एक साल पहले स्कूल की पुरानी इमारत को गिराकर ‘नया भवन’ बनाने का सपना दिखाया गया था, लेकिन आज यह स्थल केवल भ्रष्टाचार और लापरवाही का स्मारक बन कर रह गया है।

सवाल-जवाब का खेल, धरातल पर शून्य

कल इस गंभीर मामले पर खबर प्रमुखता से दिखाए जाने के बाद भी प्रशासन के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही है। जिम्मेदार विभागों की कार्यशैली किसी मजाक से कम नहीं है:

कहां गया बजट? परियोजना का 40 से 50 फीसदी भुगतान हो चुका है। यदि बजट का बड़ा हिस्सा जारी हो चुका है, तो निर्माण कार्य बंद क्यों है? यह जनता के पैसों की सीधी बर्बादी है।

अधिकारियों की टालमटोल: जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी यह बताने को तैयार नहीं हैं कि आखिर काम को बीच में छोड़ने वाले ठेकेदार पर अब तक जुर्माना या एफआईआर क्यों नहीं की गई?

बच्चों का भविष्य: गर्मी और बारिश के बीच बच्चे असुरक्षित और बुनियादी सुविधाओं से विहीन स्थानों पर बैठने को मजबूर हैं।

क्या अब भी जागेगा प्रशासन?

लगातार दूसरी बार इस मुद्दे को उठाए जाने के बावजूद प्रशासनिक चुप्पी यह दर्शाती है कि जिले में सरकारी कार्यवाहियों पर किसी का नियंत्रण नहीं है। ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही निर्माण कार्य पुनः शुरू नहीं हुआ, तो वे स्थानीय प्रशासन की इस विफलता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाएंगे।

ठेकेदारी प्रथा की आड़ में बच्चों के अधिकारों का यह हनन कब तक चलेगा? क्या प्रशासन को किसी बड़े हादसे का इंतजार है?

Lovekesh Singh Dixit
Author: Lovekesh Singh Dixit

Bureau Chief Gaurela Pendra Marwahi Mo. No. +918085565657

Leave a Comment