होइये वहीं जो राम रची राखा – ललित

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शुभमविहार मानस मंडली के प्रेणता श्री सत्यनारायण पांडेय ने पहली बार सतत साप्ताहिक सुंदरकांड का संकल्प लिया था। तब उन्होंने भगवान श्रीराम से प्रार्थना की थी कि प्रभु कम से कम 52 श्रद्धालुओं के मन मे अपने अपने घरों में सुंदरकांड करवाने की प्रेरणा अवश्य ही जाग्रत करना, ताकि उनका संकल्प पूर्ण हो सके। प्रभुराम की ऐसी कृपा हुई कि युगाब्द 5128 वैशाख कृष्ण पक्ष द्वितीया की पावन तिथि में तारबाहर मस्जिद के पीछे स्थित राजसदन अपार्टमेंट निवासी डॉ आरती गायकवाड़ के निवास पर उनके पति की प्रथम पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में 197 वां सतत् सुंदरकांड का पाठ करने का सुअवसर मिला। आयोजन में ललित अग्रवाल ने बताया कि सामान्यतः मैकाले की कुटिल शिक्षा पध्दति से शिक्षित जनसामान्य वास्तविक हिंदू संस्कृति व संस्कार दीप प्रज्ज्वलन, ईश आराधना, भजन गायन को भूल विदेशी संस्कृति का अंधानुकरण में भूल गए हैं। लेकिन आज पारंपरिक तरीके से सनातन संस्कृति व संस्कार से ओतप्रोत पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में सुंदरकांड के 197 वे मानस पाठ ने गदगद कर दिया। उन्होंने समस्त जागरूक, धर्मंनिष्ठ, देशभक्तों विशेष कर माताओं-बहनों से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों को संस्कार देने हेतु जाति भेद समाप्त कर गौत्र व्यवस्था का अनुकरण करते हुए कम से कम प्रतिदिन एकबार तथा सप्ताह में एकबार सामूहिक हनुमान चालीसा पढ़ने की आदतें अवश्य ही डाले। बच्चों को आदर्श के रूप में श्रीराम, श्री हनुमान व स्वतंत्रता संग्राम के वीरो को बनाये। तभी वे एक आदर्श नागरिक बनेंगे तथा हमारा राष्ट्र अखंड रहेगा। सतत सुंदरकांड का आध्यात्मिक पाठ होना इस बात का द्योतक हैं कि जब तक रामजी की कृपा नहीं हो तब तक जहां लोग सालों साल सुंदरकांड का पाठ नही करवा पाते है। गायकवाड़ परिवार इतना भाग्यवान हैं कि आज सतत 197 वां पाठ अपने निवास में करवा कर प्रभु कृपा के पात्र बने हैं। अवश्य ही यहां संतजनों का निवास हैं।आयोजन में शुभमविहार मानस मंडली के अध्यक्ष आख़िलानन्द पांडेय, ललित अग्रवाल, ईश्वर तिवारी, आर पी मिश्रा, प्रमोद अवस्थी, अखिलेश द्विवेदी, विनोद अवस्थी, भूपेंद्र यादव सहित सैकड़ो की सँख्या में श्रद्धालुओं मातृशक्तियों ने सामूहिक सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ किया। अखिलानंद पाण्डेय ने बताया कि वो दिन दूर नहीं जब सतत् सुंदरकांड की माला के 200 मोती पूर्ण हो जाएंगे। लेकिन उनका हौसला कम नहीं होगा। बिलासपुर के घर घर में संस्कार व संस्कृति जाग्रत करने तक उनका यह निःशुल्क अभियान जारी रहेगा।।

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